जांच रिपोर्टों का हश्र: कई मामलों में निष्कर्ष पर सवाल, हवाई साबित हुई कार्रवाई; अहमदाबाद हादसे में क्या होगा?
विमानन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जांच से न सिर्फ हादसों के कारणों का खुलासा होता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों की उड़ान सुरक्षा तय करती हैं। पारदर्शिता, विशेषज्ञता और समयबद्धता इस प्रक्रिया का मूल आधार होती है। कुछ मामलों में यह नजर आई, लेकिन कई हादसों पर सवाल भी उठे कि क्या पूरी सच्चाई सामने आ पाई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत समेत दुनियाभर के हवाई हादसों में असमय हजारों जिंदगियां जाने का दर्द जितना अधिक होता है, हादसे की जांच भी उतनी ही टीस देती है। कई मामलों में जांच वर्षों तक लंबित रही, तो कई की जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी। कई हादसों में तो तकनीकी कारणों को ही जिम्मेदार बताकर मामला शांत कर दिया जाता है। अक्सर दोषियों पर कार्रवाई तक नहीं हो पाती।
विमानन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जांच से न सिर्फ हादसों के कारणों का खुलासा होता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों की उड़ान सुरक्षा तय करती हैं। पारदर्शिता, विशेषज्ञता और समयबद्धता इस प्रक्रिया का मूल आधार होती है। कुछ मामलों में यह नजर आई, लेकिन कई हादसों पर सवाल भी उठे कि क्या पूरी सच्चाई सामने आ पाई। कुछ निष्कर्ष तो विवादों में घिर गए। हादसे की जांच रिपोर्ट आने में औसतन 1 से 3 साल लगते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय नियम कहते हैं कि 12 महीने में रिपोर्ट आ जानी चाहिए। कई मामलों में जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव, विमान कंपनियों से मिलीभगत या तकनीकी जानकारी सार्वजनिक न करने के आरोप लगते हैं।
सबसे रहस्यमयी हादसा, मलयेशिया विमान ही गायब हो गया
मलयेशियन एयरलाइंस के विमान एमएच 370 को विमानन इतिहास की सबसे रहस्यमयी घटना माना जाता है। 8 मार्च, 2014 को कुआलालंपुर से बीजिंग जा रहा यह विमान रहस्यमयी ढंग से गायब हो गया। उड़ान भरने के कुछ देर बाद विमान रडार से ही गायब हो गया। आज तक इसका मलबा भी नहीं मिला है। कई अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने वर्षों तक तलाश की, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका। मलयेशिया सरकार ने जुलाई, 2018 में पेश अंतिम रिपोर्ट ने कहा कि विमान को जानबूझकर दिशा से भटकाया गया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि जिम्मेदार कौन था? रिपोर्ट अधूरी और निराशाजनक मानी गई।
सुपरसोनिक कॉनकार्ड...हादसे के बाद स्थायी रूप से रिटायर
ध्वनि से दोगुनी गति (मैक 2) से उड़ान भरने वाले सुपरसोनिक कॉनकॉर्ड दुनिया का सबसे तेज गति से उड़ने वाला यात्री विमान था। पर, 25 जुलाई, 2002 को पेरिस के निकट हुई भीषण दुर्घटना ने इस पर ब्रेक लगा दिया। तब, एअर फ्रांस का कॉनकॉर्ड विमान 4590 पेरिस के चार्ल्स डे गॉल हवाई अड्डे से न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भर रहा था। टेकऑफ के तुरंत बाद उसमें आग लग गई और वह होटल से टकरा कर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार चालक दल समेत सभी 109 और जमीन पर 4 लोगों की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि रनवे पर पड़े छोटे टाइटेनियम के टुकड़े ने कॉनकॉर्ड के टायर को फाड़ दिया। तेज रफ्तार पर टायर फटने से टुकड़े ऊपर की ओर उछले और ईंधन टैंक में छेद कर दिया। इससे तेल रिसाव और आग लग गई। जांच में पता चला कि कॉनकॉर्ड की फ्यूल टैंक डिजाइन में आग प्रतिरोध की कमी थी। इसे तत्काल रोक दिया गया। कुछ तकनीकी बदलावों के साथ 2001 में सीमित सेवा बहाल हुई, पर अत्यधिक लागत, कम यात्रियों की संख्या और सुरक्षा की चिंता के कारण 2003 में कॉनकॉर्ड को स्थायी रूप से रिटायर कर दिया गया। यह विमान लगभग 2,180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने में सक्षम था।
इसे भी पढें- Air India Tragedy: डीएनए जांच से अब तक 19 मृतकों की पहचान; अहमदाबाद हादसे में हताहतों की संख्या 270 तक पहुंची
