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किसानों के चक्काजाम से बढ़ेगी लोगों की परेशानियां: छह फरवरी से हर हफ्ते होगा सड़कों पर प्रदर्शन

Tue, 02 Feb 2021 03:23 PM IST
स्नेहा बलूनी राहुल संपाल, नई दिल्ली
राहुल संपाल, नई दिल्ली Published by: स्नेहा बलूनी Updated Tue, 02 Feb 2021 03:23 PM IST
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farmers protest new strategy may increase problems of people now every week from feb 6 there will be traffic jam on streets
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

दो महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए 6 फरवरी को देशभर में चक्का जाम का जो एलान किया है उससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। किसानों की नई रणनीति के तहत अब ये चक्का जाम सिर्फ 6 फरवरी को नहीं बल्कि हफ्ते में एक दिन नियमित रूप से होगा और किसान सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल शनिवार को दिन में 12 बजे से 3 बजे तक तमाम हाईवे और प्रमुख सड़कें जाम करने का एलान किया गया है। सरकार किसानों के इस एलान को देखते हुए जवाबी रणनीति बनाने में लग गई है।

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किसान संगठनों के धरना-प्रदर्शन से दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों के बार-बार रास्ते रोकने पर, हर बार पुलिस मुख्य मार्ग बंद कर देती है जिससे अन्य रास्तों पर लंबा जाम लग जाता है। वहीं प्रदर्शन के कारण मेट्रो सेवा भी बंद कर दी जाती है। इससे आम लोगों को सफर के दौरान परेशानी झेलनी पड़ती है। बढ़ते तनाव को देखते हुए कई बार इंटरनेट सुविधा भी बंद कर दी जाती है जिससे लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ती है।
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इससे पहले भी किसान संगठनों ने कृषि कानूनों का विरोध करते हुए महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को उपवास रखा था। वहीं 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकाली थी और उस दौरान अराजक और हिंसक स्थितियां पैदा होने से किसानों के आंदोलन पर लोगों ने सवाल भी उठाए थे।

किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला को बताया कि लॉकडाउन के दौरान जब देशभर में उत्पादन बंद पड़ा था, तब भारत के किसानों ने ही उत्पादन बढ़ाया और इस संकट से देश को उबारा था। लेकिन इसके बदले सरकार ने बजट में ये इनाम दिया कि मनरेगा का बजट  34 प्रतिशत कम कर दिया गया। वहीं कृषि बजट में आठ प्रतिशत की कमी कर दी गई। सरकार ने अन्नदाताओं को ये तोहफा दिया है।

उन्होंने कहा कि किसानों के पास आंदोलन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। जब तक सरकार हमारी बातें नहीं मान लेती तब तक हम लोग आंदोलन को जिंदा रखेंगे। हम लोगों ने तय किया है कि हर सप्ताह में एक कार्यक्रम सरकार के खिलाफ करेंगे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद सभी किसान नेता बैठक कर उस कार्यक्रम की समीक्षा करेंगे फिर नए कार्यक्रम की रूपरेखा तय करेंगे। हमारी कोशिश होगी ऐसे कार्यक्रम आयोजित हों जिसमें किसानों की भागीदारी ज्यादा से ज्यादा हो सके।


किसान नेताओं का कहना है कि हमने किसानों की समस्याओं को लेकर सांसदों से भी अपील की है कि हम इस मुद्दे को संसद में उठाएं। अधिकांश विपक्षी सांसदों ने हमें भरोसा दिया है कि हम संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता उठाएंगे। इस मसले को लेकर कुछ लोग सांसदों से भी मुलाकात कर रह रहे हैं।

नए कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच अब तक 11 बार से ज्यादा चर्चा हो चुकीं हैं। लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। सरकार ने तीनों कानूनों को एक से डेढ़ साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

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