फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Extramarital affair cannot be reason to sack policeman from service, says gujarat high court

गुजरात: हाईकोर्ट ने कहा- 'विवाहेतर संबंध कदाचार नहीं अनैतिक कृत्य', पुलिसकर्मी की बर्खास्तगी का फैसला पलटा

Wed, 16 Feb 2022 03:05 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 16 Feb 2022 03:05 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस सेवा नियमों में विवाहेतर संबंधों के चलते सेवा से बर्खास्त किए जाने का प्रावधान नहीं है।
 

विज्ञापन
Extramarital affair cannot be reason to sack policeman from service, says gujarat high court
gujarat high court - फोटो : amar ujala

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंधों को लेकर अहम फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस तरह के संबंध समाज की दृष्टि से अनैतिक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें कदाचार नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इन संबंधों के चलते एक पुलिसकर्मी को सेवा से बर्खास्त किए जाने को अनुचित ठहराया। 

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस सेवा नियमों में विवाहेतर संबंधों के चलते सेवा से बर्खास्त किए जाने का प्रावधान नहीं है। गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस संगीता विशेन ने उक्त टिप्पणियों के साथ ही एक पुलिसकर्मी की बर्खास्तगी के आदेश को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अहमदाबाद पुलिस को आदेश दिया कि वह वादी पुलिसकर्मी को एक माह में सेवा में बहाल करे। हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को बर्खास्तगी दिनांक नवंबर 2013 से लेकर अब तक का 25 फीसदी वेतन भी उसे प्रदान करने का निर्देश दिया है। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने यह आदेश 8 फरवरी को दिया था। यह हाल ही में मीडिया को उपलब्ध कराया गया। गुजरात पुलिस के एक सिपाही ने उसे एक विधवा महिला से विवाहेतर संबंध रखने के आरोप में नौकरी से निकाले जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यह महिला अहमदाबाद के पुलिस मुख्यालय के आवासीय क्षेत्र में रहती थी। आरोपी भी वहीं अपने परिवार के साथ रहता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जज ने अपने आदेश में कहा, यह सच है कि याचिकाकर्ता पुलिसकर्मी एक अनुशासित बल का हिस्सा है। उसका कृत्य समाज की नजर में अनैतिक हो सकता है, लेकिन इस अदालत के लिए उसे इस व्यवहार को कदाचार की श्रेणी में लाना मुश्किल होगा। यह कृत्य निजी मामला है। इसलिए यह किसी दबाव या शोषण का मामला नहीं है। उसका यह कार्य समाज की दृष्टि से अनैतिक कृत्य माना जा सकता है, लेकिन पुलिस आचरण नियमावली 1971 के दायरे में यह मामला किसी तरह से नहीं जुड़ता है।'

सिपाही ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके संबंध सहमति आधारित हैं और महिला व सिपाही दोनों ने अपने बयान में यह बात स्वीकार की है। उन्होंने माना कि उनका प्रेम प्रसंग है और सब कुछ उनकी मर्जी से हुआ। सिपाही ने यह भी कहा कि महिला के शोषण का सवाल ही पैदा नहीं होता। पुलिस विभाग ने जांच की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसलिए उसकी बर्खास्तगी को समाप्त किया जाना चाहिए। 


विधवा के परिवार ने 2012 में सीसीटीवी फुटेज को सबूतों के तौर पर पेश करते हुए महिला के साथ सिपाही के अवैध संबंधों को लेकर अहमदाबाद पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से शिकायत की थी। इसके बाद की गई पूछताछ में विधवा महिला व सिपाही ने अपने रिश्तों की बात कबूत की थी। इस पर पुलिस विभाग ने सिपाही को जनता में विभाग की छवि खराब के लिए कारण बताओ नोटिस देने के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया था।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed