कोरोना से जंग: विश्व युद्ध जैसे हालात में 'जुगाड़' से मिलेगी 'ऑक्सीजन', केंद्र को लेना होगा राज्यों और विपक्ष का साथ
'पिछली अक्तूबर में केंद्र ने राज्यों के सरकारी अस्पतालों में 162 पीएसए प्लांट लगाने के लिए कहा था। इस पर दो सौ करोड़ रुपये खर्च होने थे। इन प्लांट की मदद से प्रति मिनट 80,500 लीटर ऑक्सीजन मिल सकती थी। अभी तक 33 प्लांट ही लग सके हैं।'
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कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अपने-अपने तरीके से आगे बढ़ रही हैं। आईबी के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एवं कैबिनेट सचिवालय में सेक्रेटरी 'सिक्योरिटी' के पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद का कहना है कि आज देश में विश्व युद्ध जैसी स्थिति है। मानवता का अच्छा और बुरा, दोनों रूप दिखाई पड़ रहा है। केंद्र और राज्यों के अलग सुर हैं, लेकिन इस आपदा में तो केवल लोगों को बचाने की सोचें, जहां से भी जिस किसी 'जुगाड़' से बस 'ऑक्सीजन' मिलनी चाहिए।
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी श्रीकुमार कहते हैं, यही वो समय है जब केंद्र सरकार को सभी राज्यों एवं विपक्षी दलों के साथ चर्चा करनी चाहिए। दस साल तक प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह और मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी आमने-सामने क्यों नहीं बैठ रहे। डॉ. सिंह के पास आखिर कौन से अनुभव की कमी है। पीएम मोदी ज्यादातर अपने सलाहकारों से ही बात कर रहे हैं।
केंद्र और राज्यों के बीच शुरू से ही खटपट होती रही है
इस वैश्विक महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच शुरू से ही खटपट होती रही है। विपक्ष भी लगातार इस मुद्दे को उठाता रहा है। पिछले साल जब लॉकडाउन लगाया गया तो विपक्ष ने सरकार की यह कहकर खासी आलोचना की थी कि पीएम मोदी सारे फैसले अपनी मनमर्जी से ले रहे हैं। उन्हें राज्यों की कोई चिंता नहीं है। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी राज्यों की उपेक्षा करने जैसा आरोप प्रधानमंत्री मोदी पर लगा चुकी है। इस बार केंद्र सरकार ने कह दिया कि लॉकडाउन जैसा कठोर फैसला राज्य सरकारें अपने स्तर पर ही लें।
आयरलैंड ने कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए भारत को 700 ऑक्सीजन संकेंद्रक और अन्य चिकित्सा सामग्री भेजने की घोषणा कर दी है। बैंकॉक, सिंगापुर, दुबई व यूएई से हवाई मार्ग के जरिए कंटेनर लाए जा रहे हैं। डीआरडीओ भी 500 ऑक्सीजन प्लांट लगाएगा। इसके लिए पीएम केयर फंड से राशि जारी करने की बात कही गई है।
नौकरशाहों को नहीं था भयावहता का अंदाजा
पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद के अनुसार, अभी केंद्र और राज्यों की कहासुनी का वक्त नहीं है। अभी तो हमें केवल यह देखना है कि ऑक्सीजन कहां से मिलेगी। ओडिसा, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे राज्य अपने दम पर कोरोना से लड़ रहे हैं। हालांकि कुछ ऐसे मामले भी हैं, जहां केंद्र और राज्य, दोनों से चूक हुई है। क्या केंद्र के नौकरशाह यह बात नहीं जानते थे कि कोरोना की दूसरी लहर सिर पर है। ऑक्सीजन की बहुत ज्यादा जरुरत पड़ेगी। पिछले सात आठ माह में क्यों नहीं ऑक्सीजन के प्लांट लगाए गए।
