दुनिया को 'क्रिकेट' फील्ड समझ बैठे इमरान: 'भुट्टो' बनने के चक्कर में मजाक बन गए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
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विस्तार
पाकिस्तान में इमरान खान खुद अपने बुने जाल में फंस गए हैं। वे दुनिया को क्रिकेट फील्ड का एक्सटेंशन समझ बैठे। पीएम इमरान खान, पाक फौज को 'जानवर' तो अमेरिका को 'साजिशकर्ता' बताकर, जो सियासती शहादत हासिल करना चाहते थे, वह उन्हें नहीं मिल सकी। वे 'भुट्टो' बनना चाहते थे, लेकिन नहीं बन सके। इतिहास अपने आप को दोहराता है, लेकिन इमरान को याद रखना चाहिए कि वह इतिहास पहली बार एक त्रासदी की तरह, मगर दूसरी बार एक मजाक की तरह दोहराया गया है। इमरान खान, मजाक बन चुके हैं। विदेशी संबंधों के जानकार, रक्षा विशेषज्ञ और 'ओआरएफ' के सीनियर फेलो सुशांत सरीन ने आगे कहा, इमरान ने एक नहीं, कई गलतियां की हैं। अपनों का भरोसा टूटा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में फजीहत हुई तो मुश्किल घड़ी में पाकिस्तानी 'फौज' भी इमरान के लिए तटस्थ बन गई।
सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख रहे हैं विपक्षी दल
पाकिस्तान में सियासत का महासंग्राम जारी है। इमरान खान और विपक्षी दल एक दूसरे पर हमलावर हैं। नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव खारिज करने और सदन को भंग करने के फैसले के खिलाफ विपक्षी पार्टियां सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। मामले की सुनवाई चल रही है। बुधवार को कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई गुरुवार को जारी रहेगी। मौजूदा घटनाक्रम पर इस्लामाबाद में विपक्षी दलों की बैठक हो रही है। जानकारों का कहना है, 27 मार्च को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी की बैठक में प्रधानमंत्री इमरान खान के उन दावों को सही नहीं माना गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका उनकी सरकार को हटाने की साजिश में शामिल है।
दरबारियों के चक्कर में आए 'खान'
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तानी के प्रधानमंत्री को अच्छे सुझाव नहीं मिले थे, उन्हें कई लोगों ने कहा था कि वे इस्तीफा दे दें। इमरान खान, इस पर कुछ सोच विचार करते, इससे पहले उनके दरबारियों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए उकसा दिया। सत्ता के दौरान अपने सहयोगियों को भी नहीं बख्शने वाले इमरान उनके बहकावे में आ गए। दरबारियों ने कहा, आप तो कप्तान हैं। आप आखिरी बॉल पर जीतने का दम रखते हैं। आप इस्तीफा न दें। भले ही असेंबली में नंबर गेम उनके खिलाफ था। सीनियर फेलो सुशांत सरीन ने एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा, भारत के पीएम को गाली देने और कूटनीति की सारी सीमाएं लांघ चुके इमरान खान के लिए इस सियासती मुश्किल से बाहर निकलना आसान नहीं है। अगर वे निकल जाते हैं तो भी उनके सिर पर कांटों का ताज रहेगा। वैसे मौजूदा सियासी दौर में उनका बचाव दिख नहीं रहा।
खान ने खुद ही विपक्ष को कर दिया था एकजुट
इमरान खान के प्रति विपक्ष के लोगों में गहरी नाराजगी देखी गई है। वे अहंकार में सरकार चलाते रहे। प्रशासनिक मोर्चे पर भी विफल रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल में छह या सात वित्त सचिव बदल डाले थे। सात या आठ दफा फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के शीर्ष अधिकारी बदल दिए गए। पंजाब प्रांत में छह सात आईजी, जो कि हमारे देश के डीजी के बराबर है, बदल दिए थे। चार पांच माह में चीफ सेक्रेटरी का तबादला हो जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर केस दर्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया था।
