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फर्जी टीकाकरण: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- मामले में 'बड़ी मछली' को न छोड़ें
Wed, 30 Jun 2021 02:45 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, मुंबई
एजेंसी, मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 30 Jun 2021 02:45 AM IST
सार
- महाराष्ट्र में फर्जी टीकाकरण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को दिए निर्देश
- कोर्ट ने कहा, ऐसे मामलों में शामिल ‘बड़ी मछली’ की पहचान करनी चाहिए और उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि शहर में फर्जी कोरोना टीकाकरण शिविरों की जांच कर रही मुंबई पुलिस को ऐसे मामलों में शामिल ‘बड़ी मछली’ की पहचान करनी चाहिए और उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश जीएस कुलकर्णी की पीठ ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को भी निर्देश दिया कि वह अदालत को उस कार्रवाई में सूचित करें, जो नगर निकाय ने एंटीबॉडी के लिए ऐसे शिविरों द्वारा ठगे गए लोगों और नकली टीके के कारण उनके स्वास्थ्य पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की जांच करने के वास्ते प्रस्तावित किए हैं।
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अदालत कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान की नागरिकों तक पहुंच बढ़ाने पर कई जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। अधिवक्ता दीपक ठाकरे ने हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले में सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है।
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घर-घर जाकर टीकाकरण के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी क्यों?
साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि उसे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और बिस्तर पर पड़े अस्वस्थ लोगों को घर जाकर कोविड-19 का टीका लगाने का कार्यक्रम शुरू करने के लिए केंद्र की मंजूरी की जरूरत क्यों है?
राज्य सरकार ने मंगलवार को अदालत में हलफनामा दाखिल करते हुए कहा कि प्रायोगिक आधार पर घर पर टीकाकरण शुरू किया जा सकता है, लेकिन केवल ऐसे लोगों के लिए जो चल-फिर नहीं सकते या घर पर पड़े हैं। हालांकि उसने यह भी कहा कि प्रस्ताव को पहले केंद्र सरकार से स्वीकृत कराना होगा।
प्रधान न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ ने कहा कि आपको मंजूरी की जरूरत क्यों है? स्वास्थ्य राज्य का भी विषय है। क्या राज्य सरकार हर काम केंद्र से मंजूरी लेकर कर रही है? क्या केरल, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों ने केंद्र सरकार से स्वीकृति ली है?
पीठ दो वकीलों धृति कपाड़िया और कुणाल तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र सरकार को 75 साल से अधिक उम्र के लोगों, दिव्यांगों तथा बिस्तर वाले मरीजों के लिए घर जाकर टीका लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।