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विशेषज्ञ: मुंबई और ह्यूस्टन जैसी प्राकृतिक आपदाएं अब आम बात

Thu, 31 Aug 2017 09:21 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Thu, 31 Aug 2017 09:21 AM IST
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Experts take stock extreme weather events the new normal
mumbai rain - फोटो : indian express

ह्यूस्टन से लेकर मुंबई और पहाड़ी नेपाल से लेकर रेतीले राजस्थान तक में इस साल मौसम में हुए बड़े बदलाव से हुई भारी बारिश ने भयंकर तबाही मचाई। जहां सड़के डूब गईं, पुल टूट गए वहीं शहरों और गांवों के जलमग्न होने के कारण हजारों लोगों की मौत हो गई।

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इस साल हुई भारी बारिश से जहां पूरी दुनिया मानवीय और आर्थिक तरीकों से लड़ रही है वहीं एक बड़ा सवाल हमारे सामने आ खड़ा हुआ है कि क्या बेहद खराब मौसम की घटनाएं सामान्य हो गई हैं?
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वैज्ञानिक, मौसम विज्ञानी और जलवायु परिवर्तन के विशेषज्ञ मौसम में हुए खतरनाक बदलाव के लिए वैश्विक तापमान को कारण मान रहे हैं। भारत के मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्व निदेशक जनरल लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा कि भारी बारिश, बादल का फटना, बिजली का गरजना और गर्म हवाएं बहुत ही असामान्य तरीके से सामान्य हो चुकी हैं।

एक निजी मौसम अनुमान एजेंसी स्काइमेट के सीईओ जतिन सिंह ने इस पर प्रकाश डालते हुए जानकारी दी कि भारी बारिश की स्थिति में औसत बारिश कम या ज्यादा रहती है। उन्होंने कहा कि सूखा तो बढ़ या घट जाता है मगर औसत बारिश का अनुपात नहीं बदलता है।

इसका मतलब है कि किसी खास क्षेत्र में बारिश अधिक होती है जबकि अन्य इलाके सूखे रह जाते हैं। आईएमडी के अनुसार, 1901 से लेकर अब तक साल 2016 सबसे अधिक गर्म साल था।

वहीं जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) द्वारा जलवायु परिवर्तन को लेकर पेश की गई पांचवें आकलन की रिपोर्ट में देखा गया कि 1950 से अब तक कुछ बड़ी घटनाओं में बदलाव हुआ है, खासकर प्रतिदिन बढ़ने वाले तापमान और गर्म हवाओं में। 


मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओचा) के अनुसार, इस साल भारत, नेपाल और बांग्लादेश में मूसलाधार बारिश से 4.1 करोड़ लोग प्रभावित हुए। वहीं उसने कहा कि तीनों देशों में मरने वालों की कुल संख्या लगभग 900 है।

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जबकि आईएमडी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक गर्म हवाओं की वजह से भारत में 2016 में 1,600 लोगों की मौत हुई थी जिसमें से 475 लोगों की जान बाढ़ और बिजली गिरने से हुई थी।

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