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पर्यावरण प्रदूषण नए युग की राजनीति, पराली प्रबंधन पर दिल्ली बन सकता है मॉडल स्टेट

Thu, 08 Oct 2020 07:04 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 08 Oct 2020 07:04 PM IST
सार

  • पर्यावरण प्रदूषण को संभालने का दिल्ली सरकार का तरीका कारगर रहा तो यह देश की राजनीति को दिखा सकता है एक नई दिशा, पराली प्रबंधन के नए तरीके की शुरुआत
  • अरविंद केजरीवाल ने पराली गलाने की दवा बनाने के केंद्र का निरीक्षण किया, तीन-चार दिनों में किसानों के लिए उपलब्ध हो जाएगी दवा

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Environmental pollution: Delhi can become model state on stubble management
Arvind Kejriwal at Parali Bio Decomposer Plant Pusa - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पर्यावरण प्रदूषण हर व्यक्ति हर जीव को प्रभावित करने वाला विषय है। लेकिन इसके बाद भी यह देश की राजनीति के केंद्र में कभी नहीं रहा। दिल्ली सरकार ने पराली प्रबंधन की नई तकनीकि पर काम करना शुरू कर दिया है। अगर यह कारगर रहती है तो राजधानी में ठंड के समय होने वाले प्रदूषण को कम करने का स्थाई विकल्प मिल सकता है। साथ ही, इसका राजनीतिक असर यह होगा कि पड़ोस के हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों को भी अपने यहां इसी तरह के उपाय करने पड़ेंगे, जिससे लोगों को साफ-स्वच्छ हवा मिल सकेगी।

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दिल्ली ने क्या किया उपाय

राजधानी दिल्ली में लगभग 700 हेक्टेयर भूमि है जिस पर गैर-बासमती धान की फसल का उत्पादन किया जाता है। किसानों के लिए हर साल इन फसलों की पराली को निबटाने की बड़ी समस्या सामने आती है। इसे जलाने पर दिल्ली के प्रदूषण में वृद्धि होती है और लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। लेकिन इनका समय पर उचित प्रबंधन न हो पाने से किसानों को अगली फसल के लिए समय पर खेत तैयार नहीं मिल पाते हैं जिससे उन्हें इसका नुकसान होता है।

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Environmental pollution: Delhi can become model state on stubble management
Farmers burn stubble - फोटो : ANI

सरकार ने क्या किया

दिल्ली सरकार ने देश के वैज्ञानिकों की शीर्ष संस्था पूसा के साथ मिलकर पराली प्रबंधन का उपाय खोजा। वैज्ञानिकों ने बेसन और गुड़ को मिलाकर एक ऐसा रसायन तैयार किया जिसके घोल को पराली पर छिड़कने से वह 15-20 दिन में स्वयं गलकर नष्ट हो जाएगी। इससे पराली की समस्या किसानों के लिए वरदान बन जाएगी क्योंकि इससे खेतों को जैविक खाद मिलेगी जो उनमें ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देगी। अगली फसल के लिए किसानों को अपेक्षाकृत कम रासायनिक खादों का इस्तेमाल करना पड़ेगा जो भूमि, फसल और फसल के उपयोगकर्ताओं के हित में होगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को उक्त दवा बनाने वाली फैक्ट्री का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिल्ली के किसानों के लिए यह दवा पूरी तरह मुफ्त रहेगी। पूरी दिल्ली के लिए इसमें लगभग 20 लाख रुपये का खर्च आएगा, जिसे दिल्ली सरकार उठाएगी। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली का प्रयोग सफल रहा तो इससे अन्य राज्य इसी तरह का तरीका इस्तेमाल कर पराली प्रबंधन को प्रेरित होंगे।

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