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किसान आंदोलन: सरकार को दी विश्वासघात न करने की चेतावनी, बुधवार को इस 'सौगंध' के साथ लौट सकते हैं घर!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 07 Dec 2021 07:27 PM IST
सार

हरियाणा के युवाओं पर पुलिस केस ज्यादा हैं, इसलिए पंजाब के किसान संगठनों ने कहा, चिंता न करें। अगर सरकार, अपनी किसी भी मांग से पीछे हटती है तो वे दोबारा से 'दिल्ली' पहुंच जाएंगे। बुधवार को एसकेएम ने टोल प्लाजा पर बैठे किसानों को बुलाया है। उनसे बातचीत के बाद किसान आंदोलन का मोर्चा उठाने की घोषणा कर दी जाएगी...

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Farmers protest: samyukt kisan morcha would meet again on Wednesday, A final announcement will be made after that
किसान आंदोलन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दिल्ली की सीमाओं से किसान आंदोलन का मोर्चा उठाने को लेकर मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चे 'एसकेएम' की मैराथन बैठक हुई। कहा जा रहा था कि सब कुछ फाइनल हो गया है, अब आंदोलन खत्म करने की औपचारिक घोषणा बाकी है। शाम को मोर्चे की तरफ से कहा गया कि बुधवार दोपहर को एसकेएम की दोबारा से बैठक होगी। उसके बाद निर्णायक घोषणा की जाएगी। मंगलवार को हुई एसकेएम की बैठक में मौजूद एक बड़े किसान नेता ने बताया, बुधवार को सभी लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। केंद्र सरकार ने पांच मांगों पर जो सहमति पत्र भेजा है, उस पर जमकर चर्चा हुई है। एसकेएम ने केंद्र सरकार को यह चेतावनी दे दी है कि अगर उनकी मांगों को लेकर 'विश्वासघात' हुआ तो वे दोबारा से एक घंटे में दिल्ली की सीमा पर वापस आ जाएंगे।

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भावुक हो उठे किसान नेता

बैठक में किसान नेता उस वक्त भावुक हो उठे, जब पुलिस केस में फंसे किसानों की बात हो रही थी। चूंकि हरियाणा के युवाओं पर पुलिस केस ज्यादा हैं, इसलिए पंजाब के किसान संगठनों ने कहा, चिंता न करें। अगर सरकार, अपनी किसी भी मांग से पीछे हटती है तो वे दोबारा से 'दिल्ली' पहुंच जाएंगे। बुधवार को एसकेएम ने टोल प्लाजा पर बैठे किसानों को बुलाया है। उनसे बातचीत के बाद किसान आंदोलन का मोर्चा उठाने की घोषणा कर दी जाएगी।

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ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान का कहना है, एसकेएम की मैराथन बैठक में सभी मांगों पर खुलकर चर्चा हुई है। पांच सदस्यीय कमेटी के सभी सदस्यों ने अपनी राय रखी। क्या सरकार भविष्य में मुकर सकती है, इस बात पर खासतौर से गौर किया गया। बैठक में सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों की रही, जिनके खिलाफ पुलिस केस हैं। चूंकि इनमें हरियाणा के युवा अधिक हैं। पंजाब और यूपी के किसान भी हैं। पंजाब सरकार, केस वापस लेने और मारे गए किसानों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए तैयार है। हरियाणा सरकार के साथ बातचीत चल रही है। उत्तर प्रदेश सरकार भी राजी हो गई है। केंद्र सरकार के प्रस्ताव में यह भी बात सामने आई है कि वह राज्य सरकारों से केस वापसी का आग्रह करेगी।  

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शहीद किसानों का स्मारक बनाने की मांग

किसानों को एमएसपी की लड़ाई अभी लड़नी पड़ेगी। सरकार की तरफ से जो आश्वासन मिल रहा है, वह ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं है। इस मामले में किसानों को सचेत रहना होगा। किसान नेता सत्यवान के मुताबिक, सरकार ने जो कमेटी बनाई है, उसमें ऐसे प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं, जिन्हें खेती किसानी की जानकारी ही न हो। वे सरकार के पक्षकार हो सकते हैं। जो लोग अब तक किसान आंदोलन को नहीं समझ पाए, अगर वही कल को एमएसपी की बैठक में आते हैं तो बात नहीं बनेगी। ऐसी संभावनाओं पर एसकेएम विचार कर रहा है। शहीद किसानों के स्मारक को लेकर केंद्र की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला। किसान संगठनों का कहना था कि अगर केंद्र, उत्तर प्रदेश व हरियाणा सरकार से कहे तो स्मारक के लिए जमीन मिल सकती है।

पराली को लेकर खत्म होंगी सख्त धाराएं

जो किसान मारे गए हैं, उनके परिजनों को मुआवजा मिलेगा, इस पर भी सहमति बन गई है। बिजली बिलों को लेकर केंद्र सरकार बैठक बुलाएगी। इसमें एसकेएम के अलावा विभिन्न हितधारक भी शामिल होंगे। पराली को लेकर सरकार ने सख्त धाराओं को खत्म करने की बात कही है। पांच मांगों में से अभी चिंता की बात केवल पुलिस केस की वापसी है। इसके लिए एसकेएम को सक्रियता दिखानी होगी। हालांकि बैठक में मौजूद सभी किसान संगठन इस पर सहमत थे कि वे आखिरी केस वापस होने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। किसी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। सत्यवान ने कहा, किसान आंदोलन का बुधवार को मोर्चा उठेगा, लेकिन बिना किसी शर्त के।

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