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कृषि कानून : डॉक्टर, सेवानिवृत्त सैनिक और पूर्व कांस्टेबल ने दी आंदोलन को धार, जानिए कौन हैं ये

Sat, 20 Nov 2021 06:17 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 20 Nov 2021 06:17 AM IST
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Farm or Agricultural Laws Repeal : Doctor, retired soldier and former constable gave edge to the movement, know who they are
किसान आंदोलन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ खड़े हुए इस देशव्यापी आंदोलन को धार देने  में एक डॉक्टर, पूर्व सैनिक व दिल्ली पुलिस के पूर्व कांस्टेबल की भागीदारी रही। आइए जानिए कौन हैं ये..

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Farm or Agricultural Laws Repeal : Doctor, retired soldier and former constable gave edge to the movement, know who they are
राकेश टिकैत - फोटो : amar ujala

राकेश टिकैत, दिल्ली पुलिस के पूर्व कांस्टेबल : भावुक अपील का असर
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत जो दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल रह चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलकर देशभर में किसानों के हित की लड़ाई लड़ने वाले टिकैत को किसान आंदोलन में खूब सुर्खियां मिलीं। लालकिले पर हिंसा के बाद वापसी करने लगे किसानों के बीच गाजीपुर बॉर्डर से टिकैत की भावुक अपील ने आंदोलन में नए प्राण फूंके थे।

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जोगिंदर सिंह उगराहां, सेवानिवृत्त सैनिक : रेल रोक कर दिखाया दम
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के अध्यक्ष और सुनाम के किसान परिवार से आने वाले जोगिंदर सिंह उगराहां पूर्व सैनिक हैं और इस आंदोलन के अग्रणी नेता। उन्होंने पंजाब में आंदोलन को हवा दी और प्रभावी ढंग से रेल रोको व भाजपा नेताओं का घेराव किया। जहां अधिकतर नेता सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे थे, जोगिंदर अकेले दम पर टीकरी बॉर्डर पर मोर्चा संभाले हुए थे।

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राकेश टिकैत (बाएं), नरेंद्र तोमर (बीच) और दर्शन पाल सिंह (दाएं) - फोटो : amar ujala

दर्शन पाल सिंह, एमबीबीएस, डॉक्टर : दलीलों में दिखी ताकत
ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के सदस्य दर्शन पाल सिंह पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं। 70 वर्षीय दर्शन पाल ने केंद्र सरकार व राज्य के नेताओं के साथ बातचीत में कृषि कानूनों के खिलाफ जमकर प्रभावी दलीलें दीं। किसान संगठनों को साथ लाने में भी उन्होंने महनीय भूमिका निभाई। दर्शनपाल ने हर वार्ता में समन्वयक के तौर पर किसानों का पक्ष रखा।

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गुरनाम सिंह चढूनी - फोटो : ANI (File)

गुरनाम सिंह चढूनी, संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य : बिन कपड़े पैदल अगुवाई
भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बिना कपड़ों के पैदल मार्च निकालने और हाईवे पर आलू फेंकने जैसे अनोखे अंदाज के चलते किसान आंदोलन को हवा दी। हरियाणा के करनाल में आंदोलन को बुलंद करने में इनकी अहम भूमिका रही। इनके आह्वान पर भाजपा के कार्यक्रम में किसानों ने पक्ष रखा और सीएम मनोहर लाल खट्टर का घेराव किया।

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