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लोकसभा चुनाव 2019 : सर्वे में मोदी सरकार की वापसी के संकेत, लेकिन बार-बार फेल हुए हैं अनुमान

Sun, 19 May 2019 07:57 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Amit Digital Updated Sun, 19 May 2019 07:57 PM IST
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Elections 2019 : Surveys indicate victory of Modi Government but how authentic Exit Polls can be

लोकसभा चुनाव में अंतिम चरण के मतदान के साथ ही आज सभी प्रमुख चैनलों के सर्वे सामने आ गए हैं। लगभग सभी सर्वे में बीजेपी सरकार की केंद्र सरकार में वापसी का अनुमान लगाया गया है। ज्यादातर सर्वे में एनडीए को एक बार फिर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का अनुमान लगाया जा रहा है। 

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लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भारत के संदर्भ में ये प्री-पोल सर्वे या एग्जिट पोल बहुत कामयाब नहीं रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा, यह किसी भी सर्वे ने नहीं बताया था। सिर्फ लोकसभा चुनाव ही नहीं, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव परिणाम का आकलन करने में भी सर्वे कामयाब नहीं रहे हैं। 

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2014 के लोकसभा चुनाव के सर्वे में किसने क्या कहा था

नरेंद्र मोदी की लहर में जब भाजपा अकेले पूर्ण बहुमत (272 सीट) की ओर बढ़ रही थी, एनडीटीवी-हंसा सर्वे में उन्हें 226 सीटें दी जा रही थीं। सर्वे में एनडीए को 275 सीटें मिलने का अनुमान किया गया था। सर्वे में कांग्रेस को 92 तो यूपीए को 111 सीटें मिली थीं। जबकि कांग्रेस इसके आधे से भी कम सीटें यानी केवल 44 पर ही सिमट गई थी। 

टाइम्स नाउ-इंडिया टीवी-सी वोटर के सर्वे में बीजेपी को 202, एनडीए को 227 और कांग्रेस को 89 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। एक अन्य महत्त्वपूर्ण सर्वे एबीपी-नील्सन ने एनडीए को 236 और यूपीए को 92 सीटें देने की बात कही थी। जबकि चुनाव के बाद परिणाम में भाजपा को अकेले 282 सीटें मिलीं थीं। 

उत्तर प्रदेश में भी ध्वस्त हुए थे सर्वे 

यूपी की 17वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी। 404 विधायकों के निचले सदन में बीजेपी ने 312 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सहयोगी दलों के साथ सदन में उसकी ताकत 325 सीटों तक पहुंच गई थी और योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में यूपी की सत्ता संभाली। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी 47 सीटों पर तो बहुजन समाज पार्टी केवल 19 सीटों पर सिमट गई थी।

सभी सर्वे जनता के मन में चल रहे बदलाव को भांपने में बिल्कुल नाकाम रहे थे। एबीपी न्यूज ने उस चुनाव में बीजेपी को महज 120 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था, जबकि उसने बसपा को सबसे बड़ा दल होने की संभावना जताई थी और उसे 185 सीटें जीतता बताया था। 

इंडिया टीवी के सर्वे में भी बीजेपी को अधिकतम 150 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया था, जबकि उसने सपा और कांग्रेस के गठबंधन को 138 से 162 सीटें मिलने की संभावना व्यक्त की थी। चैनल ने बसपा को 95 से 111 सीटें मिलने की संभावना जताई थी। इंडिया टुडे-एक्सिस के सर्वे में बीजेपी को 208-216, बसपा को 119-138 और सपा-कांग्रेस गठबंधन को 97-104 सीटें  मिलने का अनुमान व्यक्त किया था।  

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दिल्ली में फेल रहे सारे सर्वे

सात फरवरी 2015 को दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हुए थे। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अकेले 70 सदस्यीय विधानसभा में 67 सीटें हासिल कर इतिहास रच दिया था। इस चुनाव में भाजपा को महज तीन सीटें मिलीं तो कांग्रेस शून्य पर आ गई थी। लेकिन मतदाताओं के मन में चल रही बदलाव की इस आंधी को पढ़ने में ज्यादातर सर्वे एजेंसियां नाकामयाब रहे थे। 

जी न्यूज ने इस चुनाव में आप को 32 तो भाजपा को लगभग 34 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया था। टाइम्स नाउ ने आप को 34 सीटें तो भाजपा को 32 सीटें दिया था। इंडिया टुडे-सिसरो के सर्वे में आप को 42 तो बीजेपी को 22 लगभग सीटें देने की बात कही गई थी। एनडीटीवी ने आप को 37 और बीजेपी को 29 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया था। एबीपी-नील्सन सर्वे ने भी आप को 35 तो भाजपा को 29 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया था।

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