राम मंदिर: फारूक बोले - तो वह भी पत्थर लगाने जाएंगे, वेदांती ने दिया सुलह का फार्मूला
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अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 10 जनवरी से शुरू होनेवाली सुनवाई को लेकर विभिन्न नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही है। नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि इस मामले पर चर्चा को जरुरी बताते हुए कहा कि इसे कोर्ट में ले जाने की जरुरत नहीं होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर श्रीरामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने भी स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुलह-समझौते से समाधान निकालने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण पर मुसलमानों के साथ समझौता होने वाला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझौते को लेकर बैठक हो गई है। इसका मजमून भी तैयार है, अब केवल मुहर लगनी बाकी है।
Farooq Abdullah: This(Ayodhya) issue should be discussed and sorted out across the table between people. Why to drag the issue to the Court? I am sure it can be resolved through dialogue. Lord Ram belongs to the whole world, not just Hindus. pic.twitter.com/XDOCXNCDER
— ANI (@ANI) January 4, 2019विज्ञापन
फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि भगवान राम सिर्फ हिंदुओं के नहीं हैं, वह पूरी दुनिया के भगवान हैं। भगवान राम से किसी को बैर नहीं है और होना भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले को सुलझाने की और मंदिर बनवाने की कोशिश करनी चाहिए। जिस दिन ऐसा हुआ, वह भी एक पत्थर लगाने जाएंगे।
केवल कुर्सी के लिए भाजपा उठाती है राम मंदिर का मुद्दा
फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के लिए मंदिर निर्माण का मुद्दा केवल सत्ता के लिए है। उन्होंने कहा कि मंदिर बनाने से बीजेपी का कोई सरोकार नहीं है। ये लोग सिर्फ कुर्सी पर बैठने के लिए मंदिर की बात उठाते हैं।उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पिछले पौने पांच साल में कुछ भी नहीं किया।
डॉ. वेदांती ने कहा- हिंदू-मुस्लिमों में बन चुकी है सहमति
डॉ वेदांती ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद बनाने पर किसी भी धर्माचार्य को एतराज नहीं है। उम्मीद है कि चुनाव से पूर्व ही राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। वे खुद भी राममंदिर मामले के समाधान में लगे हैं।मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड जहां से संचालित हो रहा है वहां से वार्ता चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में राममंदिर के लिए कुछ भी स्वीकार नहीं होगा।