एक्सप्लेनर: मुस्कान से पहले कितनी महिलाओं को हुई सजा-ए-मौत, कितनों को मिली फांसी, कितनी कर रहीं इसका इतंजार?
मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद महिला दोषियों को मिले मृत्युदंड पर फिर चर्चा शुरू हो गई है। शबनम और रेणुका शिंदे-सीमा गवित जैसे मामलों में भी अदालतें मौत की सजा सुना चुकी हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि अब तक कितनी महिलाओं को मौत की सजा सुनाई गई है?
विस्तार
मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर देश में महिलाओं को सुनाई गई मौत की सजा और ऐसे मामलों की चर्चा हो रही है।
ऐसे में सवाल है कि मेरठ के मामले में क्या हुआ? इससे पहले किन महिलाओं को मौत की सजा सुनाई गई? उन मामलों की मौजूदा स्थिति क्या है? देश में अब तक कितने लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है? कितने लोग मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं?
मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड क्या है?
सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में काम करते थे। उन्होंने साल 2016 में मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। सौरभ लंदन में नौकरी करते थे, जबकि मुस्कान मेरठ में रहती थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी दौरान मुस्कान के अपने पुराने दोस्त साहिल शुक्ला से करीबी संबंध बन गए।
24 फरवरी 2025 को सौरभ लंदन से मेरठ लौटे। पुलिस जांच के मुताबिक, 3 मार्च 2025 की रात मुस्कान और साहिल ने सौरभ को नशीली दवा देने के बाद चाकू से वार कर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट से भर दिया।
18 मार्च 2025 को सौरभ के भाई ने उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके अगले दिन यानी 19 मार्च को पुलिस ने घर से सीमेंट से भरा ड्रम बरामद किया। ड्रम के अंदर सौरभ के शव के टुकड़े थे। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया। 12 मई 2025 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस जांच, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए। 30 सितंबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने दोनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहराया।
14 अक्तूबर 2026 को दोनों को सजा पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य और परवरिश का हवाला देकर कम सजा देने की अपील की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई।
अब तक देश में कितने लोगों को दी गई फांसी?
प्रोजेक्ट 39ए के आंकड़ों के मुताबिक, आजादी के बाद से देश में कुल 720 लोगों को फांसी दी चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 354 लोगों को उत्तर प्रदेश में फांसी दी गई है। इसके बाद हरियाणा में 90, मध्य प्रदेश में 73, महाराष्ट्र में 57, कर्नाटक में 36, पश्चिम बंगाल में 30, आंध्र प्रदेश में 27, दिल्ली में 24 और पंजाब में 10 लोगों को फांसी दी गई। इनमें से केवल एक महिला है बाकी 719 पुरष हैं।
कौन है वो महिला जिसे मिली फांसी?
स्वतंत्र भारत में फांसी पाने वाली पहली और एक मात्र महिला का नाम रतन बाई जैन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन बाई को 3 जनवरी 1955 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। रतन बाई पर तीन युवतियों की हत्या करने का दोष सिद्ध हुआ था।
बताया जाता है कि रतन बाई दिल्ली के एक स्टेरिलिटी क्लीनिक में मैनेजर थी। इस क्लीनिक में प्रजनन संबंधी समस्याओं का इलाज किया जाता था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसे शक था कि क्लीनिक में काम करने वाली तीन युवतियों के उसके पति से संबंध हैं। इसी शक को हत्याओं की वजह बताया गया। रतन बाई ने तीनों युवतियों के खाने में जहर मिला दिया था। जहर खाने के बाद उनकी मौत हो गई। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उसे दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। 3 जनवरी 1955 को उसे तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई।
इस वक्त मुस्कान जैसी कितनी महिलाएं जिन्हें सुनाई गई है फांसी की सजा?
फरवरी 2026 में जारी NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के द स्क्वायर सर्कल क्लिनिक की रिपोर्ट भारत में मृत्युदंड: वार्षिक सांख्यिकी रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक भारत में कुल 574 लोग मौत की सजा का सामना कर रहे थे। इनमें 550 पुरुष और 24 महिलाएं शामिल थीं। इनमें से 10 महिलाएं उत्तर प्रदेश की थीं। इसके बाद केरल की तीन और महाराष्ट्र की दो महिलाएं थीं। इनमें से कुछ मामले बेहद चर्चित रहे।
फांसी की सजा पाई महिलाओं में कौन से मामले सबसे चर्चित?
1. पूरे परिवार को मारने वाली शबनम कर रही फांसी का इंतजार
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव की शबनम को 2008 में परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उनके साथ प्रेमी सलीम को भी दोषी पाया गया। शबनम अंग्रेजी और भूगोल में स्नातकोत्तर थी और सरकारी स्कूल में शिक्षामित्र थी। 14 और 15 अप्रैल 2008 की रात शबनम ने परिवार के छह सदस्यों को नशीला पदार्थ दिया। इसके बाद सलीम ने उनकी हत्या कर दी। शबनम पर अपने 10 महीने के भतीजे की गला घोंटकर हत्या करने का भी दोषी पाया गया। इस घटना में शबनम के माता-पिता, दो भाई, भाभी, चचेरी बहन और भतीजे की मौत हुई थी।
शबनम को कब मिली मौत की सजा?
अमरोहा की सत्र अदालत ने 2010 में शबनम और सलीम को मौत की सजा सुनाई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2013 और सुप्रीम कोर्ट ने मई 2015 में सजा बरकरार रखी। उनकी दया याचिकाएं भी खारिज हो गईं। हालांकि, शबनम को अब तक फांसी नहीं दी गई है। वह बरेली जिला कारागार में बंद है।
क्या बदल भी जाती है फांसी की सजा?
हां। अलग-अलग कोर्ट में जाकर ऐसा भी हो सकता है। रेणुका शिंदे और सीमा गवित मामला इसका चर्चित उदाहरण है। रेणुका शिंदे और सीमा गवित दो बहनें हैं, जिन्हें बच्चों के अपहरण और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। जून 1990 से अक्तूबर 1996 के बीच उन दोनों पर 13 बच्चों का अपहरण करने और नौ की हत्या का आरोप लगा। अदालत में पांच बच्चों की हत्या साबित हुई।
अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
कोल्हापुर की सत्र अदालत ने 2001 में दोनों बहनों को मौत की सजा सुनाई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2004 और सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में सजा बरकरार रखी। 2014 में उनकी दया याचिकाएं खारिज कर दी गईं। हालांकि, दया याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 जनवरी 2022 को उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।