अमेरिकी सेना के जवानों के बूट से बनेगी बिजली, जीपीएस से नजर
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अमेरिकी सेना के जवानों को अब युद्ध के मैदान में बिजली के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। अमेरिकी सेना रोबोटिक रिसर्च कंपनी एलएलसी के साथ मिलकर सेंसर युक्त बूट का सोल तैयार कर रही है जो पैदल चलने के दौरान बिजली बनाएगा। खास बात ये है कि इसके जरिए युद्ध के मैदान में जवानों केहर कदम पर नजर रखी जा सकती है क्योंकि इसमें जीपीएस लगा होगा।
रोबोटिक रिसर्च एलएलसी को अमेरिकी सरकार ने हाल ही एक करार के तहत 16.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 117 करोड़ रुपए) का बजट जारी किया है। कंपनी इसे बनाने के लिए वॉरलॉक तकनीक का इस्तेमाल करेगी। जानकारों का मानना है कि इनसोल तकनीक से लैस बूट को पहनकर जब जवान चलेगा तो दबाव पड़ने से बिजली पैदा होगी जो उसमें लगे जनरेर्ट्स में एकत्र होगी।
इस बिजली से जवान अपने पास मौजूद जरूरी सुरक्षा उपकरणों जैसे सैटेलाइट फोन, टॉर्च के साथ अपने गैजेट्स को भी चार्ज कर सकते हैं। यह तकनीक प्रभावी होती है तो जवानों को दुर्गम इलाकों से भी अपनी यूनिट या परिवार के लोगों से भी संपर्क साधने में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सी5आईएसआर का पेटेंट प्रोडक्ट
इनसोल टेकभनोलॉजी की खोज सेना के सी5आईएसआर (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, कॉमबैट सिस्टम, इंटेलिजेंस, सर्विलांस रिकॉनसाइसेंस) ने की है जो उसका पेटेंट प्रोडक्ट है। सी5आईएसआर सेंटर के मैकेनिकल इंजीनियर नाथन शार्पस ने बताया कि अमेरिकी सेना के जवानों के लिए एक इनसोल तकनीक के साथ विशेष बूट बनाने की योजना है जिसपर दबाव पड़ने से उसमें लगा रोलर तेजी से घूमेगा और बिजली पैदा होगी।
युद्ध के मैदान में समस्या को कम करना लक्ष्य
वैज्ञानिकों ने 2017 में प्रयोग के तौर पर बैटरी की मदद से ऐसी तकनीक बनाई थी। इससे जरूरी गैजेट्स को चार्ज किया जा सकता था लेकिन बैटरी का वजन अधिक होने के चलते युद्ध के मैदान में ये जवानों के अनुकूल नहीं था। इसी तरह 2016 में अमेरिकी मरीन ने घोषणा की थी कि वे जवानों के लिए विशेष पैंट पर काम कर रही है जिसको पहनकर चलने पर बिजली बनेगी। अमेरिकी मरीन ने इसे ‘पॉवर वॉल्क’ नाम दिया था।
मिशन को मिल सकता है अधिक समय
अमेरिका के नैटिक सोलजर रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इंजीनियरिंग सेंटर के आर्मी सिस्टम इंजीनियर नोएल सोतो का कहना है कि इस तरह की तकनीक सफल होती है जो जवानों के शरीर से बिजली उपकरणों का भार कम होगा। युद्ध के मैदान में मिशन को और अधिक समय मिल सकता है क्योंकि जवानों के पास जरूरत की बिजली उपलब्ध रहेगी।