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क्रिश्चियन मिशेल की वजह से राफेल सौदे में हुई देरी, प्रवर्तन एजेंसियां करेंगी जांच
Mon, 04 Mar 2019 08:23 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Mon, 04 Mar 2019 08:23 AM IST
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क्रिश्चियन मिशेल
अगस्ता वेस्टलैंड के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल का नाम अब राफेल सौदे में हुई कथित देरी से भी जुड़ता नजर आ रहा है। प्रवर्तन एजेंसियां अब इस बात की जांच कर सकती हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 के दौरान राफेल सौदे में हुई देरी में क्या मिशेल ने कोई भूमिका निभाई थी या नहीं। ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ यह जांच इसलिए भी की जा रही है क्योंकि वीवीआईपी चॉपर डील में मिली कथित सफलता के बाद रक्षा क्षेत्र में उसकी ख्याति काफी बढ़ गई थी।
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सूत्र का कहना है कि इस बात की जांच की जाएगी कि मिशेल राफेल सौदे में हुई व्यापक लॉबिंग का हिस्सा था या नहीं। इसकी भी जांच की जाएगी कि 2012 में मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान राफेल अधिग्रहण को ठंडे बस्ते में डालने के पीछे उसका हाथ था या नहीं। इस सौदे पर उस समय बात इसलिए आगे नहीं बढ़ी क्योंकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ वारंटी और विमानों के निर्माण को लेकर कुछ मतभेद हो गए थे।
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सूत्र ने बताया कि जनवरी 2012 में राफेल को एल1 (सबसे कम बोली लगाने वाला) घोषित किया गया था। दसॉल्ट एविएशन के साथ बातचीत भी काफी आगे बढ़ चुकी थीं लेकिन कुछ मुद्दों पर काफी मतभेद हो गए। जिसके बाद इस सौदे को खत्म कर दिया गया।
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सूत्र का कहना है कि मिशेल की प्रतिष्ठा रक्षा क्षेत्र में तब काफी बढ़ गई थी जब उसने भारत में 12 वीवीआईपी चॉपर का 3,600 करोड़ रुपये का सौदा करवाया था। 2010 तक उसकी ख्याति रक्षा क्षेत्र के एक ऐसे बिचौलिए के तौर पर बन गई थी जिसका भारतीय निर्णय (डिसिजन मेकिंग) प्रणाली में काफी प्रभाव था। उसे कथित तौर पर राफेल के प्रतिस्पर्धी यूरोफाइटर टाइफून को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया था।
जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जिससे पता चलता कि मिशेल की दिलचस्पी अचानक से यूरोफाइटर में हो गई थी। प्रवर्तन निदेशालय जिसने मिशेल से अगस्ता वेस्टलैंड मामले में दो हफ्ते तक पूछताछ की थी, वह अब दूसरे रक्षा सौदे में उसकी कथित भूमिका की जांच कर रहा है। बता दें कि अगस्ता वेस्टलैंड में मिशेल पर 200 करोड़ की घूस लेने का कथित आरोप है। माना जाता है कि उसने इस घूस का हिस्सा अपने भारतीय संपर्को के साथ साझा किया था।