जानबूझकर क्रैश किया, 150 की मौत
2015 में बार्सिलोना से डसेलडॉर्फ जा रहे जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525 को को-पायलट ने जानबूझकर फ्रेंच आल्प्स में क्रैश कर दिया। 150 लोगों की मौत हुई। ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट रिकॉर्डिंग से 3 महीने के भीतर सटीक जानकारी सामने आई। पायलट की मानसिक स्थिति को जिम्मेदार ठहराया गया। इस घटना के बाद कई देशों ने पायलटों की मानसिक जांच की व्यवस्था को सख्त किया। इसके बाद यूरोपीय संघ ने कॉकपिट में दो क्रू सदस्यों की अनिवार्यता लागू की।
एयर फ्रांस फ्लाइट 447 तकनीकी विफलता और प्रशिक्षण में खामी
2009 में रियो से पेरिस जा रहे इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 228 लोगों की जान गई। विमान अटलांटिक महासागर में गिरा और मलबा वर्षों बाद मिला। जांच निष्कर्ष में फ्रांस की बीईए ने पाया कि आइसिंग के कारण एयरस्पीड सेंसर काम नहीं कर रहे थे और पायलटों ने गलत प्रतिक्रिया दी। रिपोर्ट के बाद एयरबस विमानों में ऑटोमेशन और प्रशिक्षण प्रणाली में व्यापक बदलाव हुए।
सॉफ्टवेयर की खामी से बोइंग 737 मैक्स हादसा
2018-19 में दो अलग-अलग देशों इथियोपिया और इंडोनेशिया में बोइंग 737 मैक्स विमान गिरने से 346 जानें गईं। जांच निष्कर्ष में अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) और बोइंग पर सॉफ्टवेयर खामी छुपाने का आरोप लगा। जांच रिपोर्ट करीब डेढ़ साल में आईं। रिपोर्टों ने कंपनी और नियामकों दोनों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। इसके परिणामस्वरूप 737 मैक्स विमानों को करीब 20 महीने तक ग्राउंड कर दिया गया।
कनिष्क आतंकवाद का शिकार
1984 में आयरिश हवाई क्षेत्र में उड़ते समय 9,400 मीटर की ऊंचाई पर एअर इंडिया फ्लाइट 182 कनिष्क को बम से उड़ा दिया गया और वह अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए। यह भारत की अब तक की सबसे घातक विमान दुर्घटना है। कनाडा की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि यह खालिस्तान समर्थकों द्वारा किया गया आतंकी हमला था। सुरक्षा एजेंसियों की खुफिया चूक और हवाई सुरक्षा की विफलता को चिन्हित किया गया। इस मामले में न्याय प्रक्रिया धीमी रही और मुख्य दोषियों को सजा नहीं मिल पाई, जिससे पीड़ित परिवारों में आक्रोश रहा। इसकी अंतिम न्यायिक जांच रिपोर्ट आने में करीब 21 साल लग गए और कनाडा सरकार ने 2006 में रिपोर्ट जारी की।
अरब सागर में गिरा विमान
मुंबई से दुबई के लिए उड़ान भरने के कुछ मिनटों बाद एअर इंडिया फ्लाइट 855 वर्ष 1978 में अरब सागर में गिर गया। इसमें 213 यात्रियों की मौत हुई। जांच के बाद पता चला कि पायलट ने इंस्ट्रूमेंट रीडिंग को सही तरीके से नहीं पढ़ा, जिससे विमान असंतुलित होकर गिर गया। रिपोर्ट में प्रशिक्षण और इंस्ट्रूमेंट डिटेक्शन में सुधार की सिफारिश की गई थी।
मध्यप्रदेश में दो विमानों की टक्कर
सऊदी अरब एयरलाइंस और कजाखस्तान एयरलाइंस के विमान 1996 में मध्यप्रदेश के मंडला जिले में हवा में ही टकरा गए। 349 लोगों की मौत हुई। जांच में टक्कर की मुख्य वजह कजाखस्तान एयरलाइंस के पायलट का गलत ऊंचाई पर उड़ान भरना पाया गया। रिपोर्ट में एयर ट्रैफिक कंट्रोल और भाषा संबंधी सीमाओं को भी जिम्मेदार ठहराया गया। इसके बाद भारत ने दिल्ली क्षेत्र में सेकेंडरी रडार और मिड एयर कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम (टीसीएएस) को अनिवार्य किया।
भारतीय सेना का विमान प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। इससे सैन्य उड्डयन हादसों की जांच पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
रनवे से फिसला, पायलट की मिली गलती
22 मई 2010 को दुबई से मंगलुरु आया एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट 812 लैंडिंग के दौरान टेबलटॉप रनवे पार कर खाई में गिरा। 158 लोगों की जान गई।जांच रिपोर्ट करीब डेढ़ साल में आई और पायलट की गलती, संचार में कमी और रनवे की डिजाइन को दोषी ठहराया गया। इसके बाद कई सिफारिशें की गईं, लेकिन रनवे सुधारों में कई वर्ष और लग गए।