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कृषि कानूनों पर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए किसानों ने किया कूच, पैदल-ट्रेन और ट्रैक्टरों से निकले हजारों जत्थे

Wed, 25 Nov 2020 05:41 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 25 Nov 2020 05:41 PM IST
सार

  • संयुक्त किसान मोर्चा बैनर के तले चलेगा किसान आंदोलन, संगठन में पूरे देश के 600 किसान संगठनों के शामिल होने का दावा
  • अब तक 100 किसान नेता हो चुके गिरफ्तार, किसान नेताओं का दावा- गिरफ्तारी के बाद भी जारी रहेगा अहिंसक आंदोलन, गुरुवार को 11 बजे जंतर-मंतर पर विशाल प्रदर्शन करने की तैयारी

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farmers will protest against the central government in delhi against new agriculture laws
कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन करते किसान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

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केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में जंतर-मंतर पर आंदोलन करने के लिए पूरेे देश से किसानों ने दिल्ली के लिए कूच कर दिया है। हजारों के जत्थे में किसान अलग-अलग रास्तों से पैदल, ट्रेन और निजी वाहनों के जरिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। हरियाणा सहित पूरे देश से अब तक सौ से ज्यादा किसान नेता गिरफ्तार किए जा चुके हैं। किसानों ने घोषणा की है कि अगर उनका आंदोलन कहीं भी रोका जाता है तो वे वहीं धरना-प्रदर्शन करेंगे और सोशल मीडिया के जरिए देश को अपनी बात बताएंगे। किसानों का दावा है कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले होने वाले इस आंदोलन में 600 से ज्यादा किसान संगठन और पांच लाख से ज्यादा किसान भाग लेंगे।

पांच जगहों से दिल्ली में प्रवेश करेंगे किसान

दिल्ली में प्रवेश करने के पहले किसान पांच जगहों पर इकट्ठे होंगे। इनमें एनएच-1 पर कोंडली, रोहतक के सांपला, जयपुर-दिल्ली हाईवे पर बिलासपुर, फरीदाबाद के सेक्टर-12 और उत्तर प्रदेश के हापुड़ में किसान इकट्ठे होंगे। अगर सरकार इन जगहों पर कोई बैरीकेडिंग करती है और किसानों को आगे बढ़ने से रोका जाता है तो किसान वहीं जमीन पर बैठकर धरना देंगे। किसानों का दावा है कि आंदोलन पूर्णतया अहिंसक होगा।

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केवल 100 लोगों को आंदोलन की अनुमति

ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हन्नन मौला ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर 100 लोगों के आंदोलन की अनुमति दी है। लगभग एक महीने पहले रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर आंदोलन के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक अनुमति नहीं दी गई। सोमवार को पुलिस अधिकारी जसवंत सिंह ने उन्हें 100 लोगों के आंदोलन करने की अनुमति दी।

पुलिस ने कहा- अनुमति नहीं

वहीं, दिल्ली पुलिस ने एक ट्वीट कर कहा है कि जंतर-मंतर पर किसी तरह के आंदोलन की अनुमति नहीं है। ट्वीट में कहा गया है कि किसान संगठनों के द्वारा आंदोलन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन किसी संगठन को किसी तरह के आंदोलन की कोई अनुमति नहीं दी गई है। इसके बारे में किसान संगठनों को सूचित कर दिया गया है।

सोशल मीडिया की लेेंगे पूरी मदद

किसान नेताओं ने इस आंदोलन के लिए सोशल मीडिया की ताकत का पूरा इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई है। किसानों की रणनीति है कि अगर सरकार उन्हें कहीं भी रोकने की कोशिश करती है तो वे जहां होंगे, वहीं से सोशल मीडिया के जरिए लोगों के संपर्क में रहेगी। सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन जारी रखा जाएगा।

वापस लेना होगा कानून

राष्ट्रीय किसान महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा 'कक्का जी' ने कहा कि देश तानाशाही के दौर से गुजर रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने छः साल के कार्यकाल में 18 किसान विरोधी कानून और 32 मजदूर विरोधी कानून पास किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस लेना पड़ेगा। सरकार को उसकी सीमाओं का अहसास कराने के लिए और किसानों के हितों की मांग करने के लिए किसान पीछे नहीं हटेगा, चाहे इसके लिए जितना भी समय लगे।

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शनपाल सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार के साथ-साथ हरियाणा सरकार ने भी किसानों को दबाने की कोशिश करना शुरू कर दिया है। बुधवार को हरियाणा सरकार ने अंबाला में किसानों पर पानी का बौछार की और हाईवे पर बड़े-बड़े पत्थर लगाकर आवागमन रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर देश हमारा है, सरकार हमारी है तो उसे हमारी बात सुनने की कोशिश क्यों नहीं करनी चाहिए, और हमारा रास्ता क्यों रोकना चाहिए।

दर्शनपाल सिंह ने कहा कि सरकार ने तीन दिसंबर को हमें बात करने के लिए बुलाया है। इस तरह दो दिसंबर तक हमें धरना-प्रदर्शन करने के लिए सरकार ने ही मजबूर कर दिया है, इसलिए हर आंदोलन विरोधी कोशिश के बावजूद हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

पंजाब से निकले किसान

पंजाब से लगभग एक हजार ट्रैक्टरों के जरिए किसानों का एक जत्था बुधवार को ही दिल्ली के लिए निकल चुका है। इसी प्रकार के कई अन्य जत्थे और चलने वाले हैं। किसान नेताओं का दावा है कि पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आंदोलन के लिए जंतर-मंतर पर पांच लाख से अधिक किसान पहुंच सकते हैं।

महाराष्ट्र-गुजरात के आदिवासी इलाकों में संघर्षशील लोक संघर्ष मोर्चा की नेता प्रतिभा शिंदे ने कहा कि यह आंदोलन पूरे देश के किसानों का है। महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और कर्नाटक से किसान आंदोलन में शामिल होने पहुंच रहे हैं।

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