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Farm laws Repealed: जिस तरह लाए गए उसी तरह विदा हो गए तीनों कृषि कानून, अब तक वापस हुए 17 विधेयकों पर हो चुकी है चर्चा
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तीन कृषि कानून वापसी बिल लोकसभा से पास
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन था और पहले ही दिन ही तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर संसद ने मुहर लगा दी। विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच विवादस्पद कानून की वापसी का विधेयक संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो गया। विपक्ष कृषि कानूनों की वापसी वाले विधेयक पर चर्चा कराने पर अड़ा था। लेकिन सरकार इस पर राजी नहीं हुई और आनन-फानन में यह विधेयक दोनों सदनों से पारित करा लिया गया। अब यह विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा और इसी के साथ तीनों कानून समाप्त हो जाएंगे।राहुल गांधी का आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बिना चर्चा के सदन में विधेयक पारित हुआ। यह तीनों कानून किसानों के अधिकारों पर अतिक्रमण था। उन्होंने कहा कि ये किसानों की जीत है, लेकिन जिस तरह से बिना चर्चा के ये सब हुआ, वो दिखाता है कि सरकार चर्चा से डरती है। विपक्ष इस पर चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार बहस से डरती है।
चर्चा कराने पर बात हुई थी
सूत्रों ने बताया कि सत्र की शुरुआत से पहले जब बिजनेस एडवाजरी कमिटी की बैठक हुई थी तब विपक्षी दलों ने एकमत से सरकार से यह मांग की थी कृषि कानून वापसी वाले विधेयक पर चर्चा कराना जरूरी है। क्योंकि पीएम के कहने के बाद भी किसानों ने आंदोलन वापस नहीं लिया है और उनके कई मुद्दे जस के तस हैं। लिहाजा सरकार को इस पर चर्चा करानी चाहिए। विपक्ष इस पर चर्चा कराने को एकमत था, लेकिन सरकार ने किसी की नहीं सुनी। सरकार ने यह विधेयक जैसे पारित कराया था, उसी तरह वापस ले लिया।
नरेंद्र सिंह तोमर ने पेश किया बिल
- फोटो :
ANI
लोकसभा में चार मिनट में पारित हुआ यह विधेयक
लोकसभा में कृषि कानून निरसन विधेयक को चार मिनट के भीतर पारित कर दिया गया। इसे दोपहर 12:06 बजे पेश किया गया और विपक्ष की मांगों को अनसुना करते हुए 12:10 बजे पारित करा लिया गया। लोकसभा में विपक्षी नेताओं ने विधेयक पर चर्चा नहीं कराने पर आपत्ति जताई। राज्यसभा में इसे संक्षिप्त चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाए। विपक्ष ने दावा किया कि सरकार किसानों की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे से बचने के लिए चर्चा कराने से डरती रही, जो किसान आंदोलन के दौरान उनकी प्रमुख मांग रही है।
अध्यादेश से कानून लेकर आई थी सरकार
मोदी सरकार पिछले साल पांच जून को तीन कृषि कानूनों को अध्यादेश के जरिए से लेकर आई थी। कोरोना काल के बीच लाए गए इस अध्यादेश को लेकर विपक्षी दलों से लेकर किसान संगठनों तक ने अभूतपूर्व विरोध किया था। इन कानूनों की वापसी के लिए ही किसान संगठन पिछले एक साल से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर बैठे हैं। लगातार विरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी।
लोकसभा में कृषि कानून निरसन विधेयक को चार मिनट के भीतर पारित कर दिया गया। इसे दोपहर 12:06 बजे पेश किया गया और विपक्ष की मांगों को अनसुना करते हुए 12:10 बजे पारित करा लिया गया। लोकसभा में विपक्षी नेताओं ने विधेयक पर चर्चा नहीं कराने पर आपत्ति जताई। राज्यसभा में इसे संक्षिप्त चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाए। विपक्ष ने दावा किया कि सरकार किसानों की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे से बचने के लिए चर्चा कराने से डरती रही, जो किसान आंदोलन के दौरान उनकी प्रमुख मांग रही है।
अध्यादेश से कानून लेकर आई थी सरकार
मोदी सरकार पिछले साल पांच जून को तीन कृषि कानूनों को अध्यादेश के जरिए से लेकर आई थी। कोरोना काल के बीच लाए गए इस अध्यादेश को लेकर विपक्षी दलों से लेकर किसान संगठनों तक ने अभूतपूर्व विरोध किया था। इन कानूनों की वापसी के लिए ही किसान संगठन पिछले एक साल से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर बैठे हैं। लगातार विरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी।
मल्लिका अर्जुन खड़गे
- फोटो :
ANI
राज्यसभा में खड़गे ने दिया था नोटिस
राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने तीनों कानूनों की वापसी वाले विधेयक पर चर्चा कराने के लिए सदन के नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग की थी। इस नियम के तहत उन्होंने शून्य काल और प्रश्न काल को स्थगित करके एमएसपी कानून, 700 से ज्यादा किसानों के शहीद होने पर उनके परिवार को मुआवजा देने और उनके पुर्नवास और लखीमपुरी खीरी कांड के पीड़ितों को न्याय दिलाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की थी। लेकिन ना तो खड़गे की मांगों पर गौर किया गया और ना ही वे अपनी बात पूरी रख पाए।
