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एक व्हाट्सएप ग्रुप, जहां सुलझ रहीं किसानों की बड़ी-बड़ी समस्याएं
शालिनी बाजपेयी/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 28 Apr 2016 06:17 AM IST
सार
- ग्रुप में 21 वैज्ञानिकों के अलावा तकनीकी विशेषज्ञ शामिल
- ग्रुप के लोग देते हैं खेती की समस्याओं का समाधान
- किसानों को टेक्नोसेवी बनाना चाहते हैं अवधेश कुमार
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विस्तार
एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट नैनी से एमएससी कर रहे अवधेश कुमार ने ‘एग्री ज्ञान’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है जो किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। ग्रुप से कृषि वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ मेरठ, लखनऊ, बरेली मंडल के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश के किसान भी जुड़े हैं।
ग्रुप से जुड़े सभी लोग खेती-किसानी पर चर्चा के साथ फसलों से संबंधित समस्याओं का समाधान करते हैं। किसानों के मुताबिक ‘एग्री ज्ञान’ उनके लिए ‘अलादीन का चिराग’ साबित हुआ है। ग्रुप से जुड़े किसानों को घर बैठे जहां एक प्लेटफार्म पर उनकी समस्याओं का समाधान मिल रहा है वहीं खेती के बदलते तौर-तरीकों पर मार्गदर्शन भी।
ग्रुप में आईवीआरआई के दस कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र के चार, एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट नैनी, बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम मथुरा, बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के 21 वैज्ञानिकों के अलावा कई तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। अगर किसी समस्या का हल अवधेश कुमार नहीं दे पाते तो कृषि वैज्ञानिक उसका निदान कर देते हैं।
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ग्रुप से जुड़े सभी लोग खेती-किसानी पर चर्चा के साथ फसलों से संबंधित समस्याओं का समाधान करते हैं। किसानों के मुताबिक ‘एग्री ज्ञान’ उनके लिए ‘अलादीन का चिराग’ साबित हुआ है। ग्रुप से जुड़े किसानों को घर बैठे जहां एक प्लेटफार्म पर उनकी समस्याओं का समाधान मिल रहा है वहीं खेती के बदलते तौर-तरीकों पर मार्गदर्शन भी।
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ग्रुप में आईवीआरआई के दस कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र के चार, एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट नैनी, बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम मथुरा, बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के 21 वैज्ञानिकों के अलावा कई तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। अगर किसी समस्या का हल अवधेश कुमार नहीं दे पाते तो कृषि वैज्ञानिक उसका निदान कर देते हैं।
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पिता के साथ खेती करते हैं अवधेश
किसान
- फोटो : amar ujala
भोजीपुरा के रहने वाले एक किसान ने गन्ने की फसल की फोटो व्हाट्सएप पर डाली और गन्ने में कीड़े लगने व पत्तियां खराब होने की समस्या का निदान पूछा। शेरगढ़ के गांव सालार नगला के रहने वाले युवा किसान अवधेश कुमार गंगवार ने तुरंत इस समस्या का हल बताया। गोला गोकर्ण नाथ के शैलेंद्र कुमार वर्मा के गन्ने की फसल में सूड़ी का प्रकोप था और पत्तियां सफेद होकर सड़ने लगी थी।
उन्होंने इसका वीडियो बनाकर व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा। अवधेश ने वीडियो देखने के बाद उस पर छिड़काव करने के लिए बताया, जिस पर अमल के बाद बीमारी रुक गई। मीरशोगंज के नंद किर के गेहूं की फसल में फफूंदी लगी थी। उन्होंने रोग वाले पौधों की फोटो ग्रुप पर डाली और उनकी समस्या का समाधान मिल गया।
हैदराबाद से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे अवधेश कुमार को इस व्हाट्सएप ग्रुप को बनाने का आइडिया आया। अवधेश के पास लगभग 70 बीघा जमीन जिस पर वह अपने पिता छेदा लाल के साथ खेती करते हैं। अवधेश के पिता छेदा लाल गंगवार की सेमीखेड़ा में एग्री क्लीनिक भी है। अवधेश ने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएससी किया है।
उन्होंने इसका वीडियो बनाकर व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा। अवधेश ने वीडियो देखने के बाद उस पर छिड़काव करने के लिए बताया, जिस पर अमल के बाद बीमारी रुक गई। मीरशोगंज के नंद किर के गेहूं की फसल में फफूंदी लगी थी। उन्होंने रोग वाले पौधों की फोटो ग्रुप पर डाली और उनकी समस्या का समाधान मिल गया।
हैदराबाद से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे अवधेश कुमार को इस व्हाट्सएप ग्रुप को बनाने का आइडिया आया। अवधेश के पास लगभग 70 बीघा जमीन जिस पर वह अपने पिता छेदा लाल के साथ खेती करते हैं। अवधेश के पिता छेदा लाल गंगवार की सेमीखेड़ा में एग्री क्लीनिक भी है। अवधेश ने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएससी किया है।