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एक्सक्लूसिव: 120 मीटर तक भारतीय सीमा में घुस आए थे पाक रेंजर्स और बैट दस्ते, निहत्थे थे बीएसएफ जवान

Fri, 21 Sep 2018 06:58 AM IST
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Sep 2018 06:58 AM IST
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EXCLUSIVE: Pak Rangers and BAT Squads had penetrated into Indian territory for 120 meters

बीएसएफ के हवलदार नरेंद्र सिंह को अगवा करने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स और उनके साथ मौजूद आतंकी दस्ता, जिसे बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) कहा जाता है, ये दोनों अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से भारतीय सीमा में करीब 120 मीटर अंदर तक घुस आए थे। प्लानिंग के तहत पाक रेंजर्स ने पहले कवर फायर दिया और उसी दौरान बैट दस्ते ने बीएसएफ के हवलदार को अगवा कर लिया। इसके बाद वे लोग आसानी से पाक सीमा में चले गए। यहां पर सनसनीखेज खुलासे वाली बात यह है कि इतना कुछ होने पर भी बीएसएफ की तरफ से हुई फायरिंग में किसी भी रेंजर या बैट आतंकी को खरोंच तक नहीं आई। अधिकारिक सूत्रों ने यह भी बताया है कि हमले के दौरान बीएसएफ के आठ जवान, जिन्हें सरकंडा उखाड़ने के लिए भेजा गया था, वे सब निहत्थे थे। उनकी सुरक्षा के लिए केवल दो गार्ड तैनात थे। दूसरी ओर, बीएसएफ के डीजी केके शर्मा बुधवार शाम को विज्ञान भवन में आरएसएस के कार्यक्रम में तालियां बजा रहे थे।

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बीएसएफ के कैमरे, सर्विलांस उपकरण और पोस्ट पर सवालिया निशान, किसी को नहीं दिखे पाक रेंजर्स

जम्मू के रामगढ़ सेक्टर की गंदियाल पोस्ट के निकट मंगलवार सुबह दस बजे यह हमला हुआ था। वहां पर बीएसएफ के मैनुअल कैमरे लगे थे, कुछ दूसरे तकनीकी सर्विलांस उपकरण थे और पोस्ट संतरी भी तैनात था। हैरानी की बात यह है कि जब इतना कुछ था तो पाक रेंजर्स और बैट दस्ता किसी को भी दिखाई नहीं दिया। वे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर (आईबी) से भारतीय सीमा में आए और बीएसएफ जवान को अगवा कर ले गए। लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में इंडो-पाक बॉर्डर पर तैनात रहे बीएसएफ के एक अधिकारी का साफ तौर पर कहना है कि यह हमारी लापरवाही का नतीजा है। हम दुश्मन को कमजोर क्यों समझने लगते हैं। दूसरा, आठ जवानों के हाथ में कोई भी हथियार नहीं था। उनकी सुरक्षा के लिए मात्र दो गार्ड थे। वे दर्जनों रेंजर्स और बैट दस्ते का मुकाबला कैसे कर सकते हैं। सवाल यह भी उठता है कि जवानों को सरकंडा उखाड़ने के लिए क्यों लगाया गया था। नियमानुसार, यह उनका काम नहीं था।

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EXCLUSIVE: Pak Rangers and BAT Squads had penetrated into Indian territory for 120 meters

पाक रेंजर्स को सूचना देकर बीएसएफ वाले निश्चिंत हो गए कि अब कोई चिंता नहीं

बीएसएफ का दावा है कि उन्होंने सरकंडा उखाड़ने की सूचना पाक रेंजर्स को दे दी थी। महज इससे बीएसएफ वाले निश्चिंत हो गए कि अब चिंता की कोई बात नहीं है। पाक की ओर से कोई फायरिंग नहीं होगी। यह सोचकर निहत्थे जवानों को इंडो-पाक सीमा पर भेज दिया गया। करीब साढ़े दस बजे पाकिस्तान की 22 चेनाब रेंजर्स शोकट पोस्ट से जब बीएसएफ जवानों पर फायरिंग होने लगी तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। पहले राउंड में शोकट पोस्ट से गोलियों की बौछार हुई और उसके बाद रेंजर्स व बैट दस्ते आईबी पार कर भारतीय सीमा में दौड़ने लगे। तब तक फायरिंग चलती रही। जिन जवानों को सरकंडा उखाड़ने के लिए लगाया गया थ, वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप गए। दो गार्ड, जिनके पास हथियार थे, वे भी कहीं से छिप-छिप कर फायर करते रहे। चूंकि इस अवस्था में सभी जवान अलग-थलग पड़ गए थे और इसी वजह से पाक रेंजर्स के हाथ हवलदार नरेंद्र सिंह लग गया। यहां पर भी एक सवाल खड़ा होता है कि पाक रेंजर्स व बैट दस्ता हवलदार को जब ले जा रहा था तो भारतीय सीमा की ओर से उन पर कोई फ़ायरिंग नहीं हुई।वे अपनी सीमा में हवलदार को ले गए और उसे मारकर उसकी देह को क्षत-विक्षत कर दिया।इसके बाद वे नरेंद्र के शव को बॉर्डर पर फेंक कर चले गए।उस वक्त तक बीएसएफ सचेत हो चुकी थी, सर्च आॅपरेशन चल रहा था।इसके बाद भी किसी को भनक नहीं लगी कि कब और कैसे नरेंद का शव बॉर्डर पर फेंका दिया गया।
 

EXCLUSIVE: Pak Rangers and BAT Squads had penetrated into Indian territory for 120 meters

पाक सेना, आईएसआई और लश्कर के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है बैट

एलओसी पर पाकिस्तान की ओर से बॉर्डर एक्शन टीम की गतिविधियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं। पाक सेना, आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर द्वारा बैट दस्ता तैयार किया जाता है। इन्हें सिरफिर कमांडो भी कहते हैं। एक बैट दस्ते में पांच-छह कमांडो होते हैं। इन्हें सेना के कमांडो जैसी ट्रेनिंग मिलती है। बैट दस्ते को जो टारगेट मिलता है, उसे पूरा करने के लिए वे महीनों तक इंतजार करते हैं। खराब मौसम हो या फिर कोई अन्य विपरित परिस्थिति, ये हर सूरत में अपना टारगेट पूरा करते हैं। जब भी बीएसएफ या सेना का कोई जवान अपनी पोस्ट या गश्ती दल से इधर-उधर होता है तो ये उसे अपना निशाना बना लेते हैं। कई बार भारतीय जवान पीने का पानी लाने, नहाने के लिए जाने या कभी ऐसी स्थिति बनती है कि समूह में से कोई जवान थोड़ा दूर हो जाता है तो बैट उस पर फायरिंग कर देती है। बैट के सदस्यों को एक साल में चार-पांच बड़े टारगेट मिलते हैं। इनके पास एके-47, 9.9 एमएम की पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और खुखरी होती है। अगर ये भारतीय जवानों के हाथ मारे जाते हैं तो इन्हें पाकिस्तान में शहीद का दर्जा मिलता है और साथ में इनके परिजनों को 10-12 लाख रुपये की तय राशि का भुगतान भी किया जाता है।

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