पिछली अक्तूबर में केंद्र ने राज्यों के सरकारी अस्पतालों में 162 पीएसए प्लांट लगाने के लिए कहा था। इस पर दो सौ करोड़ रुपये खर्च होने थे। इन प्लांट की मदद से प्रति मिनट 80,500 लीटर ऑक्सीजन मिल सकती थी। अभी तक 33 प्लांट ही लग सके हैं। बतौर यशोवर्धन आजाद, इसके लिए कौन दोषी है। बहुत से प्राइवेट अस्पतालों को प्लांट लगाने के लिए कहा गया, लेकिन सभी ने राय नहीं मानी। किसी ने गंदगी फैलाने का बहाना लगाया तो कोई बोला, हमारे पास जगह का अभाव है।
कोरोना को राष्ट्रीय आपदा मानकर केंद्र संभाले कमान
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी. श्रीकुमार बताते हैं कि ये खुद को छोटा बड़ा साबित करने का समय नहीं है। डॉ. मनमोहन सिंह और पीएम मोदी के बीच बैठक होनी चाहिए। डॉ. सिंह के पास लंबा अनुभव है। वे तो वित्त मंत्री भी रहे हैं। कोरोना संक्रमण को राष्ट्रीय आपदा मानकर केंद्र कमान संभाले। संविधान में केंद्र व राज्यों के दायरे और अधिकारों के बारे में लिखा है। संघवाद अपनी जगह बिल्कुल ठीक है, लेकिन अब केंद्र को आगे चलना चाहिए। केंद्र, सभी राज्यों के साथ खुला संवाद करे। इसके बाद यह तय हो कि किसे कहां से और कितनी मदद मिलेगी।
जैसे जीएसटी का मामला ही ले लें। आपदा के समय में केंद्र को जीएसटी का पूरा हिस्सा देना चाहिए। पीएम केयर फंड में सरकारी कर्मियों से लेकर प्राइवेट संस्थानों ने पैसा दिया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि वह पैसा कहां खर्च हो रहा है। वित्त मंत्री ने कह दिया कि हमने 35 हजार करोड़ रुपया दे दिया है। उन्होंने यह नहीं बताया कि किस राज्य को या कौन सी योजना में वह पैसा लगा है। उसका कितने लोगों को फायदा हुआ है। वैक्सीन बनाने की जिम्मेदारी देने से पहले राज्यों से बात करनी चाहिए थी। दो प्राइवेट कंपनियों को वैक्सीन बनाने का ठेका दे दिया, जबकि आईडीपीएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को पूछा तक नहीं। सरकार को आपदा के समय पब्लिक सेक्टर की कंपनियों को प्रोत्साहन देना चाहिए। सार्वजनिक क्षेत्र की अनेक कंपनियों एवं दूसरे संस्थानों ने कोरोना की जंग में अपना अभूतपूर्व सहयोग दिया है।
ऑक्सीजन: सुप्रीम कोर्ट ने पुराने प्लांट को चालू कराया
देश के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन की किल्लत हो रही है। इस बाबत वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट से तूतीकोरिन स्थित अपने स्टरलाइट कॉपर यूनिट को खोलने की मंजूरी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित प्लांट में ऑक्सीजन बनाने की मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्टरलाइट में सिर्फ ऑक्सीजन प्लांट को ही शुरू करने की मंजूरी दी गई है।
सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि वेदांता जो भी ऑक्सीजन बनाएगा, उसे लेकर कोई भी राजनीतिक कहा-सुनी नहीं होनी चाहिए। इस मामले में तमिलनाडु सरकार को तूतीकोरिन में वेदांता के ऑक्सीजन प्लांट में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक पैनल बनाने का निर्देश दिया है। इस पैनल में तूतीकोरिन के एसपी और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर शामिल होंगे। बता दें कि इस प्लांट में प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं को लेकर मई 2018 से ताला लगा हुआ है। महाराष्ट्र 25,000 टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) आयात करने की योजना बना रहा है।