फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Explainer: How the Mahadev App Built an Illegal Betting Network, Its Timeline and Why It’s in the News

एक्सप्लेनर: कैसे फैला महादेव एप का सट्टेबाजी नेटवर्क; 94 हजार करोड़ के खेल में कब-क्या हुआ, अभी चर्चा क्यों?

Mon, 02 Nov 2026 05:20 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Mon, 02 Nov 2026 05:20 PM IST
सार

महादेव बेटिंग एप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है। ईडी के मुताबिक, इस नेटवर्क ने करीब 94,400 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित कमाई की। अब जांच एजेंसियां सौरभ से पूछताछ कर नेटवर्क के पूरे खेल का पता लगाने में जुटी हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।

विज्ञापन
Explainer: How the Mahadev App Built an Illegal Betting Network, Its Timeline and Why It’s in the News
महादेव एप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इसके मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को बीते दिन ओमान से प्रत्यार्पित कर भारत लाया गया। इस मामले में लंबे समय से जांच चल रही है। 

विज्ञापन


ऐसे में आइए जानते हैं कि महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप मामले में अभी क्या हुआ है? आखिर महादेव एप क्या था? इसका नेटवर्क कैसे काम करता था? इससे कैसे धोखाधड़ी के आरोप लगे? इसका खुलासा कैसे हुआ? जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया है? 

विज्ञापन

ताजा मामला क्या है?

महादेव बेटिंग एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को रविवार को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था, जिसके आधार पर ओमान की रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद सीबीआई और ई़डी ने ओमान को उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजे। मंजूरी मिलने पर सीबीआई की विशेष टीम मस्कट पहुंची और उसे भारत लेकर आई।

विज्ञापन
विज्ञापन


सोमवार को सौरभ को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय से रायपुर की अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया। वह सीबीआई के दो मामलों में वांछित है, जिनमें चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके अलावा ईडी के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल है।

Trending Videos

महादेव एप क्या था?

महादेव ऑनलाइन बुक एक ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म था। इसके जरिए लोगों को क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन और कार्ड गेम जैसे खेलों पर पैसे लगाने की सुविधा दी जाती थी। इसमें पोकर, तीन पत्ती, ड्रैगन टाइगर और वर्चुअल क्रिकेट जैसे गेम भी शामिल थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म पर भारतीय चुनावों के नतीजों पर भी सट्टा लगाया जाता था।

यह केवल एक एप नहीं था, बल्कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों को जोड़ने वाला बड़ा नेटवर्क था। ईडी के मुताबिक, इसके मुख्य प्रमोटर छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल थे। दोनों ने मिलकर इस नेटवर्क को विकसित किया। 2019-20 के दौरान इसका कारोबार तेजी से बढ़ा और दोनों दुबई से इसे संचालित करने लगे।

लोगों को कैसे जोड़ा जाता था?

इस नेटवर्क को फैलाने के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया गया था। सीबीआई की जांच के मुताबिक, देशभर में इसके पैनल और ब्रांच बनाए गए थे।

इन पैनलों के संचालक लोगों को सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जोड़ते थे। वे यूजर्स की आईडी बनाते और उनसे सट्टे की रकम लेते थे। इस तरह विदेश में बैठे प्रमोटरों के नियंत्रण में भारत के अलग-अलग हिस्सों में सट्टेबाजी का कारोबार चल रहा था।

लोगों तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप का इस्तेमाल किया जाता था। इस व्यवस्था में विदेश में बैठे प्रमोटर तकनीक और पैसों को नियंत्रित करते थे, जबकि भारत में मौजूद पैनल संचालक ग्राहकों को जोड़ने और स्थानीय स्तर पर कारोबार संभालते थे।

Explainer: How the Mahadev App Built an Illegal Betting Network, Its Timeline and Why It’s in the News
महादेव एप - फोटो : अमर उजाला

सट्टे की रकम को कैसे छिपाया जाता था?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को छिपाने के लिए कई बैंक खातों और कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता था।

इसके लिए म्यूल बैंक खातों के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में भेजा जाता था। इसके बाद शेल कंपनियों और कई स्तरों के लेनदेन के माध्यम से पैसों की वास्तविक पहचान छिपाई जाती थी।

सीबीआई के मुताबिक, इस रकम को हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जाता था। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि बेटिंग से हासिल रकम का कुछ हिस्सा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के जरिए भारतीय शेयर बाजार में लगाया गया।

सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि कथित अवैध कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों को प्रोटेक्शन मनी के रूप में दिया जाता था, ताकि यह नेटवर्क बिना रुकावट अपना कारोबार चला सके।

मामला जांच एजेंसियों तक कैसे पहुंचा?

