Farmers Protest: बढ़ सकती है केंद्र की परेशानी, इस मुद्दों पर महाराष्ट्र के किसान भी पहुंच रहे दिल्ली
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पंजाब-हरियाणा के किसान आंदोलन के समर्थन में महाराष्ट्र के भी किसान आ गए हैं। प्याज उत्पादक किसान संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। यह संगठन करीब छह माह से केंद्र सरकार के फैसले से नाराज चल रहा है। महाराष्ट्र कांदा उत्पादक संगठन के अध्यक्ष भारत दिघोले का कहना है कि पंजाब और हरियाणा में हो रहे किसान आंदोलन में को उनका पूरा समर्थन है। जल्द ही महाराष्ट्र के किसान भी इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे।
भारत दिघोले का कहना है कि महाराष्ट्र में प्याज, सोयाबीन, अंगूर और कपास जैसे कई कृषि उत्पाद की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। क्योंकि उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहा है। प्याज की खेती करने वाले किसान घाटे में काम कर रहे हैं। किसान एक से आठ रुपये किलो के औसत दाम पर प्याज बेचने को मजबूर हैं, जो लागत से भी कम है। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार प्याज को भी एमएसपी के दायरे में ले आए।
दिघोले कहते हैं कि अब किसान पहले जैसे हालात नहीं बर्दाश्त करेंगे। अब वह अपनी फसल का दाम मांग रहे हैं। इसलिए देश भर के अलग-अलग राज्यों के किसान दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें महाराष्ट्र के किसान भी पीछे नहीं रहेंगे। वह बढ़ चढ़कर जल्दी ही दिल्ली में होने वाले आंदोलन में शामिल होंगे।
दिघोले का कहना है कि किसान सरकार से कोई कर्ज नहीं मांग रहे, बल्कि अपना हक मांग रहे हैं। अपनी मेहनत से उपजाई गई फसल का उचित दाम मांग रहे हैं। अगर किसानों को उनका हक नहीं मिलेगा, तो वह सड़क पर उतरेंगे और उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। प्याज की सही कीमत की मांग को लेकर महाराष्ट्र में बड़ा किसान आंदोलन हो चुका है। किसान पैदल मार्च कर चुके हैं, लेकिन सरकार बात करती है और मुकर जाती है। अब किसान चाहते हैं कि जो रोजमर्रा के खाने की चीजें हैं, उसकी खेती करने वालों को सही दाम मिले। इसलिए सभी फसलों को एमएसपी के दायरे में लाया जाए।
उनका कहना है कि अगर सरकार प्याज को एमएसपी के दायरे में नहीं ला रही है, तो भी उसका न्यूनतम दाम फिक्स कर दिया जाए, जिससे किसानों को उससे कम दाम पर नहीं बेचना पड़े। आज किसान आंदोलन का रास्ता इसलिए चुन रहे हैं क्योंकि सरकार सुन नहीं रही है। इसलिए दिल्ली में होने वाले किसान आंदोलन में महाराष्ट्र के किसानों की पूरी भागीदारी होगी। क्योंकि महाराष्ट्र के किसानों को सरकार खुद अपने फैसलों से तंग कर रही है।