किसान आंदोलन: पहले दिन ऐसा रहा असर, सड़कों पर फेंकी सब्जियां, बहाया हजारों लीटर दूध
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स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने और कर्ज माफी की मांग को लेकर किसानों का 10 दिवसीय आंदोलन शुक्रवार को शुरू हो गया। जिससे देशभर के कई राज्यों में दस दिन तक दूध, सब्जी और फल की सप्लाई प्रभावित रहेगी। वहीं मंदसौर, नीमच, रतलाम सहित कई जिले हाई अलर्ट पर हैं तो कई जगह धारा 144 लागू कर दी गई है।
वजह है पिछले साल किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर में हुए गोलीकांड की बरसी जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। राज्य सरकार किसी भी हाल में यह नहीं चाहेगी एक बार फिर एसी स्थिति का सामना करना पड़े। लिहाजा कमर कस ली गई है लेकिन किसानों में आक्रोश है और वह राज्यभर में प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं।
आइए जानते हैं अबतक किस राज्य में आंदोलन का क्या हाल है:-
मध्यप्रदेश में मिला-जुला असर
मंदसौर में हड़ताल का जिलेभर में आंशिक असर है। कई जगह सब्जी मंडी में सब्जियों की नीलामी चालू है। वहीं कई इलाकों में सब्जी मंडी आम दिनों की तरह ही खुली हुई है। हालांकि पुलिस हाईवे सहित शहरभर में पेट्रोलिंग कर रही है। और किसी भी घटना की आंशका के तहत चेक प्वाइंट बनाकर जांच की जा रही है।
वहीं इंदौर में भी आंदोलन का असर यहां पर भी बेहद मामूल नजर आया। चोइथराम सब्जी मंडी और राजकुमार मिल सब्जी मंडी में खरीददारी आम दिनों की तरह ही देखने को मिली। बात करे उज्जैन की तो यहां भी आंदोलन का असर बे-असर नजर आया। हालांकि लोगों ने यह एक दिन पहले ही भारी मात्रा में सब्जी खरीद ली थी।
पंजाब में हंगामा
अबोहर में आधी रात को ही सब्जियों से लदे वाहन मंडी पहुंच गए। हड़ताल के पहले दिन मंडी में खूब सब्जियां बिकीं, किसान चौराहों पर खड़े रहे।
लुधियाना में रोजाना की अपेक्षा चालीस फीसदी सब्जी मंडी में पहुंचने से दाम बढ़े। हड़ताल से सब्जियों की कीमतों में उछाल आ गया। दूसरी तरफ फतेहगढ़ साहिब में नवजोत सिंह सिद्धू दूध/सब्जी खरीदने पहुंचे।
सिद्धू ने किसानों से शिमला मिर्च, भिंडी, करेले, लहसुन खरीदे। हालांकि मुक्तसर में किसान आंदोलन फीका रहा। न तो दूध की सप्लाई प्रभावित हुई न सब्जियों की, मगर दामों में कुछ उछाल आ गया। किसानों ने दोधियों को रोक वापस भेज दिया।
गुरुग्राम में भी नहीं दिखा असर
हड़ताल का हरियाणा के गुरुग्राम में भी कोई असर देखने को नहीं मिला। आम दिनों की तरह वह दूध, फल व सब्जियां बेचने के यहां पहुंचे। हालांकि देशभर के किसानों की हड़ताल को प्रदेश के किसानों ने भी समर्थन दिया है। इस पर प्रदेश सरकार भी नजर बनाए हुए है।
हालांकि किसान संगठनों ने यह भी फैसला लिया है कि यदि किसी भी व्यक्ति को हड़ताल के दौरान दूध, फल, सब्जियां आदि कोई चीज चाहिए तो वह किसानों के रेट के अनुसार इसे खरीद सकता है। इस छूट में इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि कोई भी व्यक्ति इसका व्यापारीकरण न कर सके।
किसानों के निर्णय को देखते हुए प्रदेश में कुछ स्थानों पर दूध, फल-सब्जी की किल्लत होने से दाम बढ़ सकते हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह का कहना है कि देश के करीब 172 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हुए हैं।
किसान आंदोलन के तहत किसान अपने उत्पादन अनाज, सब्जी, दूध, चारा शहर में बेचने के लिए नहीं जाएंगे। किसान अपनी सब्जी, दूध, चारे को गांव में बेच सकते हैं और शहर के लोग गांव में जाकर जरूरत के लिए सामान खरीद सकते हैं लेकिन किसान अपने उत्पादन के दाम अपने हिसाब से तय करेगा।
राजस्थान में किसानों ने दूध बहाया
राजस्थान में भी किसानों ने मंडियों में सब्जियों की व घरों में दूध की आपूर्ति रोक दी और सड़क किनारे कई जगह दूध भी बहा दिया। यहां के किसान भी कर्जमाफी और फसलों का सही दाम दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन पर चले गए हैं। जयपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित लगभग हर जिले में किसानों ने दूध और सब्जी को सड़क पर फेंक कर प्रदर्शन किया।