नौकरी के लिए इंजीनियरिंग के छात्रों को देना पड़ सकता है एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट
वह दिन दूर नहीं जब इंजीनियरिंग के छात्रों को फाइनल ईयर में एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट से गुजरना पड़े। इसमें सरकार और गैरसरकारी दोनों की कॉलेजों के छात्र शामिल होंगे। इसी परीक्षा के अंक निर्धारित करेंगे की छात्र को कैसी नौकरी मिलेगी।
सरकार एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट यानि गेट के अंक नियोक्ताओं के साथ साझा करने का मन बना रही है।
सरकार हर वर्ष इतनी ज्यादा तादात में इंजीनियरिंग छात्रों के पास होने से चिंतित है। गौरतलब है कि सरकार को रिपोर्ट मिली थी कि पास होने वाले छात्रों का स्तर उस लायक नहीं है जैसा होना चाहिए।
हर वर्ष सात लाख छात्र होते हैं पास
हर वर्ष लगभग सात लाख छात्र देशभर के तीन हजार संस्थानों से पास होकर निकलते हैं। हालांकि आंकड़ों के अनुसार केवल 20 से 30 फीसदी छात्र ही अच्छी नौकरी पाते हैं। शिक्षा का गिरता स्तर भी नौकरियों में कमी आने का एक कारण माना जा रहा है।
इसी को कम करने के लिए सरकार एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट करवाने का मन बना रही है। वह इस परीक्षा को इसलिए करा रही है कि ताकि छात्रों का 'अटेनमेंट लेवल' जांचा जा सके। एचआरडी मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार इस टेस्ट से ये जानना चाहती है कि छात्रों में खाली किताबी ज्ञान ही न हो बल्कि उनका स्किल,एप्टीट्यूड और सोच भी सही हो।
साथ ही इस टेस्ट से ये भी साफ हो जाएगा की जिस संस्थान से छात्र आ रहा है वहां का शिक्षा स्तर कैसा है। इस परीक्षा पर अगले हफ्ते होने वाली एआईसीटीई की परीक्षा में लिया जा सकता है।