Exclusive: भाजपा सांसद राकेश सिंह बोले- पन्नी, छाता, तिरपाल और साड़ी से चुनाव नहीं जीता जाएगा
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
जबलपुर के सांसद और मध्यप्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह इस बार जबलपुर पश्चिम विधानसभा सीट से सियासी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। जबलपुर की यह विधानसभा सीट पिछले दो चुनावों से भाजपा लगातार हारती रही है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस बार जबलपुर से चार बार के सांसद और कद्दावर नेता राकेश सिंह को सियासी मैदान में उतार दिया है। राकेश सिंह कहते हैं कि भले ही जबलपुर पश्चिम में भारतीय जनता पार्टी विधानसभा का चुनाव हार गई हो, लेकिन लोकसभा के चुनाव में वह यह विधानसभा जीतते आए हैं। इसलिए इस विधानसभा चुनाव में यह सीट भारतीय जनता पार्टी के विकास के मुद्दों के चलते भाजपा की झोली में आने वाली है। विपक्षी पार्टियों पर आरोप लगाते हुए वह कहते हैं कि पन्नी, छाता, तिरपाल और साड़ी से चुनाव नहीं जीता जाएगा। अमर उजाला डॉट कॉम के आशीष तिवारी से राकेश सिंह से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने पर खुलकर बातचीत की।
सवाल: पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं आप? कितना बदला बदला लग रहा है लोकसभा चुनावों से यह सब।
जवाब: देखिए चुनाव तो चुनाव होता है। वह चाहे विधानसभा का हो या लोकसभा का। यह जरूर है कि दोनों चुनावों के मुद्दे अलग होते हैं। लेकिन जीत उसी की होती है जिस पर जनता का आशीर्वाद होता है और मुझे जबलपुर की जनता का आशीर्वाद लगातार मिलता आ रहा है।
सवाल: लेकिन आप जिस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, वहां बीते दो चुनावों में भाजपा जीती नहीं है। यह तो बड़ी चुनौती होगी ही।
जवाब: बिल्कुल नहीं। यह चुनौती इसलिए नहीं है क्योंकि लोकसभा के चुनाव में मैं इसी विधानसभा को जीतता आया हूं। आप जबलपुर का जो भी विकास देखेंगे वह बतौर सांसद पार्टी और मेरे क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि रही है। और उसी विकास के मॉडल पर मैं जनता के बीच में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उतरा हूं।
सवाल: आप इतने साल से लगातार सांसद हैं। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। विधानसभा का चुनाव लड़ना कुछ सीमित दायरे जैसा तो नहीं आपके लिए लग रहा है।
जवाब: भूमिका तो बदलती है, लेकिन जिम्मेदारियां का बदलाव या अदला-बदली बिल्कुल नहीं होती है। और भूमिका तो पार्टी तय करती है। मुझे पार्टी ने लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए कहा तो मैं जनता के बीच चला गया। विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए कहा तो पार्टी के आदेश पर यहां चुनाव लड़ रहा हूं।
सवाल: जब टिकट घोषित हुए तो मध्यप्रदेश के वह चेहरे जो केंद्र में राजनीति करते थे, उन्हें विधानसभा चुनाव में उतार दिया गया। सियासत में भारतीय जनता पार्टी का इसको "प्रयोग" कहा गया। आपका और आपकी जनता का इसमें क्या रिएक्शन था।
जवाब: अभी तो 20 साल से जनता मुझे उसी भूमिका में देख रही है जिसमें मैं हूं। लेकिन मैंने कहा न की भारतीय जनता पार्टी के नेता से लेकर कार्यकर्ता तक पार्टी का ही फैसला मानते हैं, और उसके आधार पर आगे बढ़ते हैं। हां, एक बात मैं बता दूं, कांग्रेस में ऐसे निर्णय होते तो उनके लिए बड़ा संकट हो जाता है। हमारी पार्टी में संस्कृति ही ऐसी है कि नेतृत्व का निर्णय सर्वमान्य है।
सवाल: कांग्रेस का अपने जिक्र किया तो एक सवाल यह कि कांग्रेस कह रही है कि भारतीय जनता पार्टी के पास इस बार प्रत्याशी नहीं थे। तो अपने दिल्ली के नेताओं को मैदान में उतार दिया। आप कैसे देखते हैं इसको।
जवाब: अब कांग्रेस के पास जब कुछ नहीं होता है, तो ऐसे ही आरोप लगाते हैं। कांग्रेस में एक प्रत्याशी बदल जाए तो हंगामा हो जाता है। हमारी पार्टी में देखिए कितनी स्पष्ट व्यवस्था है कि सांसद और केंद्रीय मंत्री को भी विधानसभा का चुनाव लड़ा दिया जाता है। और यह सब विकास और जनता के लिए होता है। इसलिए कांग्रेस के इन दावों में न तो कोई दम है और ना उनके पास इस चुनाव में कोई मुद्दे है। वो वह बस अपना ऐसा ही राग अलाप रहे हैं।
सवाल: आप यह मानते हैं कि मंत्री से लेकर सांसद तक मध्य प्रदेश के सियासी मैदान में उतार दिए गए उसका भारतीय जनता पार्टी को बड़ा फायदा मिलने वाला है।
जवाब: देखिए मैं फिर कहता हूं हमारे यहां चेहरा नेतृत्व होता है। इस चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी के चेहरे हमारे नेतृत्व के वह लोग हैं, जो पार्टी के साथ देश और राज्य की दशा-दिशा तय कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के तमाम बड़े नेताओं समेत राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर अन्य सभी पदाधिकारी इसमें शामिल हैं।
सवाल: इस बार जबलपुर पश्चिम पर लगा भारतीय जनता पार्टी का दो विधानसभा चुनावों में न जीतने का ग्रहण हट जाएगा।
जवाब: बिल्कुल हट जाएगा। जनता ने मन बना लिया है कि विकास के आधार पर ही इस बार वोट डाले जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की योजनाओं के साथ-साथ मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचा है। इसलिए इस चुनाव में जीत पक्की है। जिन लोगों को यह लगता है कि यह चुनाव पन्नी, छाता, तिरपाल और साड़ी से जीता जाएगा, वो बहुत बड़ी भूल में हैं।