आर्थिक मोर्चे पर पाक की ईंट से ईंट बजा दी
सुशांत सरीन के अनुसार, इमरान खान ने आर्थिक मोर्चे पर पाक की ईंट से ईंट बजा दी। उन्हें अर्थव्यवस्था की जानकारी नहीं थी। इमरान खान ने अपनी टीम में उन लोगों को रखा, जिन्हें विशेषज्ञता हासिल नहीं थी। अधिकांश लोग बिजनेस मैन थे। विदेश नीति की असफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सत्ता में आने के पहले माह में ही रजाक दाउद ने सीपैक पर बयान दे दिया था। उन्होंने कहा था, हम इसे गो स्लो करेंगे। इसका परिणाम यह हुआ कि चीन खफा हो गया। वे पश्चिम देशों को अपनी बयानबाजी से नाराज करते रहे। दुनिया में इस्लामिक देशों का संगठन बनाने के चक्कर में उन्होंने अपने कई मित्र देशों को खो दिया। फौज की राजनीति करने लगे। उनके गलत कार्यों में शामिल आईएसआई चीफ का जब तबादला हुआ तो वे परेशान हो उठे। उन्होंने फौज की राजनीति करनी शुरू कर दी। पिछले अक्तूबर में पाकिस्तानी फौज का समर्थन और सहयोग इमरान खान के साथ नहीं रहा। इससे विपक्ष को मौका मिल गया, उन्होंने इमरान खान पर निशाना लगा दिया।
फौज ही सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी और सबसे बड़ा बिजनेस हाउस है
बतौर सुशांत सरीन, पाकिस्तान में फौज ही सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी और सबसे बड़ा बिजनेस हाउस है। अगर संसद में किसी पार्टी का दो तिहाई बहुमत है तो उसके पांच साल चलने की कोई गारंटी नहीं है, यदि सेना उसके साथ नहीं है। सत्ताधारी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, लेकिन उसके पास फौज का समर्थन है तो वह पांच साल सत्ता में रह सकता है। यही पाकिस्तान की सच्चाई है। इस बार फौज ने सीधे तौर पर इमरान खान को कुछ नहीं कहा, लेकिन वह उनकी बैसाखी भी नहीं बनी। एक लिहाज से फौज, सरकार के खिलाफ काम कर रही है। जब देखा कि खड़े होने के लिए इमरान खान के पांव नहीं हैं तो सेना तटस्थ हो गई। इमरान की शब्दावली को देखें, उन्होंने फौज को जानवर कह दिया था। खान ने बयान दिया कि जानवर तो तटस्थ होता है। मौके पर फौज ने भी दिखा दिया कि वह जानवर है तो उसे जानवर ही रहने दिया जाए। सेना, तटस्थ होती चली गई। सेना ने कहा, इमरान खान को अस्थिर करने में अमेरिका का हाथ है, इसका सबूत नहीं है।
अमेरिका का नाम लेकर ड्रामा कर दिया
इमरान खान ने खुद को शहीद दिखाने का ड्रामा किया। उन्होंने कहा, मैं पश्चिम देशों के खिलाफ खड़ा हो गया हूं। इस्लाम का झंडा बुलंद कर रहा हूं, इसलिए सब मेरे खिलाफ मिल गए हैं। सुशांत सरीन के मुताबिक, वह पत्र, जिसकी आड़ में इमरान, अमेरिका पर यह आरोप लगा रहे हैं कि उसने उनकी सरकार को गिराने का प्रयास किया है। वे कहने लगे कि वह पत्र तो अमेरिका या किसी पश्चिमी देश के व्यक्ति ने लिखा है। बाद में यह सच्चाई भी सामने आ गई। पता चला है कि पाकिस्तान के राजनयिक ने अमेरिकी राजनयिक से बातचीत की थी। राजनयिक ने बैठक का ब्यौरा अपने हेडक्वार्टर को रिपोर्ट किया था। उसमें कई बातें थीं। इमरान खान, भारत के साथ ठीक संबंध नहीं रखता। कई दूसरी बातें भी लिखी गई। उनका भाव था कि जब तक 'ये' इमरान खान हैं, दोनों देशों के संबंध ठीक नहीं होंगे। अमेरिकी अधिकारी ने कहा, अगर वे अविश्वास प्रस्ताव में बच जाते हैं तो हमारा साथ चलना मुश्किल है। रिश्ते खराब होंगे तो उसके परिणाम भी आएंगे। ये धमकी नहीं है। पत्र में मौजूदा स्थिति और आपसी संबंधों की जानकारी दी गई थी। इमरान खान ने इस पत्र को सार्वजनिक कर खुद को शहीद कहलवाने की साजिश रची थी। वे भुट्टो बनना चाहते थे। इतिहास अपने आप को दोहराता है।
पहली बार एक त्रासदी की तरह, लेकिन दूसरी बार एक मजाक की तरह। इमरान खान, अब एक मजाक बन गए हैं।