Living Planet Report: 48 साल में 69 फीसदी कम हुई वन्यजीवों की आबादी, इस चौंकाने वाली गिरावट के क्या हैं मायने?
Living Planet Report 2022: लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट क्या है? इस बार की रिपोर्ट में क्या बताया गया है? क्या विश्व के अलग-अलग हिस्सों में वन्यजीवों की आबादी में गिरावट अलग-अलग है? इस रिपोर्ट के क्या मायने हैं? आइये समझते हैं…
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दुनियाभर में वन्यजीवों की आबादी में भारी कमी आई है। स्तनधारी, पक्षियों, सरीसर्प, उभयचर और मछलियों की आबादी में 48 साल में औसतन 69 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। ताजे पानी में रहने वाले जानवरों की आबादी में सबसे ज्यादा 83 फीसदी गिरावट हुई है। इसी तरह शार्क की आबादी में औसतन 71 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इसकी वजह 1970 के बाद बढ़ी फिशिंग है। जिसमें 18 गुना का इजाफा हुआ। ये सभी बातें बुधवार को आई लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट में बताई गई हैं।
आखिर ये लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट क्या है? इस बार की रिपोर्ट में क्या बताया गया है? क्या विश्व के अलग-अलग हिस्सों में वन्यजीवों की आबादी में गिरावट अलग-अलग है? इस रिपोर्ट के क्या मायने हैं? आइये समझते हैं…
लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट क्या है?
LPR यानी लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट हर दो साल पर जारी की जाती है। इस रिपोर्ट को दो संस्थाएं वर्ल्ड वाइल्ड फंड फॉर नेचर (WWF) और जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन मिलकर प्रकाशित करती हैं। इस रिपोर्ट के जरिए यह बताने की कोशिश होती है कि दुनियभर में अलग-अलग जीव-जंतुओं की आबादी कैसे बढ़-घट रही है। इसका हमारे पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या असर पड़ सकता है इसका भी संकेत रिपोर्ट में दिया जाता है।
इस बार की रिपोर्ट में क्या है?
दुनियाभर के 89 लेखकों द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 1970 के मुकाबले 2018 में जीव-जंतुओं (स्तनधारी, पक्षियों, सरीसर्प, उभयचर और मछलियों) की आबादी में औसतन 69 प्रतिशत की गिरावट आई है। यानी, महज 48 साल के भीतर वन्यजीवों की आबादी में दो तिहाई से ज्यादा की कमी हुई है। साल के अंत में दुनिया के कई देश मॉन्ट्रियल में जैव विविधता की रक्षा के लिए एक नई वैश्विक योजना तैयार करने के लिए मिलने वाले हैं। उससे पहले आई यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है।
क्या विश्व के अलग-अलग हिस्सों में ये गिरावट अलग-अलग है?
लेटिन अमेरिका और कैरेबियन इलाके में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। 1970 के मुकाबले वन्यजीवों की आबादी में औसतन 94 फीसदी की कमी आई है। मीठे पानी की मछली, सरीसृप और उभयचरों में पैटर्न सबसे अधिक स्पष्ट था। अफ्रीका में 66 फीसदी, एशिया और पैसिफिक इलाके में 55 फीसदी, उत्तरी अमेरिका में 20 फीसदी, यूरोप और मध्य एशिया में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
इस रिपोर्ट के क्या मायने हैं?
सबसे पहली बात कि इस रिपोर्ट में सभी तरह के जीव-जंतु शामिल नहीं हैं। ऐसे में ये कहना सही नहीं होगा कि हर तरह के वन्यजीवों की आबादी घट गई है। रिपोर्ट में बिना रीढ़ वाले जीवों यानी इन्वर्टीब्रेट्स को शामिल नहीं किया गया है। इसमें जेलीफिश, कोरल, घोंघे, ऑक्टोपस, केकड़े, झींगा मकड़ी, तितलियां और बीटल जैसे कई जीव आते हैं। जबकि, ये जीव पशु प्रजातियों में बहुमत में हैं।
दूसरा इस अध्ययन में 5,320 प्रजातियों की करीब 32 हजार की आबादी को ही शामिल किया गया है। इसके साथ ही इनकी गणना में कई विशेषज्ञ खामी बताते हैं। जैसे- मैक्सिको की खाड़ी में व्हेल शार्क की आबादी को पानी के ऊपर कम उड़ने वाले छोटे विमानों से गिना जाता है। इसी तरह पक्षियों की संख्या की गणना चट्टानों पर घोंसलों की संख्या से होती है। इस वजह से कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि आबादी में औसतन 69 फीसदी की कमी का मतलब निगरानी वाले वन्यजीवों की आबादी का इतना हिस्सा खत्म हो गया, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
उदाहरण के लिए तीन जैव प्रजातियों चिड़िया, भालू और शार्क को लेते हैं। अगर 1970 में चिड़िया की आबादी 50 थी और वो 2018 में घटकर 10 रह जाती हैं तो उसकी आबादी में गिरावट 80 फीसदी की होती है। वहीं, भालू की आबादी अगर 40 से घटकर 32 हो जाती है तो उसकी आबादी में 20 फीसदी की गिरावट हुई। इसी तरह शार्क की आबादी 20 से घटकर 10 रह जाती है तो उसकी आबादी में 50 फीसदी की गिरावट हुई। ऐसे में इन जीवों की औसत आबादी में औसतन 50 फीसदी की गिरावट हुई। जबकि, कुल जीवों के हिसाब से देखें तो आबादी में आई ये गिरावट 47 फीसदी की ही है। WWF ने इसे इस तरह से डिजाइन किया है जिससे आबादी में आ रहे बदलावों को समझा जा सके न कि कुल आबादी में आई कमी को बताया जाए।
रिपोर्ट में क्या सभी जीवों की आबादी घटने की बात कही गई है?
नहीं ऐसा नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन की गई कुल जीवों में आधी से अधिक की आबादी या तो स्थिर है या फिर बढ़ रही है। केवल तीन फीसदी प्रजातियां ऐसी हैं जिनकी आबादी तेजी से घट रही है। अगर इन प्रजातियों को हटा दिया जाए तो आबादी में आई औसत कमी में काफी सुधार दिखाई देता है।