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निर्भया कांड के 6 साल बाद लड़कियों के लिए कितनी सुरक्षित है दिल्ली, ये आंकड़े खोल देंगे आपकी आंखें

Sun, 16 Dec 2018 04:44 AM IST
राजेश सैनी शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Sun, 16 Dec 2018 04:44 AM IST
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Even after Six years of Nirbhaya scandal girls are not safe in Delhi
सांकेतिक तस्वीर

निर्भया सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात के बाद पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े कदम उठाने का वादा किया था, पर ये बेमानी ही रहे। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो अब भी राजधानी में रोज औसतन छह महिलाएं दुष्कर्म की शिकार होती हैं। 10 महिलाओं के साथ किसी न किसी तरह छेड़छाड़ होती है। ये आंकड़े दर्ज वारदात के हैं। हकीकत में तो कई मामलों में महिलाएं शिकायत करने के लिए थाने ही नहीं जातीं।

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दिल्ली पुलिस के अधिकारी दुष्कर्म और छेड़छाड़ के बढ़ते आंकड़ों के पीछे कुछ और ही तर्क देते हैं। उनका कहना है कि निर्भया कांड के बाद बने सख्त कानून ने पीड़िताओं के विश्वास को बढ़ाया है। ऐसे में वह महिलाएं या पीड़िताएं भी अब थाने में शिकायत करने की हिम्मत करती हैं, जो पहले लोकलाज के डर से थाने तक नहीं पहुंच पाती थीं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में जानकार ही महिलाओं की आबरू से खिलवाड़ करते हैं। चार फीसदी से भी कम मामलों में अनजान शख्स महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामलों में लिप्त पाए गए हैं। अधिकारी का कहना था कि वारदात दर्ज होने के बाद पुलिस ने 80 फीसदी से ज्यादा मामलों को सुलझा लिया है।

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दुष्कर्म के आंकड़े
वर्ष       संख्या

2018    1983 
2017    2146 
2016    2155 
2015    2199 
2014    2166 
2013    1636 
(नोट: 2018 के आंकड़े 30 नवंबर तकं) 

छेड़छाड़ के आंकड़े
वर्ष       संख्या

2018    3066 
2017    3422 
2016    4165 
2015    5367 
2014    4322 
2013    3515 
(नोट: 2018 के आंकड़े 30 नवंबर तकं) 

पुलिस ने महिला सुरक्षा के लिए उठाए ये कदम

. दिल्ली पुलिस ने अपने सभी थानों में 24 घंटों सातों दिन महिला हेल्प डेस्क खोली है। इस पर अलग से फोन नंबर लगाए गए। यहां एक महिला पुलिसकर्मी 24 घंटे तैनात रहती है।
. सीमा विवाद खत्म कर अब रेप या छेड़छाड़ की पीड़िता दिल्ली के किसी भी थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैै।
. महिलाओं की शिकायत को सिर्फ महिला अधिकारी ही सुनती है। 
. एक स्पेशल सीपी को नोडल अफसर नियुक्त कर महिलाओं के लिए काम कर रहे एनजीओ के साथ बैठक करने का आदेश।
. छेड़छाड़ की वारदात देखते हुए स्कूलों और गर्ल्स कॉलेज के बाहर पीसीआर वैन और बीट कांस्टेबलों की तैनाती। 
. हिम्मत ऐप की शुरुआत। इस ऐप के जरिये महिलाएं कभी भी मदद मांग सकती हैं। 
. राजधानी में अंधेरे वाले स्थानों की पहचान कर प्रशासन से वहां लाइट की व्यवस्था करा गश्त बढ़ाई गई। 
. दिल्ली पुलिस ने महिलाओं की मदद के लिए ऑल वूमेन पीसीआर की शुरुआत की। फिलहाल राजधानी में अगल-अलग जगह 10 महिला पीसीआर वैनों को तैनात किया गया है। इनमें सभी पुलिसकर्मी महिलाएं हैं। 
. गैंग रेप के मामलों में दिल्ली पुलिस केे अुनरोध पर हाईकोर्ट ने ट्रायल में तेजी लाने का निर्देश दिया।
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