हरियाणा का हर चौथा, दिल्ली का प्रत्येक पांचवां व्यक्ति बेरोजगार, नौकरियों पर फिर मंडरा सकता है खतरा!
- राष्ट्रीय स्तर पर वर्तमान बेरोजगारी दर 7.93 फीसदी, शहरी क्षेत्र में 9.65 फीसदी, ग्रामीण क्षेत्र में 7.13 फीसदी
- दिल्ली में बेरोजगारी दर 20.3 फीसदी, हरियाणा में 24.5 फीसदी दर्ज हुई
- इसके बाद पुडुचेरी, हिमाचल, गोआ, राजस्थान और त्रिपुरा का नंबर
विस्तार
लॉकडाउन खुलने के बाद बेरोजगारी दर में तेज गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन यह एक बार फिर बढ़ती हुई दिखाई पड़ रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनोमी के मुताबिक इस समय देश में बेरोजगारी दर 7.93 फीसदी हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी ज्यादा है।
इस समय शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी दर 9.65 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 7.13 फीसदी हो गई है। शहरों में जुलाई माह के अंत तक बेरोजारी दर 10 फीसदी के करीब थी, जिसमें कुछ कमी आई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एक बार घटकर यह दोबारा बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।
दिल्ली सरकार ने अपने जॉब पोर्टल के जरिए बताया था कि उसके यहां काम के अवसर ज्यादा हैं, जबकि नौकरी चाहने वालों की संख्या कम है। सरकार के मुताबिक उसके पास उपलब्ध नौकरियां नौ लाख से ज्यादा थीं, जबकि नौकरी चाहने वालों की संख्या लगभग 8.5 लाख के करीब थी। लेकिन सीएमआईई के आंकड़े इस बात की तस्दीक नहीं करते हैं।
इन आंकड़ों के मुताबिक राजधानी दिल्ली में बेरोजगारी दर 20.3 फीसदी तक पहुंच गई है, यानी यहां हर पांचवे व्यक्ति को नौकरी की तलाश है। हरियाणा में 24.5 फीसदी बेरोजगारी दर्ज की गई है, यानी यहां लगभग हर चौथे आदमी को नौकरी की तलाश है। पंजाब में भी 10.4 फीसदी लोगों के पास कोई नौकरी नहीं है।
किन राज्यों में कितनी बेरोजगारी
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनोमी (CMIE) के जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में बेरोजगारी दर 12.2 फीसदी तो उत्तर प्रदेश में 5.5 फीसदी दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ में 9 फीसदी, गोवा में 17.1 फीसदी, गुजरात में 1.9 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 18.6 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 11.2 फीसदी, झारखंड में 8.8 फीसदी, उत्तराखंड में 12.4 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 6.8 फीसदी, केरल में 6.8 फीसदी, मध्य प्रदेश में 3.6 फीसदी, महाराष्ट्र में 4.4 फीसदी, ओडिशा में 1.9 फीसदी, पुडुचेरी में 21.1 फीसदी, राजस्थान में 15.2, तो तमिलनाडु में 8.1 फीसदी, तेलंगाना में 9.1 और त्रिपुरा में 16.4 फीसदी लोग बेरोजगार हैं।
कौशल विकास के दावे कितने सही
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय भी लोगों को स्किल करने और रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास कर रहा है, लेकिन सीएमआईई के आंकड़ों से इसकी तालमेल बैठती नहीं दिखाई दे रही है। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अपने तमाम केंद्रों के जरिए लाखों युवाओं को दक्ष बनाया जा रहा है।
जन शिक्षण संस्थान योजना के तहत 4.10 लाख लोगों को 2019-20 में प्रशिक्षित किया गया है। कृषि क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए 3.42 लाख लोगों को विशेष कृषि के तरीके सिखाए गये हैं। देश में आईटीआई संस्थानों की संख्या लगभग 15 हजार पहुंच चुकी है। इसमें 5000 आईटीआई संस्थानों को पिछले पांच सालों के अंदर ही स्थापित किया गया है।