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Farmers Issue: फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएंगे किसान, यात्रा-प्रदर्शन भी विकल्प

Mon, 20 Mar 2023 09:10 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 20 Mar 2023 09:10 PM IST
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Farmers will adopt path of negotiation for minimum support price of crops travel-demonstration is an option
रामलीला मैदान में किसान महापंचायत - फोटो : अमर उजाला

किसानों ने सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए केंद्र सरकार से बातचीत और धरना-प्रदर्शन, दोनों रास्तों को एक साथ अपनाने का निर्णय किया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बैठक कर यह निर्णय लिया है कि मोर्चे का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्र से बातचीत कर मामले का हल निकालने की कोशिश करेगा। वहीं, मांगें माने जाने तक सभी राज्यों में यात्राएं निकालकर लोगों को इस मुद्दे के प्रति जागरूक किया जाएगा। 

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दिल्ली में एक तरफ रामलीला मैदान में हजारों किसानों का जमावड़ा हो रहा था, तो वहीं दूसरी ओर संयुक्त किसान मोर्चा के 15 किसान नेता कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से बातचीत कर रहे थे। किसान नेताओं का दावा है कि उन्होंने सरकार को इस बात की जानकारी दे दी है कि समय रहते उसे सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लिया गया फैसला लागू करना होगा। साथ ही यह भी बता दिया गया है कि इस दौरान सरकार को अपने वादे की याद दिलाने के लिए जगह-जगह यात्राएं और प्रदर्शन के कार्यक्रम चलते रहेंगे। 
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बाद में बनेगी रणनीति
रामलीला मैदान में सोमवार को विभिन्न किसान संगठनों के हजारों किसान जुटे। मंच से केंद्र सरकार पर देश के कुछ निजी सेक्टर की बड़ी कंपनियों के हितों में सभी फैसले लेने का आरोप लगाया। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि की लागत लगातार बढ़ती जा रही है जबकि आज भी कभी आलू तो कभी प्याज, कभी गेहूं तो कभी धान की फसलों के किसानों को तरह-तरह का नुकसान झेलना पड़ता है, लेकिन अब तक उनके बचाव का कोई रास्ता नहीं तैयार किया गया। यही कारण है कि किसान अब अपनी बात पूरी हुए बिना हटना नहीं चाहते हैं। अभी पिछली बार की तरह दिल्ली की सीमाओं को घेरने जैसी कोई रणनीति नहीं बनाई गई है, लेकिन रामलीला मैदान के एक दिन के प्रदर्शन के बाद इसी तरह के अन्य कार्यक्रमों की रणनीति बनाई जाएगी।    
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सरकार का विरोध नहीं
किसानों ने अपनी मांगें पूरी किए जाने की बात अवश्य कही, लेकिन इसके साथ ही वे यह भी बताना नहीं भूले कि उनकी लड़ाई किसी सरकार के खिलाफ नहीं है। वे केवल अपनी मांगें मनवाना चाहते हैं क्योंकि इसके बिना उनका जीवन लगातार मुश्किल होता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा अपने आंदोलन के 1.0 दौर में भी इसी तरह के रुख पर कायम रहा था।

केंद्र से वार्ता में कौन हुआ शामिल
रामलीला मैदान में प्रदर्शन के पूर्व 15 नेताओं का शिष्टमंडल सरकार से मिला और अपनी मांगें रखीं। इसमें संयुक्त किसान मोर्चे के कई प्रमुख नेता शामिल रहे। इनमें आर. वेंकैया (अखिल भारतीय किसान सभा), डॉ. सुनीलम (किसान संघर्ष समिति), प्रेम सिंह गहलावत (अखिल भारतीय किसान महासभा), वी वेंकटरमैया (अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा), सुरेश कोठ (भारतीय किसान मजदूर यूनियन), युद्धवीर सिंह (भारतीय किसान यूनियन), हन्नान मोल्लाह (अखिल भारतीय किसान सभा), बूटा सिंह बुर्जगिल (भारतीय किसान यूनियन (दकुंडा), जोगिंदर सिंह उगराहां (भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां), सत्यवान (अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन(, अविक साहा (जय किसान आंदोलन), दर्शन पाल (क्रांतिकारी किसान यूनियन) मंजीत राय (भारतीय  किसान यूनियन (दोआबा), हरिंदर लाखोवाल (भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) और सतनाम सिंह बहरू (इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन) शामिल थे। 

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