आईएसआई की योजना: पाकिस्तान की नजर मुफ्त मिले अरबों डॉलर के अमेरिकी हथियारों पर, अफगानिस्तान को नेस्तनाबूद करने की तैयारी
मध्य एशिया मामलों के जानकार कर्नल जीडी पुरी के मुताबिक पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में बहुत ही घटिया और अमानवीय चाल चलनी शुरू कर दी है। कर्नल पुरी कहते हैं जब से आईएसआई के चीफ फैज हमीद ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में जाकर डेरा जमाया है, तभी से हालात गृहयुद्ध जैसे होने लगे हैं...
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अफगानिस्तान में पूरी तरीके से पाकिस्तान ने अब अपना दखल देना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठनों ने अफगानिस्तान के अस्तित्व को ही नेस्तनाबूत करने की पूरी योजना तक बना डाली है। अलकायदा से लेकर हक्कानी नेटवर्क और आईएस तक के आतंकियों के नापाक इरादे को लेकर काबुल पहुंचे आईएसआई चीफ फैज हमीद अब 'ऑपरेशन अफगानिस्तान' चला रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो अफगानिस्तान को अपने हाथों से फिसलता देख पाकिस्तान ने यह चाल चली ताकि ऐसी रणनीतियां बनाई जाएं जिससे अफगानिस्तान के भीतर ही गृह युद्ध शुरू हो जाए। जिससे पड़ोसी मुल्क को अमेरिका के छोड़े गए अरबों डॉलर के हथियार और गोला बारूद पर पाकिस्तान का कब्जा हो सके।
मध्य एशिया मामलों के जानकार कर्नल जीडी पुरी के मुताबिक पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में बहुत ही घटिया और अमानवीय चाल चलनी शुरू कर दी है। कर्नल पुरी कहते हैं जब से आईएसआई के चीफ फैज हमीद ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में जाकर डेरा जमाया है, तभी से हालात गृहयुद्ध जैसे होने लगे हैं। वह कहते हैं कि आईएसआई चीफ के काबुल पहुंचने के बाद से ही अफगानिस्तान में बनने वाली तालिबानी सरकार को लेकर आपसी दरार पैदा हो गई हो गयी। हक्कानी नेटवर्क से लेकर अल-कायदा तक बेहद सक्रिय हो गया है। सक्रियता भी ऐसी बढ़ी कि तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के बीच गोलियां बरसने लगीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की यह सोची-समझी रणनीति है। दरअसल पाकिस्तान नहीं चाहता है कि अफगानिस्तान में सत्ता पूरी तरीके से तालिबान की मुट्ठी में रहे। अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बाद से ही पाकिस्तान इस कोशिश में है कि हक्कानी नेटवर्क का दबदबा पूरे अफगानिस्तान पर बना रहे। यही वजह है कि पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क समेत अपने सबसे करीबी आतंकी संगठन अल-कायदा को भी सक्रिय कर दिया।
कर्नल पुरी कहते हैं कि आतंकियों के साए में चलने वाली इमरान सरकार ने अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी में गृह युद्ध को भड़काने के लिए अल-कायदा और हक्कानी नेटवर्क को सक्रिय कर दिया। उनका कहना है कि तालिबानी पंजशीर घाटी में कब्जा नहीं जमा पा रहे थे, तो उनकी मदद के लिए उन्हें अल-कायदा और हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तानी सैन्य उपकरणों के साथ सक्रिय करना पड़ा। वह बताते हैं कि इस वक्त के ताजा हालात जो पंजशीर घाटी में बने हैं वह सिर्फ पाकिस्तान के सैन्य उपकरणों की वजह से ही बने हुए हैं।
पाकिस्तान ने तालिबानियों के साथ सैन्य मदद का भरोसा देकर एक तरह से अहसान भी जताया और अपने आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क और अलकायदा को सक्रिय भी कर दिया। क्योंकि हक्कानी नेटवर्क और अलकायदा के बीच सब कुछ ठीक नहीं है, ऐसे में आईएसआई चीफ का सीधे तौर पर दखल देने का मतलब स्पष्ट है कि वह मध्यस्थता के लिए ही काबुल में बैठा है ताकि अफगानिस्तान में सिर्फ पाकिस्तान की ही चले।
विदेश मामलों के जानकारों का कहना है की पाकिस्तान को सैन्य उपकरणों की खरीद-फरोख्त के लिए अमेरिका को अच्छी खासी कीमत चुकानी पड़ती है। क्योंकि पाकिस्तान के पास वित्तीय व्यवस्थाएं ऐसी नहीं हैं कि अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा बड़ी मात्रा में अमेरिका, चीन या रूस से लगातार खरीद सके। ऐसे में पाकिस्तान की नजर अमेरिका के अफगानिस्तान में छूटे अरबों डॉलर के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के साथ-साथ भारी मात्रा में गोला-बारूद के जखीरे पर भी लगी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान में सीधे दखल देकर मुफ्त में मिलने वाले सैन्य उपकरण और गोला बारूद पर अपना एकाधिकार जमा लिया जाए। यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार के गृह मंत्री से लेकर उनके खुफिया विभाग के प्रमुख तक अफगानिस्तान में ऐसी ऐसी चालें चल रहे हैं, जिससे अफगानिस्तान में गृह युद्ध छिड़े और पूरी दुनिया के नक्शे से अफगानिस्तान का नामोनिशान तक मिट जाए।