2021 में पुलिस को इस नेटवर्क के जरिए बड़े स्तर पर सट्टेबाजी किए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद 30 मार्च 2022 को दुर्ग पुलिस ने छापेमारी कर इस रैकेट का पर्दाफाश किया। महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस और दूसरे राज्यों की पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म के संचालकों और सहयोगियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे। अक्तूबर 2022 में ईडी ने मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की।

बाद में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत दूसरे राज्यों में दर्ज एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने भी महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली।

Explainer: How the Mahadev App Built an Illegal Betting Network, Its Timeline and Why It’s in the News
महादेव एप - फोटो : अमर उजाला

दुबई में 200 करोड़ रुपये की शादी से कैसे बढ़ी चर्चा?

फरवरी 2023 में सौरभ चंद्राकर ने दुबई में शादी की। ईडी के मुताबिक, इस समारोह पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

मेहमानों को लाने के लिए प्राइवेट जेट किराये पर लिए गए। लग्जरी होटल बुक किए गए और बड़े स्तर पर सजावट की गई। शादी में कई बॉलीवुड कलाकारों और गायकों ने परफॉर्म किया। इनमें सनी लियोनी, नेहा कक्कड़, आतिफ असलम, राहत फतेह अली खान, टाइगर श्रॉफ और भाग्यश्री जैसे नाम शामिल बताए गए।

इस आयोजन के लिए मुंबई और नागपुर की इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों की सेवाएं ली गई थीं। ईडी ने दावा किया कि करीब 112 करोड़ रुपये हवाला के जरिए एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को दिए गए, जबकि होटल बुकिंग पर लगभग 42 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

शादी फरवरी में हुई थी, लेकिन इसके वीडियो और तस्वीरें करीब पांच महीने बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए। आयोजन की भव्यता और खर्च की रकम सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने इसके लिए इस्तेमाल किए गए पैसों के स्रोत की पड़ताल की।

नेताओं और अधिकारियों पर क्या आरोप लगे?

जांच के दौरान इस मामले में राजनीतिक लोगों और सरकारी अधिकारियों की कथित भूमिका भी सामने आई।

ईडी ने आरोप लगाया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। 2025 में इस मामले में दर्ज सीबीआई एफआईआर में बघेल को आरोपी बनाया गया। हालांकि, भूपेश बघेल ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है और इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

सीबीआई ने इस नेटवर्क को कथित संरक्षण देने में पुलिस अधिकारियों, नौकरशाहों और अन्य बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की।

Explainer: How the Mahadev App Built an Illegal Betting Network, Its Timeline and Why It’s in the News
महादेव एप - फोटो : अमर उजाला

गिरफ्तारी से बचने के लिए सौरभ और रवि ने क्या-क्या किया?

ईडी की कार्रवाई तेज होने के बाद सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की विदेशी नागरिकता का मामला भी सामने आया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों के वानुआतु के पासपोर्ट पेश किए गए थे। दस्तावेजों के मुताबिक, सौरभ को 6 मई 2022 और रवि उप्पल को 28 जून 2022 को पासपोर्ट जारी किए गए थे। इनकी वैधता 2032 तक बताई गई थी। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि विदेशी नागरिकता का इस्तेमाल भारतीय कानून और प्रत्यर्पण की कार्रवाई से बचने के लिए किया गया।

दुबई में शिव महापुराण कथा का आयोजन
दिसंबर 2024 में सौरभ चंद्राकर और उसके परिवार ने दुबई के ली मेरिडियन होटल एंड कॉन्फ्रेंस सेंटर में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का आयोजन कराया।

यह कथा 9 से 11 दिसंबर तक चली। यह पहली बार था, जब पंडित प्रदीप मिश्रा ने विदेश में कथा वाचन किया। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें सौरभ अपनी पत्नी और परिवार के साथ कथा सुनता नजर आया। उसका पार्टनर रवि उप्पल भी पंडित प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लेते दिखाई दिया।

