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Hindi News ›   India News ›   Family of a person who lost his life in a road accident will get Rs 10.5 lakh; MACT orders insurance company

महाराष्ट्र: सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजन को मिलेंगे 10.5 लाख; एमएसीटी का बीमा कंपनी को आदेश

Fri, 04 Jul 2025 03:07 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे Published by: रिया दुबे Updated Fri, 04 Jul 2025 03:07 PM IST
सार

ठाणे के मोहम्मद असलम फारुख शेख की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने बीमा कंपनी और ऑटो चालक को दोषी मानते हुए मृतक के परिवार को 10.5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। 

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Family of a person who lost his life in a road accident will get Rs 10.5 lakh; MACT orders insurance company
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

महाराष्ट्र के ठाणे में ऑटोरिक्शा की टक्कर से मरने वाले व्यक्ति के परिजनों को 10.5 लाख रुपये का मुआवाजा मिलेगा। मृतक के परिवार की अपील पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने बीमा कंपनी और ऑटो चालक को दोषी मानते हुए मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया। 

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2019 में हुई थी दुर्घटना 

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार 7 नवंबर, 2019 को मुंबई के मुलुंड इलाके में एक ऑटोरिक्शा ने 54 वर्षीय मोहम्मद असलम फारुख शेख को टक्कर मार दी थी। गंभीर रूप से घायल शेख की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद उसके परिवार ने मुआवजे की मांग करते हुए एमएसीटी से संपर्क किया।

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बीमा कंपनी कर रही थी बचने की कोशिश

बीमा कंपनी ने दावा खारिज करने की दलील देते हुए एफआईआर में एक महीने की देरी और ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस न होने की बात कही थी। न्यायाधिकरण ने आदेश में कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि दुर्घटना के एक महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन, एफआईआर दर्ज करना निश्चित रूप से दुर्घटना की सच्चाई को साबित करता है। ऐसा करने में देरी, दावा याचिका को खारिज करने का आधार नहीं हो सकती।

ऑटो चालक की लापरवाही से हुई दुर्घटना 

एमएसीटी ने माना कि शेख की मौत ऑटो चालक की लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई। उसने यह भी पाया कि दुर्घटना के समय चालक के पास वैध लाइसेंस था, जिससे बीमाकर्ता का पॉलिसी उल्लंघन का दावा खारिज हो गया। इसके बाद न्यायाधिकरण ने पीड़ित के परिजनों को उनकी याचिका की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 10.45 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।

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