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कोरोना वायरस: देश में ओमिक्रॉन संक्रमण से ही बचकर रहना होगा, फिलहाल डेल्टाक्रॉन नहीं है खतरे की घंटी!

Tue, 22 Feb 2022 07:41 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Tue, 22 Feb 2022 07:41 PM IST
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सार
कुछ समय पहले डेल्टा और ओमिक्रॉन वैरिएंट का मिलाजुला रूप लैब में पकड़ा गया था। जानकारों ने इसे डेल्टाक्रॉन का नाम दिया था। करीब एक महीने पहले साइप्रस यूनिवर्सिटी के वायरोलॉजिस्ट लिओडियोस कोस्ट्रिकिस ने बताया था कि उन्होंने डेल्टाक्रॉन नाम के एक नए वैरिएंट की पहचान की है...
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Experts says Deltacron variant not found in India, However, some cases of mixed infections of Omicron and Delta came
कोरोना की जांच - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

भारत में कोरोना वायरस की तीसरी लहर महानगरों से लगभग खत्म हो चली है। इस बीच कोरोना वायरस के डेल्टाक्रॉन स्वरूप का संक्रमण फिलहाल देश में नहीं देखा गया है। इस बीच सरकार ने डेल्टाक्रॉन संक्रमण को गंभीरता से लेते हुए कोविड 19 के संक्रमितों के नमूनों के जीनोम सिक्वेंसिंग के दायरे को चार गुना तक बढ़ा दिया है। अब यह 10 हजार नमूना प्रतिमाह से बढ़ाकर 10 हजार प्रति सप्ताह तक कर दिया गया है। डेल्टाक्रॉन पर विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी पूरी तरह डेल्टाक्रॉन स्वरूप नहीं है। हालांकि कुछ मामलों में ओमिक्रॉन और डेल्टा के मिश्रित संक्रमण जरूर देखने को मिल रहे हैं।



देश में जीनोम सिक्वेंसिंग नमूने के जरिए कोविड-19 वायरस स्ट्रेन की निगरानी करने वाले कंसोर्टियम, इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स कंसोटियम (इन्साकॉग) के वरिष्ठ सदस्य ने अमर उजाला से कहा कि हम लगातार इस बार जोर देकर कह रहे हैं कि फिलहाल भारत में डेल्टाक्रॉन स्वरूप नहीं है। हालांकि कुछ गंभीर पीड़ित लोग इसे मिश्रित संक्रमण जरूर बता रहे हैं। जिसमें ओमिक्रॉन और डेल्टा के मिश्रित संक्रमण देखने को मिल रहे हैं। हालांकि यह कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी कि डेल्टाक्रॉन खतरनाक है या नहीं। फिलहाल भारत में 100 फीसदी ओमिक्रॉन संक्रमण के ही मामले हैं। तीसरी लहर के दौरान जरूर कुछ मिश्रित मामले देखने को मिले थे।

क्या है मिश्रित संक्रमण?

मिश्रित मामलों पर उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की मुलाकात ऐसे दो लोगों से होती है, जो वायरस के दो अलग-अलग स्ट्रेन से संक्रमित हैं तब उस व्यक्ति को एक ही वक्त में दोनों ही स्ट्रेन का संक्रमण हो जाता है, जिसे मिश्रित संक्रमण कहते हैं। ऐसे संक्रमण वायरस के स्वरूपों के मिलने से होते हैं न कि वायरस के म्यूटेशन की वजह से। हालांकि इन मामलों को लेकर इन्साकॉग काफी सतर्क है। वह लगातार देश के अन्य राज्यों के अलग अलग नमूनों के जीनोम का जायजा गंभीरता से ले रहा है।

उनका कहना है कि हम लगातार डेल्टाक्रॉन स्वरूप पर नजर बनाए रखे हुए हैं। जीनोम सिक्वेंसिंग का काम बेहतर तरीके से होता है और सभी वायरस का अध्ययन भी सावधानी पूर्वक किया जाता है। हम औसतन एक माह में 10 हजार नमूनों की जीनोम सिक्वेंसिंग कर रह थे। अब हमने इसे बढ़ाकर हर सप्ताह 10 हजार नमूनों तक कर दिया है। इन्साकॉग के तहत 51 संस्थान हैं और अगर जरूरत पड़ी तो इस नेटवर्क का विस्तार भी किया जा सकता है।  

इन्साकॉग ने कोविड 19 जीनोम सिक्वेंसिंग की शुरुआत दिसंबर 2020 में की थी। तब से लेकर अब तक करीब 1.8 लाख नमूनों की जीनोम सिक्वेंसिंग की जा चुकी है। वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि जब भी कोई देश सार्स—सीओवी—2 वायरस के नए स्ट्रेन का पता लगाता है तब यह वायरस की संरचना और इसके क्लिनिकल पहलू को तुरंत ही साझा करते हैं। हम इस संरचना को राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड करते हैं और इसके बाद एक अंतरराष्ट्रीय पोर्टल पर भी सभी देश वायरस की संरचना को अपलोड करते हैं। इसके बाद देश सीक्वेंस वाले नमूने की संरचना का जायजा लेते हैं।

साइप्रस के वायरोलॉजिस्ट ने खोजा था डेल्टाक्रॉन

कुछ समय पहले डेल्टा और ओमिक्रॉन वैरिएंट का मिलाजुला रूप लैब में पकड़ा गया था। जानकारों ने इसे डेल्टाक्रॉन का नाम दिया था। करीब एक महीने पहले साइप्रस यूनिवर्सिटी के वायरोलॉजिस्ट लिओडियोस कोस्ट्रिकिस ने बताया था कि उन्होंने डेल्टाक्रॉन नाम के एक नए वैरिएंट की पहचान की है। हालांकि उस समय कई जानकारों ने उनके दावे को खारिज कर दिया था और कहा था कि हो सकता है यह लैब में किसी गलती या कंटेमिनेशन के कारण हुआ हो।

डेल्टा वैरिएंट की घातक क्षमता और ओमिक्रोन वैरिएंट की संक्रामकता के बारे में तो सभी जान चुके हैं। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि डेल्टाक्रॉन कितना घातक और संक्रामक है। ब्रिटेन की हेल्थ एजेंसी अभी यह स्पष्ट तौर पर बताने में असमर्थ है कि कोई अन्य मरीज इस वैरिएंट से संक्रमित पाया गया है या नहीं। हालांकि अभी स्वास्थ्य अधिकारी इसको लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं, क्योंकि अभी इसके ज्यादा मामले सामने नहीं आए हैं।

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