ईडी ने 94,400 करोड़ रुपये की कमाई का दावा किया
24 सितंबर को ईडी ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले में अपनी छठी अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसमें एजेंसी ने दावा किया कि महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़ी वेबसाइटों ने पिछले 10 वर्षों में करीब 94,400 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित कमाई की।

ईडी के मुताबिक, महादेव एप विदेश में होस्ट की गई कई अवैध बेटिंग वेबसाइटों का समूह था। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मुख्य प्लेटफॉर्म अब भी सक्रिय था और बड़ी संख्या में पैनलों के जरिए काम कर रहा था।

इस शिकायत में 42 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया। हालांकि, ईडी ने स्पष्ट किया कि 94,400 करोड़ रुपये का आंकड़ा शुरुआती अनुमान है। आगे कोई नया सबूत सामने आने पर इसमें बदलाव किया जा सकता है।

एजेंसी ने यह भी दावा किया कि भिलाई, रायपुर, भोपाल और दिल्ली जैसे शहरों में पैनल चलाने वाले कुछ लोगों ने करीब 3.5 करोड़ से 60 करोड़ रुपये तक कमाए। इस रकम का इस्तेमाल संपत्तियां, सोना, गाड़ियां और महंगी साड़ियां खरीदने में किए जाने का आरोप है।

अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

महादेव बेटिंग एप मामले में ईडी और सीबीआई ने अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की है। इसमें गिरफ्तारियां, संपत्तियों को अटैच करना, छापेमारी और चार्जशीट दाखिल करना शामिल है।

22 अवैध एप और वेबसाइट ब्लॉक किए गए

5 नवंबर 2023 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने महादेव बुक ऑनलाइन समेत 22 अवैध बेटिंग एप और वेबसाइट को ब्लॉक करने के आदेश जारी किए। यह कार्रवाई ईडी की जांच और उसके अनुरोध के बाद की गई थी।

मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उस समय महादेव मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस के कांस्टेबल भीम सिंह यादव और असीम दास को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

ईडी ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और ठिकानों पर छापेमारी की

ईडी के मुताबिक, इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी ने देशभर में 190 ठिकानों पर तलाशी ली है। छह अभियोजन शिकायतों में 116 आरोपियों की पहचान की गई है।

करोड़ों की संपत्तियां अटैच की गईं

ईडी ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़े मामलों में कई संपत्तियां अटैच, जब्त और फ्रीज की हैं।

10 जुलाई की कार्रवाई में विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की करीब 940.77 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की गईं। इनमें आवासीय संपत्तियां, जमीन, इक्विटी शेयर और अन्य सिक्योरिटीज शामिल हैं।

ईडी के मुताबिक, इस नेटवर्क की कथित कमाई को शेल कंपनियों और कई स्तरों के लेनदेन के जरिए विकास गर्ग से जुड़ी कंपनियों तक पहुंचाया गया था।

इस कार्रवाई से पहले मामले में करीब 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी थीं। नई कार्रवाई के बाद यह आंकड़ा करीब 3,800 करोड़ रुपये हो गया था।

मार्च 2026 में ईडी ने सौरभ चंद्राकर और उसके नेटवर्क से जुड़ी करीब 1,700 करोड़ रुपये की 20 अचल संपत्तियां अटैच की थीं। इनमें दुबई की 18 और नई दिल्ली की दो संपत्तियां शामिल थीं। इनमें बुर्ज खलीफा का अपार्टमेंट, दुबई हिल्स एस्टेट के लग्जरी विला और अपार्टमेंट, बिजनेस बे और एसएलएस होटल एंड रेजिडेंसेज की प्रॉपर्टी शामिल थीं।

सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली। 9 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। वहीं, दूसरे बेटिंग मामले में 66 आरोपियों के खिलाफ पांच चार्जशीट दाखिल की गईं।

सीबीआई ने इन मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े प्रावधानों के साथ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए।

रवि को वापस लाने का प्रयास जारी

वहीं सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियां अब महादेव ऑनलाइन बुक के सह-संस्थापक रवि उप्पल के प्रत्यर्पण के लिए यूएई के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, उसे दुबई से भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed