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किसी खास इंडस्ट्री को बढ़ावा देना, उसकी हत्या करने का रास्ता ढूंढ़ने जैसा: रघुराम राजन

Thu, 12 May 2016 07:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 12 May 2016 07:57 PM IST
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encouraging any industry surest way of killing it raghuram rajan
'नीति निर्माताओं को कारोबार के तौर तरीके तय करने से बचना चाहिए' - फोटो : ANI

किसी खास सेक्टर को छूट देने का विरोध करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि किसी इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करना उसकी हत्या करने का निश्चित तरीका है और नीति निर्माताओं को कारोबार के तौर तरीके तय करने से बचना चाहिए।  

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उन्होंने उद्योग संगठनों द्वारा सरकार से कुछ करने के लिए की जाने वाली मांगों जैसे वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने से रुपये की कीमत को कम करने को लेकर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि मुद्रा की कीमत से यह जरूरी नहीं है कि भारत के व्यापार का आकार कम हो जाए। राजन अर्थव्यवस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर अपनी राय खुल कर जाहिर करने के लिए जाने जाते हैं। राजन ने एक प्रोजेक्ट सिंडीकेट आर्टिकल में कहा है कि विकसित अर्थव्यवस्थाएं मांग को प्रोत्साहित करने के लिए आक्रामक मौद्रिक नीतियां अपनाकर भारत जैसे उभरते बाजारों पर जोखिम थोप रहे हैं।
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उन्होंने लिखा है कि एक दिन हम अचानक पूंजी प्रवाह में उछाल देखते हैं क्योंकि निवेशक जोखिम लेने के मूड में है और अगले दिन पूंजी बाहर चली जाती है क्योंकि वे जोखिम नहीं लेना चाहते। उन्होंने लिखा है कि मुझे अक्सर पूछा जाता है कि हमें किस इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करना चाहिए। मेरा कहना है कि किसी इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करना उसकी हत्या करने का निश्चित तरीका है। नीति निर्माता के तौर पर हमारा काम कारोबारी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए माहौल बनाना है न कि कारोबार के तौर तरीके तय करना।
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आईएमएफ के पूर्व अर्थशास्त्री राजन ने कहा कि भारत अर्थव्यवस्था के तमाम कारकों की स्थिरता का घरेलू प्लेटफार्म बनाने का प्रयास कर रहा है। इस पर ग्रोथ को बढ़ाया दिया जाएगा जिससे हम बाहरी उतार चढ़ाव से अपने बाजार को बचा सकें। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ग्रोथ की स्थिति बेहतर न होने और लगातार दो वर्ष सूखे के बावजूद भारत 7 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर बनाए रखने में सफल रहा है। बीते समय में इन दोनों स्थितियों में अर्थव्यवस्था अनियंत्रित गिरावट के दौर में जा सकती थी।

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