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साक्षात्कार: 'अगर अस्पताल रेमडेसिवीर को बाहर से खरीदने के लिए बोले तो कर सकते हैं शिकायत, मेडिकल स्टोर पर बिक्री गैर-कानूनी'

Tue, 20 Apr 2021 06:50 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 20 Apr 2021 06:50 PM IST
सार

रेमडेसिविर इंजेक्शन पर शोध करने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंप्लीमेंटेशन रिसर्च ऑन नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के निदेशक डॉ अरुण शर्मा ने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत में कहा यह इंजेक्शन हर मरीज के लिए नहीं है। इसके अलावा इस इंजेक्शन को खुले बाजार में भी नहीं बेचा जा सकता है...

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Expert says, Remdesivir injection is not for every patient, hospitals can not ask patients to buy from open market to cure coronavirus
रेमेडिसविर इंजेक्शन के विशेषज्ञ डॉ अरुण शर्मा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पिछले साल मई में जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में जब एचआईवी के मरीजों को दी जाने वाली एंटी-वायरल दवा रेमडेसिवीर इटली के मरीजों को दी गई तो इसका अंदाजा नहीं था कि यह दवा कारगर होगी या नहीं। हालांकि उस वक्त इस दवा से इटली के मरीजों को राहत मिली और वह ठीक होकर वापस अपने मुल्क लौट गए। और इसी के साथ पूरे देश में इस दवा को मरीजों को दिए जाने का ट्रायल शुरू हो गया।

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यह दवा हर कोविड के मरीजों में कारगर है या नहीं इसकी जानकारी के बगैर पूरे देश के छोटे-छोटे अस्पतालों से लेकर बड़े-बड़े चिकित्सा संस्थानों में दवा की सिफारिश की जाने लगी। नतीजा यह हुआ कि देश में दवा की किल्लत हो गई। यही वजह रही कि पिछले साल तक हर महीने 35 लाख इंजेक्शन का उत्पादन करने वाली दवा कंपनियां हाथ खड़े कर चुकी हैं और एक इंजेक्शन जिसकी कीमत एक हजार रुपये थी अब उसकी कालाबाजारी हो रही है और 40-50 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं।
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रेमडेसिविर इंजेक्शन पर शोध करने वाले जोधपुर के चिकित्सा संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंप्लीमेंटेशन रिसर्च ऑन नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के निदेशक डॉ अरुण शर्मा ने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत में कहा यह इंजेक्शन हर मरीज के लिए नहीं है। इसके अलावा इस इंजेक्शन को खुले बाजार में भी नहीं बेचा जा सकता है। यानी अगर यह इंजेक्शन किसी दवा की दुकान पर मिल रहा है तो वह पूर्णतया गैरकानूनी है। ऐसे में कुछ जरूरी सवालों के जवाब हर कोई जानना चाहता है।

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सवााल: क्या सभी कोरोना संक्रमित मरीजों को रेमडेसिवीर की जरूरत होती है?

नहीं, कोरोना से संक्रमित सभी मरीजों को एंटी-वायरल रेमडेसिवीर इंजेक्शन की जरूरत नहीं होती है, अधिकांश जगह देखा गया है कि मरीज कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट आते ही रेमडेसिवीर और ऑक्सीजन ढूंढने लगते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। कोरोना के लक्षण आने के बाद भी यदि आपको अन्य किसी तरह की कोई गंभीर बीमारी नहीं है तो अस्पताल में भर्ती भी होने की जरूरत नहीं है।

चिकित्सक की सलाह पर ही रेमडेसिवीर इंजेक्शन का प्रयोग किया जाना चाहिए। इंजेक्शन को लेकर अभी तक किए गए क्लीनिकल ट्रायल में यह देखा गया कि इंजेक्शन संक्रमण को बढ़ने से रोकता है। इस पर अभी प्रयोगात्मक अध्ययन किए जा रहे हैं, और इंजेक्शन का प्रयोग केवल अस्पतालों में इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन के तहत ही किया जा सकता है।

सवाल: किस हालात में किन मरीजों को इसे दिया जाता है?