पीएम ने माफी मांग ली तो चर्चा किस बात की
दूसरी तरफ सरकार के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इस पर चर्चा कराने की जरूरत इसलिए महसूस नहीं की क्योंकि पीएम पहले ही इस पर देश से माफी मांग चुके हैं और सारी बात साफ कर दी थी। हालांकि सत्र के शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कहा था कि यह सत्र बहुत महत्वपूर्ण है और सरकार हर विषय पर चर्चा कराने को तैयार है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने तीनों कानूनों की वापसी वाले विधेयक पर चर्चा कराने के लिए सदन के नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग की थी। इस नियम के तहत उन्होंने शून्य काल और प्रश्न काल को स्थगित करके एमएसपी कानून, 700 से ज्यादा किसानों के शहीद होने पर उनके परिवार को मुआवजा देने और उनके पुर्नवास और लखीमपुरी खीरी कांड के पीड़ितों को न्याय दिलाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की थी। लेकिन ना तो खड़गे की मांगों पर गौर किया गया और ना ही वे अपनी बात पूरी रख पाए।
पीएम ने माफी मांग ली तो चर्चा किस बात की
दूसरी तरफ सरकार के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इस पर चर्चा कराने की जरूरत इसलिए महसूस नहीं की क्योंकि पीएम पहले ही इस पर देश से माफी मांग चुके हैं और सारी बात साफ कर दी थी। हालांकि सत्र के शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कहा था कि यह सत्र बहुत महत्वपूर्ण है और सरकार हर विषय पर चर्चा कराने को तैयार है।
गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन का एक साल
- फोटो :
Agency
क्या है नियम
राज्यसभा के एक पूर्व महासचिव ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि जब भी कोई विधेयक सदन में आता है तो उस पर चर्चा होती है। क्योंकि संसद चर्चा के लिए है और विवादस्पद से लेकर अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती है। अपवाद के तौर पर बिना किसी चर्चा के भी विधेयक पारित कराया जा सकता है लेकिन इस पर विपक्षी दलों से सहमति ली जाती है। सरकार बिजनेस एडवाजयरी कमिटी की बैठक में इस पर विपक्षी दलों की सहमति हासिल करने की कोशिश करती है और यदि यह सहमति मिल जाती है तो विधेयक बिना चर्चा के पारित कराया जा सकता है।
तीन कृषि कानून क्या थे जो निरस्त हो गए
1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून 2020
2. कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार
3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020
राज्यसभा के एक पूर्व महासचिव ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि जब भी कोई विधेयक सदन में आता है तो उस पर चर्चा होती है। क्योंकि संसद चर्चा के लिए है और विवादस्पद से लेकर अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती है। अपवाद के तौर पर बिना किसी चर्चा के भी विधेयक पारित कराया जा सकता है लेकिन इस पर विपक्षी दलों से सहमति ली जाती है। सरकार बिजनेस एडवाजयरी कमिटी की बैठक में इस पर विपक्षी दलों की सहमति हासिल करने की कोशिश करती है और यदि यह सहमति मिल जाती है तो विधेयक बिना चर्चा के पारित कराया जा सकता है।
तीन कृषि कानून क्या थे जो निरस्त हो गए
1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून 2020
2. कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार
3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020
विधेयक जो वापस लिए गए और उन पर चर्चा हुई है।
- फोटो :
Amar Ujala
अब तक 17 कानून जो वापस हुए हैं उन पर चर्चा की गई
बताया यह भी जा रहा कि सरकार ने यह कहा कि जब किसी विधेयक को वापस लिया जाता है तो उस पर चर्चा नहीं होती है। लेकिन ऐसे 17 विधेयक हैं जो वापस भी लिए गए तो उस पर सदन में पर्याप्त बहस और चर्चा हुई।
द स्पेशल कोर्ट रिपील बिल 1980
द हिंदू विडोज रिमैरेज रिपिल बिल 1982
गोल्ड रिपिल बिल, 1990
द कॉर्टन क्लॉथ रिपिल एक्ट 2000
द ज्यूडिसियल एडमिनिस्ट्रेशन लॉज रिपिल बिल, 2000
द उत्तर प्रदेश कैंटोनमेंटस (कंट्रोल ऑफ रेंट एंड एविक्सशन) रिपिल बिल 1971
द डिस्पलेस्ड पर्सनस क्लेमस एंड अदर लॉज रिपिल बिल, 2004
द कांस्टिच्यूशन अमेंडमेंट बिल 2017 एंड द नेशनल कमिशंस फॉर बैकवॉर्ड क्लासेस (रिपिल) बिल 2017
बताया यह भी जा रहा कि सरकार ने यह कहा कि जब किसी विधेयक को वापस लिया जाता है तो उस पर चर्चा नहीं होती है। लेकिन ऐसे 17 विधेयक हैं जो वापस भी लिए गए तो उस पर सदन में पर्याप्त बहस और चर्चा हुई।
द स्पेशल कोर्ट रिपील बिल 1980
द हिंदू विडोज रिमैरेज रिपिल बिल 1982
गोल्ड रिपिल बिल, 1990
द कॉर्टन क्लॉथ रिपिल एक्ट 2000
द ज्यूडिसियल एडमिनिस्ट्रेशन लॉज रिपिल बिल, 2000
द उत्तर प्रदेश कैंटोनमेंटस (कंट्रोल ऑफ रेंट एंड एविक्सशन) रिपिल बिल 1971
द डिस्पलेस्ड पर्सनस क्लेमस एंड अदर लॉज रिपिल बिल, 2004
द कांस्टिच्यूशन अमेंडमेंट बिल 2017 एंड द नेशनल कमिशंस फॉर बैकवॉर्ड क्लासेस (रिपिल) बिल 2017