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DRDO: प्रसिद्ध मिसाइल वैज्ञानिक राम नारायण अग्रवाल का निधन, अग्नि मिसाइलों के जनक के रूप में मिली थी पहचान

Thu, 15 Aug 2024 07:45 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Thu, 15 Aug 2024 07:45 PM IST
सार

प्रख्यात मिसाइल वैज्ञानिक राम नारायण अग्रवाल का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्हें अग्नि मिसाइलों के जनक के रूप में जाना जाता है। डीआरडीओ ने बताया कि वैज्ञानिक राम नारायण अग्रवाल का निधन हैदराबाद में हुआ।

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Famous missile scientist Ram Narayan Agarwal passes away was recognized as the father of Agni missiles
नहीं रहे मिसाइल वैज्ञानिक राम नारायण अग्रवाल - फोटो : ANI

विस्तार

प्रख्यात मिसाइल वैज्ञानिक डॉक्टर राम नारायण अग्रवाल का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्हें अग्नि मिसाइलों के जनक के रूप में जाना जाता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बताया कि वैज्ञानिक राम नारायण अग्रवाल का निधन हैदराबाद में हुआ। 

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राम नारायण अग्रवाल को ‘अग्नि मैन’ के नाम से जाना जाता था
डॉक्टर राम नारायण अग्रवाल ने देश में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे अग्नि मिसाइलों के पहले कार्यक्रम निदेशक थे। इस वजह से उन्हें ‘अग्नि मैन’ के रूप में भी जाना जाता है। डॉ. अग्रवाल ने वर्ष 1983 में भारत की महत्वाकांक्षी अग्नि मिसाइल कार्यक्रम की शुरुआत की थी। उनके नेतृत्व में ही इस कार्यक्रम को संचालित किया गया। इसके बाद, मिसाइल के विभिन्न संस्करण विकसित किए गए। आज भारत के पास अग्नि-5 मिसाइल है। यह एक मध्य-रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 5000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्यों पर निशाना साधने की क्षमता रखती है। डॉ. अग्रवाल ने 2005 में हैदराबाद के एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (एएसएल) के संस्थापक और निदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुए। वे डीआरडीओऔ के प्रमुख वैज्ञानिक रहे। उन्होंने अग्नि और अन्य मिसाइल कार्यक्रमों पर डॉ. अरुणाचलम और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम किया।
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1995 में उन्हें अग्नि कार्यक्रम का निदेशक नियुक्त किया गया था। चार वर्षों के भीतर, वर्ष 1999 में डॉ. अग्रवाल और उनकी टीम ने सड़क-मोबाइल लॉन्च क्षमता के साथ अग्नि-2 का नया संस्करण तैयार किया। इस मिसाइल की मारक क्षमता को अग्नि-1 से अधिक किया गया था। इसके बाद भारत ने अग्नि-3 मिसाइल का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही भारत उन देशों के विशेष समूह में शामिल हो गया, जिनके पास लंबी दूरी की परमाणु-सक्षम मिसाइल शक्ति है। डॉ. अग्रवाल ने अपनी योगदानों के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए। इनमें प्रधानमंत्री द्वारा एयरोस्पेस और अग्नि क्षेत्र में योगदान के लिए वर्ष 2004 में डॉ. अग्रवाल को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। इसके अलावा उन्हें डीआरडीओ टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवार्ड, चंद्रशेखर सरस्वती नेशनल एमिनेंस अवार्ड और भारत रत्न एम एस सुब्बलक्ष्मी के साथ बीरेन रॉय स्पेस साइंसेस अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 1990 में उन्हें पद्म श्री और वर्ष 2000 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने शोक जताया
डीआरडीओ के वरिष्ठ, वर्तमान और पूर्व वैज्ञानिकों ने डॉक्टर अग्रवाल के निधन पर शोक व्यक्त किया। पूर्व डीआरडीओ प्रमुख और मिसाइल वैज्ञानिक डॉक्टर जी सतीश रेड्डी ने कहा कि देश ने एक महान व्यक्तित्व खो दिया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अग्रवाल ने देश में लंबी दूरी की मिसाइलों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 



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