कोरोना के अति गंभीर मरीज जिन्हें आरटीपीसीआर के अतिरिक्त सीटी चेस्ट में भी कोरोना पॉजिटिव देखा गया है या ऐसे मरीज जिनका सप्ताह भर से बुखार कम नहीं हुआ है या फिर ऐसे मरीज जिन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है, ऐसे मरीजों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन अस्पताल या इलाज करने वाले चिकित्सक द्वारा ही दिया जाता है।

सवाल: यदि कोई चिकित्सक मरीज से दवा बाहर से लाने के लिए कहता है तो क्या उसे इसका अधिकार है?

भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकाल के अनुसार रेमडेसिवीर रिटेल शॉप पर नहीं बेचा जा सकता। सीमित इस्तेमाल के तहत अस्पतालों में ही इसके आपातकालीन प्रयोग की अनुमति दी जाती है, यदि कोई अस्पताल या चिकित्सक इसे मरीज से बाहर से खरीदने के लिए दबाव बनाता है तो इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन कहा जा जाएगा। इस समय पूरे देश में महामारी एक्ट लागू है, मरीज इसकी शिकायत जिला प्रशासन या फिर आपदा प्रबंधन समिति से कर सकता है। उक्त अस्पताल के खिलाफ महामारी एक्ट में कार्रवाई की जा सकती है।  

रेमडेसिवीर को मरीज बिना चिकित्सक की सलाह पर घर पर भी प्रयोग नहीं कर सकते और न ही इसे चिकित्सक मरीज को घर पर लेने का परामर्श दे सकते है। कोविड प्रबंधन के सभी उपायों में रेमडेसिवीर की बहुत कम भूमिका है, बावजूद इसके गंभीर मरीजों के लिए इसकी मांग बढ़ी है, जिसे देखते हुए सरकार ने रेमडेसिवीर का मूल्य आधा करने के साथ ही एनपीपीए (नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी) से इसके बेवजह प्रयोग को नियंत्रित करने की भी बात कही है।

सवाल: दवा यदि अस्पताल में ही उपलब्ध कराने का प्रावधान है तो खुली बिक्री क्यों हो रही है?

खुदरा या रिटेल शॉप पर इस इंजेक्शन की बिक्री नहीं हो सकती, सीमित प्रयोग उत्पाद श्रेणी के तहत इसकी केवल अस्पतालों में आपूर्ति की जाती है। यदि खुदरा दवा कारोबारी इसे खुले बाजार में बेच रहे हैं तो यह गलत है।

सवाल: पहले रेमडेसिवीर देशभर में केवल सात उत्पादन केंद्रों पर बनाई जाती थी, बढ़ती मांग को देखते हुए अब क्या व्यवस्था है?

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के साथ हाल में हुई बैठक में रेमडेसिवीर के निर्यात पर रोक लगा दी गई है। पहले इंजेक्शन का उत्पादन सात प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनियों की साइट पर किया जाता था, जिससे रेमडेसिवीर के प्रतिमाह 38 लाख वायल का उत्पादन होता था। छह अतिरिक्त साइट्स पर इंजेक्शन का उत्पादन होने के बाद अब भारत में हर महीने 78 लाख वायल तैयार किए जा सकेंगे, घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इंजेक्शन के निर्यात को रोकने का भी अहम फैसला लिया गया है। रेमडेसिवीर का मूल्य अब अधिकतम पांच हजार और न्यूनतम 899 रुपये कर दिया गया है।

सवाल: देश में कई जगह रेमडेसिवीर को चार गुना अधिक दामों पर बेचा जा रहा है, ऐसा करने पर क्या किसी सजा या कार्रवाई का भी प्रावधान है?

जरूरी दवाओं के स्टॉक को इकट्ठा करना या निर्धारित दाम से अधिक बेचना, या दवा होने पर भी नहीं देना, बेवजह मरीजों से दवा रिटेल से लाने पर जोर देना आदि महामारी एक्ट में दंडनीय हैं। ऐसा करने पर दवा विक्रेता का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। लेकिन ऐसे अधिकांश मामलों में मरीज खुद शिकायत नहीं करते या फिर जो शिकायतें आती हैं उनमें पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल पाते, जिससे आसानी से रिटेल या खुदरा दवा विक्रेता बच निकलते हैं।

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