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'गन्ने में शक्कर के स्तर का सही पता नहीं होने से घाटे में किसान'

Thu, 09 Feb 2017 06:48 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Feb 2017 06:48 AM IST
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Expert tells Why Sugarcane farmers are in loss
सांकेतिक चित्र

गन्ने में शक्कर स्तर का सही पता नहीं लगने की वजह से किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। अगर गन्ने में शक्कर के स्तर का सही तरीके से पता लगाया जाए, तो कीमत भी अधिक मिलेगी और किसानों की आर्थिक दशा में भी सुधार होगा। शुगर केन सैंप्लर मशीन का ईजाद करने वाले जकरियास मैथ्यू ने बुधवार को गन्ने के किसानों की समस्याओं पर एक चर्चा में ये बातें बताईं।

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मैथ्यू ने बताया कि पुणे स्थित वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के सहयोग से इस मशीन की निर्माण किया गया है। इसकी खरीदारी पर भारत सरकार मिलों को 75 फीसदी की सब्सिडी देती है। फिर भी चीनी मिलें शक्कर स्तर का सही पता लगाने वाली मशीनों को नहीं लगा रही हैं। उन्होंने बताया कि चीनी मिलें किसानों को गन्ने में 9-10 फीसदी शक्कर प्राप्ति के हिसाब से गन्ने का भुगतान कर रही हैं, जबकि शक्कर प्राप्ति की असली मात्रा 12 फीसदी तक होती है।
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मैथ्यू ने बताया कि गन्ने में शक्कर के 12 फीसदी स्तर के हिसाब से यदि किसी मिल में रोजाना 4,000 टन गन्ने की पेराई होती है, तो 480 टन शक्कर की प्राप्ति होगी। लेकिन मिल मालिक अमूमन इसे 400 टन शक्कर की प्राप्ति बताते हैं। उन्होंने बताया कि देश में छोटी-बड़ी लगभग 600 चीनी मिलें चल रही हैं, लेकिन किसानों को शक्कर की सही प्राप्ति के हिसाब से कीमत नहीं मिल रही है।

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'मशीनें नहीं लगाना है व्यवस्था का उल्लंघन'

Expert tells Why Sugarcane farmers are in loss
मैथ्यू ने बताया कि गन्ने में शक्कर स्तर कम बताने की वजह से देशभर के गन्ना किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों में गन्ने में शक्कर के स्तर का सही माप यंत्र नहीं रखा जाना शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 1966 का उल्लंघन है। साथ ही किसानों को गन्ने का सही मूल्य चुकाने के मामले में अदालत की व्यवस्था का भी उल्लंघन है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में गुजरात स्थित श्री नर्मदा खांड उद्योग सहकारी मंडली ने शुगर केन सैंप्लर मशीन लगाई थी, लेकिन कुछ माह के बाद ही इस मशीन के इस्तेमाल को बंद कर दिया गया।
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