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किसानों - मजदूरों की कैसे मने दीपावली ?

Tue, 01 Nov 2016 04:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ झांसी
अमर उजाला ब्यूरो/ झांसी Updated Tue, 01 Nov 2016 04:33 AM IST
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Farmers and workers of bundelkhand are not in position of celebrating deepawali
- फोटो : बीबीसी
देश के तमाम लोग दीपावली धूम - धाम से मना रहें होंगे। लेकिन बुंदेलखंड में मजदूर व किसान के यहां इस वर्ष दीपावली कैसे मनाई जाएगी यह सवाल बड़ा जटिल है। या तो किसान दीपावली मनाएंगे नहीं अगर मनाएंगे तो कर्जा लेकर मनाएंगे। क्योंकि यहां के अधिकतर किसान व मजदूर मनरेगा के भरोसे रहते है । लेकिन इस वित्त वर्ष मनरेगा के तहत किए गए कार्य की मजदूरी नहीं मिली है।
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बुंदेलखंड के किसान और मजदूर मनरेगा के भरोसा रहते यह हम नहीं कह रहे है। यह केंद्र सरकार का वह हलफनामा कह रहा है। जिसमें उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से बुंदेलखंड में सूखे के हालत से निपटने के लिए प्रश्न पूछा था। इस पर केंद्र सरकार ने हलफनामा भरकर कहा था कि मनरेगा ( महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ) से निपट सकते है। लेकिन केंद्र सरकार भले इसे बुंदेलखंड में सूखे से निपटने के लिए बड़ी योजना बता रही हो। लेकिन जमीन पर हालात इसके विपरीत है। क्योंकि वित्त वर्ष 2016- 17 में जनपद की अधिकतर मजदूरों के मनरेगा के तहत पांच से लेकर 15 हजार तक रुपए पेंडिंग है। 
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इसके अलावा पिछले कई वर्षों से मौसम की मार झेल रहे किसानों की सुध ऊपर वाले ने ली और फसल भी अच्छी हुई। लेकिन इस वर्ष फसल के दामों में काफी गिरावट हो जाने के कारण उनको होने वाला फायदा भी कम हो गया है। इसके अलावा किसानों पर साहूकारों व बैंकों का काफी कर्ज भी है। इन सभी कारणों से इस वर्ष किसान अपनी दीपावली कैसे मनाए यह एक बड़ा सवाल उनके सामने है ।
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मजदूरी मिली नहीं रही ऊपर से कर्ज
मनरेगा के तहत पांच हजार रुपए का काम किया। लेकिन अभी तक कोई रुपया नहीं मिला है। इसक अलावा अब मनरेगा के तहत हमें काम भी नहीं मिल रहा है। इसके अलावा नातिन को डेंगू की बीमारी हो जाने के कारण उसके इलाज के लिए साहूकार से तीस हजार का कर्जा चार प्रतिशत की ब्याज दर से लिए है। अब इन सभी के कारण इस वर्ष दीपावली के लिए रुपए कहां से आए यह समझ नहीं आ रहा है। - भगोले ग्राम मगरपुर

फसल की बुवाई और दीपावली दोनो बड़े प्रश्न
बुंदेलखंड के गांव अड़जार के रहने वाले राजकुमार रायकवार ने बताया, 'खेती करने के बाद गांव में ही मनरेगा के तहत मजदूरी कर लेते थे। लेकिन मनरेगा से दस हजार रुपया न आने के कारण रबी फसल की बुवाई करना कठिन है। इसके अलावा खरीफ की फसल में उर्द की पैदावार अच्छी हुई थी। लेकिन उर्द के दाम में काफी गिरावट होने के कारण अभी बेची नहीं जा सकती है। ऐसे में दीपावली का त्यौहार मनाना भी काफी कठिन है।'


जल्द हो सकता है भुगतान
वहां मनरेगा उपायुक्त, राजकुमार लोधी ने बताया, 'लखनऊ में सभी अधिकारियों के संज्ञान में मनरेगा के भुगतान की बात डाल दी गई है। वहां से आश्वासन दिया गया है की। जल्द ही मनरेग के तहत कार्य करने वाले मजदूरों का भुगतान हो जाएगा। 
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