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सियासत: चुनाव गुजरात और हिमाचल में, लेकिन राजनीतिक तपिश इस राज्य में सबसे ज्यादा, ये है सबसे बड़ा कारण

Mon, 02 May 2022 09:26 AM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 02 May 2022 09:26 AM IST
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सार
राज ठाकरे सत्ता से बाहर है और उनको सत्ता में वापसी करनी है। ऐसे में उनके पास भारतीय जनता पार्टी को सपोर्ट करने के सिवाय कोई दूसरा चारा सामने नजर नहीं आता है।
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Elections in Gujarat and Himachal but political propaganda in Maharashtra know the opinion of experts
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे - फोटो : पीटीआई

विस्तार

2022 चुनावी साल है। 5 राज्यों के चुनाव अभी हो ही पाए हैं कि हिमाचल और गुजरात की तैयारियां शुरू हो गई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अगले कुछ महीनों में जिन दो राज्यों में चुनाव होने हैं उससे ज्यादा राजनीतिक तपिश तो महाराष्ट्र में हो रही है। जहां पर फिलहाल विधानसभा के चुनाव नजदीक नहीं है। उससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जिस उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव अभी कुछ महीने पहले ही हुए हैं उसी यूपी के मुख्यमंत्री का नाम लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में पारा हाई हो रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनाव भले गुजरात और हिमाचल में हो लेकिन अभी तक के माहौल के मुताबिक आने वाले चुनावों की राजनीतिक धुरी महाराष्ट्र बनाई जा रही है, लेकिन पूरा केंद्र बिंदु उत्तर प्रदेश पर ही होगा।



शिव सेना और मनसे के बीच चल रही है बयानबाजी
रविवार को महाराष्ट्र दिवस पर पूरे प्रदेश में अलग-अलग कार्यक्रम हो रहे हैं। इसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत तमाम बड़े नेता अलग-अलग जगह पर कार्यक्रम कर रहे हैं, लेकिन इन कार्यक्रमों के दौरान शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच में लगातार वाक युद्ध जारी है। महाराष्ट्र के राजनीतिक विशेषज्ञ अखिलेश पवार कहते हैं बीते दिनों में जिस तरीके से राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वहां के मॉडल को डेवलपमेंट का मॉडल बताकर पेश करना शुरू किया है, उसी से शिवसेना के नेताओं की त्योरियां चढ़नी शुरू हो गई। शिवसेना के नेताओं की ओर से राज ठाकरे पर हमला किया जाने लगा कि कुछ समय पहले तक वह जिस उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बारे में गलत बयानी करते थे आज वह भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक मोहरा बनकर उन्हीं की तारीफ कर रहे हैं। शिवसेना के इसी बयान पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रवक्ता कहते हैं कि जब उद्धव ठाकरे के पास कोई जवाब नहीं है तो उनकी पार्टी की ओर से पुरानी बातों को उखाड़ कर सामने लाया जा रहा है। वो कहते हैं कि इससे महाराष्ट्र का फ्लॉप डेवलपमेंट मॉडल बिल्कुल दुरुस्त नहीं होने वाला। फिलहाल दोनों नेताओं और राजनीतिक दलों के बीच में हो रही जुबानी जंग में केंद्र उत्तर प्रदेश और अयोध्या ही बनी हुई है। राजनीतिक जानकार कहते हैं दरअसल महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा से उत्तर प्रदेश का बड़ा योगदान रहा है। वह भले ही शिवसेना के निशाने पर रहे उत्तर भारतीय हो या अयोध्या में राम मंदिर के मामले में शिवसेना की और बाला साहब ठाकरे की सक्रियता रही हो।


महाराष्ट्र दिवस पर भी हो रही है लाउडस्पीकर और माइक की चर्चा 
महाराष्ट्र में राजनीतिक मामलों के जानकार हरीश वाड़वलकर का कहते हैं रविवार को होने वाले महाराष्ट्र दिवस को ही ले लें। उनका कहना है महाराष्ट्र दिवस पर भी जिस तरीके से दोनों राजनीतिक दल हनुमान चालीसा, लाउडस्पीकर और माइक  की चर्चा कर रहे हैं उसकी शुरुआत तो उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से हुई और जहां पर उत्तर प्रदेश की सरकार ने तेज आवाज में बज रहे लाउडस्पीकर को धार्मिक स्थलों से  न सिर्फ उतरवाया बल्कि उनकी आवाज भी कम करवाई। वो कहते हैं महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में गांव शहर और तालुको में जब इसका जिक्र होता है तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चर्चा भी होती है। वह कहते हैं कि राजनीतिक चौसर में यह ज्यादा जरूरी होता है कि आपका लक्ष्य कहीं हो और आप निशाना कहां पर लगाते रहे। हरीश कहते हैं महाराष्ट्र की राजनीति में कमोवेश कुछ वैसी ही तस्वीर दिख रही है। उनका कहना है कि जिस तरीके से महाराष्ट्र में अचानक से हाशिए पर गए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश के मॉडल की चर्चा महाराष्ट्र में कर रहे हैं उससे लोगों में संदेश जा रहा है कि वह भारतीय जनता पार्टी से कहीं ना कहीं से जुड़ रहे हैं। उनका कहना है कि राज ठाकरे सत्ता से बाहर है और उनको सत्ता में वापसी करनी है। ऐसे में उनके पास भारतीय जनता पार्टी को सपोर्ट करने के सिवाय कोई दूसरा चारा सामने नजर नहीं आता है। खासतौर से हिंदुत्व के मामले में इन दिनों शिवसेना का तेवर इतना उग्र नहीं है जितना कि राज ठाकरे का है। राज ठाकरे के उग्र तेवरों के चलते ही शिवसेना ने राज ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के हिंदुत्व को खोखला करार दे दिया है। महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने तो शनिवार को हुई बैठक में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के हिंदुत्व को फर्जी तक करार दे दिया है।

'शिवसेना अब सरकार चलाने की स्थिति में नहीं'
महाराष्ट्र निर्माण सेना के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि शिवसेना अब सरकार चलाने की स्थिति में ही नहीं है। उनका कहना है गठबंधन की सरकार में शिवसेना फेल हो चुकी है। शिवसेना नेता पर पलटवार करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू वोटों को काटने के लिए शिवसेना के खिलाफ एक "हिंदू ओवैसी" तैयार कर दिया है। जैसे ही महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदू ओवैसी का नाम आया तो असदुद्दीन ओवैसी ने इसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल बेवजह धार्मिक उन्माद को भड़काने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक विशेषज्ञ और वर्धा विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जेएस देशमुख कहते हैं कि हिंदुत्व की कसौटी पर महाराष्ट्र को जितना कसा जाएगा उतना ही चुनावी फायदा गुजरात के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। प्रोफेसर देशमुख कहते हैं कि बीते कुछ दिनों से हो रहे राजनीतिक घटनाक्रम को अगर आप हिंदुत्ववादी बयानों और तेवरों को देखेंगे तो पाएंगे कि गुजरात और हिमाचल में होने वाले विधानसभा के चुनावों में इसकी बिल्कुल चर्चा नहीं हो रही है। जबकि महाराष्ट्र में हिंदुत्व की धुरी तैयार हो रही है। जिसका आने वाले विधानसभा के चुनावों में राजनीतिक नफा नुकसान भी दिखेगा।

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