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किसान संगठनों को सरकार का न्योता मंजूर, आज होगी अगली रणनीति की घोषणा

Tue, 29 Dec 2020 01:16 AM IST
Amit Mandal हरि वर्मा
हरि वर्मा Published by: Amit Mandal Updated Tue, 29 Dec 2020 01:16 AM IST
सार

  • सरकार ने 30 दिसंबर को 2 बजे बुलाया, किसानों ने उसी दिन केएमपी जाम का कर रखा है एलान
  • दोनों पक्षों को अगली रणनीति बनाने के लिए मिला एक दिन का मौका, मंगल अहम, बुध को श्रीगणेश
  • गृह मंत्री अमित शाह की पीयूष गोयल से मुलाकात, कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को उम्मीद- हल निकलेगा

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Farmers Protest: deadlock ends and  talk begins
गाजीपुुर बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते राकेश टिकैत (file photo) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच ‘डेडलॉक’ अब ‘डायलॉग’ की ओर बढ़ चला है। सरकार ने किसानों के पत्र का जवाब भेजकर उन्हें वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। किसानों ने सरकार से मिले वार्ता प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। हालांकि किसानों की तय तारीख को सरकार ने एक दिन आगे खिसका दिया है। 29 के बजाए अब 30 दिसंबर को वार्ता होगी। 29 दिसंबर दोनों पक्षों के लिए अहम है। संयुक्त किसान मोर्चा मंगलवार को अपनी अगली रणनीति का एलान करेगा। इससे पहले सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने पीयूष गोयल से मंत्रणा की। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने उम्मीद जताई कि बातचीत से हल निकलेगा। सरकार के पत्र पर पंजाब के किसान संगठनों की एक दौर की बैठक सोमवार को ही हो गई। अब मंगलवार को उन सभी 40 किसान संगठनों की आपसी रणनीतिक वार्ता होगी, जिन्हें सरकार का बुलावा है। मंगलवार को ही संयुक्त किसान मोर्चा अगली रणनीति का एलान करेगा।

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विरोध और वार्ता साथ-साथ नहीं का संदेश
सरकार ने वार्ता की तारीख एक दिन आगे खिसका दी है। पत्र में सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा के उन चारों एजेंडे पर बातचीत का जिक्र किया है। किसान संगठनों ने जब बातचीत के लिए 29 दिसंबर की तारीख तय की तो हाथोंहाथ 29 को वार्ता विफल होने की स्थिति में 30 दिसंबर को कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस वे जाम करने की घोषणा कर दी थी। सरकार ने अब 30 दिसंबर को 2 बजे वार्ता के लिए बुलावा भेजा है। ऐसे में अब सरकार के साथ-साथ सभी की नजर उस दिन की वार्ता के साथ-साथ आंदोलन पर रहेगी। संयुक्त किसान मोर्चा मंगलवार को अगली रणनीति का एलान करेगा। ऐसे में 30 दिसंबर को वार्ता के कारण आंदोलन के पूर्व घोषित कार्यक्रम में नरम रवैये की उम्मीद की जा सकती है। 
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30 दिसंबर को बातचीत 
भले वार्ता की तारीख 30 दिसंबर तय की गई है, लेकिन इस पत्र के मिलते ही किसान संगठनों ने साफ कर दिया कि वे सरकार के बुलावे पर बातचीत के लिए हर हाल में जाएंगे। सरकार के पत्र पर वार्ता के लिए बुलाए गए सभी 40 किसान संगठनों की बैठक 29 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले होगी। कई किसान नेताओं ने बैठक में शामिल होने को लेकर तर्क दिया कि सरकार दुष्प्रचार कर रही है, इसलिए वार्ता के लिए जाएंगे। इन किसान नेताओं का आरोप है कि उनके एजेंडे पर सरकार ने कुछ ठोस प्रस्ताव नहीं दिया है। हालांकि कृषि सचिव संजय अग्रवाल की ओर से पत्र में ठोस लिखा गया है कि तीनों कृषि कानूनों, न्यूनतम समर्थन मूल्य, पराली और बिजली 2020 से जुड़े मुद्दों पर खुले मन से चर्चा होगी। कई संगठन अब भी तीनों कानूनों की वापसी और न्यूनत्तम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी को लेकर अड़े हैं, जबकि कई संगठन बातचीत में लचीला रुख की ओर इशारा कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें मंगलवार की रणनीतिक तैयारी और बुधवार को होने वाली वार्ता पर टिकी है।
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