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Ruskin Bond: मशहूर लेखक रस्किन बॉन्ड साहित्य अकादमी फेलोशिप से सम्मानित, 2021 में किया गया था नामित

Sat, 11 May 2024 10:32 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 11 May 2024 10:32 PM IST
सार

अकादमी ने एक बयान में कहा कि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक और सचिव के श्रीनिवासराव ने शनिवार को बॉन्ड को उनके घर पर पट्टिका सौंपी।

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Famous writer Ruskin Bond honoured with Sahitya Akademi Fellowship
रस्किन बॉन्ड। - फोटो : ANI

विस्तार

प्रख्यात अंग्रेजी लेखक रस्किन बॉन्ड को शनिवार को उनके मसूरी स्थित घर पर प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया। बॉन्ड को सितंबर 2021 में अकादमी के सर्वोच्च सम्मान के लिए नामित किया गया था। हालांकि खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हें व्यक्तिगत रूप से सम्मान नहीं दिया जा सका था।

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50 वर्षों से अधिक समय से लेखन में सक्रिय
अकादमी ने एक बयान में कहा कि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक और सचिव के श्रीनिवासराव ने शनिवार को बॉन्ड को उनके घर पर पट्टिका सौंपी। बॉन्ड का जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था। बॉन्ड पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने लघु कथाएं, बच्चों की किताबें, उपन्यास, आत्मकथात्मक रचनाएं और गैर-काल्पनिक साहित्य सहित साहित्य की विभिन्न शैलियों में लिखा है।

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आठ साल की उम्र में पिता की मौत
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरल स्वभाव के बांड हर साल अपना जन्मदिन बच्चों को ऑटोग्राफ देकर मनाते हैं। अपने परिवार, मित्र लेखकों के साथ डिनर करते हैं। उनका बचपन जामनगर, शिमला, देहरादून में उनका बचपन गुजरा। मात्र आठ साल की उम्र में उनके पिता की मौत हो गई थी। तब रस्किन देहरादून में थे। उनकी मां ने दूसरी शादी की। बिशप कॉटन शिमला से बांड ने सीनियर कैंब्रिज किया। लगभग सवा सौ से अधिक उपन्यास, कहानी, एंथोलॉजी समेत कई लघु कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।

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पद्मश्री और पद्मविभूषण से अलंकृत
बांड को वर्ष 1993 में भारतीय साहित्य अकादमी से पुरस्कार दिया गया। वर्ष 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मविभूषण से अलंकृत किया गया था। दिल्ली सरकार द्वारा 2012 में लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड, गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। वर्ष 1956 में इंग्लैंड में उनकी पहली पुस्तक द रूम ऑन द रूफ के लिए 1957 में जॉन लियानरायम मेमोरियल पुरस्कार से नवाजा गया। बांड के उपन्यास पर श्याम बेनेगल ने ‘एक था रस्टी’ सीरियल बनाया। फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज ने ‘सात खून माफ’ फिल्म बनाई।

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