खास बातचीत: जस्टिस बोबडे ने कहा- उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की जरूरत नहीं
- अगले प्रधान न्यायाधीश से खास बातचीत
- कॉलेजियम, अयोध्या सहित कई मुद्दों पर साझा किए विचार
- आम लोगों को संदेश- न्यायपालिका पर भरोसा रखें
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विस्तार
देश के अगले प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे का कहना है कि उच्च न्यायपालिका में अब तक आरक्षण की जरूरत ही नहीं महसूस हुई। अभी इसका वक्त नहीं आया है। उन्होंने कहा, आम लोगों को न्यायपालिका पर भरोसा रखना चाहिए।
उन्होंने स्वीकार किया, आम आदमी की पहुंच सुप्रीम कोर्ट तक नहीं है। वजह चाहे वकीलों की फीस हो या कोई अन्य कारण, लेकिन यह सच्चाई है। जहां तक वकीलों की फीस का सवाल है, यह मसला बार काउंसिल के समक्ष उठाया जाना चाहिए।
18 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश पद ग्रहण करने जा रहे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने ‘अमर उजाला’ से कई मुद्दों पर खुलकर बात की। सांविधानिक संस्थाओं को सरकार द्वारा नियंत्रित करने के विपक्ष के आरोपं पर जस्टिस बोबडे ने कहा, मैं आरोपों-प्रत्यारोपों में नहीं जाना चाहता। सुनवाई के सीधे प्रसारण पर उन्होंने ने कहा, इस महत्वपूर्ण मसले पर कमेटी काम कर रही है।
क्या सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जरूरी है?
सुप्रीम कोर्ट पूरे देश का है। देश बहुत बड़ा और विविधताओं से भरा है। लिहाजा क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व होना चाहिए। हालांकि इससे प्रतिभा के दरकिनार होने से मैं सहमत नहीं हूं।
क्या अयोध्या मामले की सुनवाई में जानबूझ कर देरी हुई?
यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। मुझे गर्व है कि मैं उस पीठ का हिस्सा हूं जो इसका फैसला देगी। जहां तक सवाल नौ वर्ष केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहने का है तो, सबसे बड़ी वजह दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद न होना था। सुनवाई टालने का आरोप बेबुनियाद है। मुझे नहीं मालूम कि ऐसे किसी विवाद पर किसी कोर्ट ने सुनवाई की हो।
कॉलेजियम की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे, अभी क्या स्थिति है?
पर्याप्त पारदर्शिता है। सब एनजेएसी के फैसले के अनुरूप हो रहा है। मेरा मानना है कि जजों के बारे में नकारात्मक जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। अगर आप किसी नाम को शीर्ष कोर्ट के लिए संस्तुत नहीं करते तो उसको सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है।
आपका रोल मॉडल कौन हैं?
सौभाग्यशाली हूं मुझे पूर्व सीजेआई आरएम लोढ़ा, जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण और जस्टिस सीके ठक्कर के साथ बैठने का मौका मिला।
जस्टिस बोबडे बोले, इंसाफ देने में हो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल
देश के आगामी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने बृहस्पतिवार को न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) समेत उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल किए जाने की वकालत की है।
उन्होंने कहा, फिलहाल इंसाफ देने की मौजूदा प्रक्रिया अच्छी है, मगर इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसी तकनीक का इस्तेमाल करने समेत कुछ मामूली बदलाव किए जाने की भी जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा, न्याय प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कुछ सुधारों की जरूरत है। इसके लिए कुछ दीर्घकालिक और अल्पकालिक उपाय होते हैं। लंबी अवधि के सुधार के लिए स्टाफ को कानूनी शिक्षा दी जानी चाहिए और छोटी अवधि के लिए अच्छे कर्मचारियों समेत व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना चाहिए।
खाली पद भरना प्राथमिकता
जस्टिस बोबडे ने कहा, न्यायपालिका में कई कमियां हैं। खाली पद सबसे बड़ी परेशानी हैं। मेरा प्रयास होगा कि इनको जल्द से जल्द भरा जाए, जिससे लंबित मामलों में कमी आए। कई अन्य खामियां है, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
सबसे पहले मां को दी खुशखबरी
जस्टिस बोबडे ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश बनने की खबर मैंने सबसे पहले अपनी मां को दी और उनका आशीर्वाद लिया। बाइक चलाने के शौकीन जस्टिस बोबडे ने कहा, पहले मैं बुलेट चलाना पसंद करता था।