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दिल्ली भाजपा में बढ़ रही गुटबाजी, आम चुनाव के पहले खींचतान खत्म करना बड़ी चुनौती

Thu, 12 Jul 2018 06:47 PM IST
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Jul 2018 06:47 PM IST
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Factionalism is increasing in Delhi BJP central leadership facing Challenge to resolve it

दिल्ली भाजपा में सब कुछ ठीकठाक नहीं है। दिल्ली के कुछ नेताओं की प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी से बन नहीं रही है। प्रदेश में नेताओं के दो गुट बनते हुए बताए जा रहे हैं। इसका सीधा असर यह हुआ है कि पार्टी अपेक्षित ढंग से केजरीवाल सरकार का विरोध नहीं कर पा रही है। बताया जा रहा है कि स्थानीय भाजपा नेताओं के रुख से परेशान तिवारी ने केंद्रीय नेतृत्व से इसके बारे में शिकायत भी की थी, लेकिन उसका कोई असर दिखाई नहीं पड़ा। 

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दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और दिल्ली के गैर पूर्वांचली नेताओं के बीच पावर की रस्साकशी जारी है। सोमवार को पार्टी के प्रदेश नेताओं की बैठक में भी मनोज तिवारी और दिल्ली भाजपा के शीर्ष नेता विजेंद्र गुप्ता आपस में ही मीडिया में खबरों को लीक करने के मुद्दे पर भिड़ गए थे। यह मामला पार्टी के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू की उपस्थिति में हुआ था। अन्य नेताओं के बीच बचाव के बाद दोनों शांत हुए।
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क्या है परेशानी की वजह

दरअसल, पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली भाजपा के शीर्ष नेता हर्षवर्धन को पार्टी का चेहरा बनाए जाने की बात चल रही थी, लेकिन पार्टी ने ऐन मौके पर किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बना दिया। इससे दिल्ली भाजपा के नेताओं में बेचैनी बढ़ गई थी। इसके अलावा पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी सतीश उपाध्याय के बाद मनोज तिवारी को जगह मिल गई। दिल्ली भाजपा के कुछ नेताओं को यह बात भी रास नहीं आई। इसके अलावा स्थानीय भाजपा नेताओं विजय गोयल, प्रवेश वर्मा, ओमप्रकाश शर्मा और विजय जॉली को भी पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है। इसी वजह से इनके बीच असंतोष उभर रहा है। 

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लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच गुटबाजी से नुकसान

पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली की सातों सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा के सामने अगले आम चुनाव में अपना रिकॉर्ड बनाए रखने की चुनौती है। केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता अरुण सिंह को लोकसभा चुनाव की विशेष जिम्मेदारियों के साथ दिल्ली भेजा है। लेकिन जिस समय अरुण सिंह चुनाव के मद्देनजर पार्टी को तैयार करने में लगे हैं, पार्टी के बीच बढ़ रही गुटबाजी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। 

विधानसभा चुनाव में हुआ था बड़ा नुकसान 

पिछले विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के पूर्वांचली नेताओं-कार्यकर्ताओं की कथित रुप से उपेक्षा कर दी थी। सीटों के बंटवारे में पूर्वांचली कार्यकर्ताओं को बेहद कम प्रतिनिधित्व दिया गया था। इसका सीधा असर हुआ कि पूर्वांचली नेताओं ने पार्टी का साथ नहीं दिया जिसके कारण पार्टी को भारी नुकसान हुआ और पार्टी 70 सीटों की विधानसभा में महज तीन सीटें जीत सकी। 

लोकसभा चुनाव से पहले गुटबाजी रोकना पार्टी के सामने चुनौती

प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इसके पहले भी पार्टी नेताओं के लगातार असहयोगात्मक रवैये के बारे में केंद्रीय नेतृत्व को बताया था। केंद्रीय नेता श्याम जाजू और अरुण सिंह के सामने भी यह बात आ चुकी है। विधानसभा चुनाव की तरह अगर इस बार लोकसभा चुनाव के समय भी पार्टी एकजुट नहीं हो सकी तो पार्टी के सामने दिक्कत हो सकती है। यही कारण है कि समय रहते इस गुटबाजी से निजात पाना केंद्रीय नेतृत्व के सामने असली चुनौती है।

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