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North-East: मोदी के इस प्लान से उत्तर-पूर्व बना सियासत का केंद्र, तीनों राज्य दे रहे यह बड़ा सियासी संदेश

Fri, 03 Mar 2023 07:29 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 03 Mar 2023 07:29 PM IST
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सार
North-East: राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि नॉर्थ-ईस्ट के इन तीन राज्यों में आए चुनावी परिणाम यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि किस तरीके से भाजपा ने वहां पर न सिर्फ सधी हुई रणनीति से परिणामों को अपने खाते में डाला, बल्कि उसका संदेश भी पूरे देश भर में दिया...
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election results of North-East are creating electoral atmosphere in different states of the country
North-East: भाजपा मुख्यालय पर संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी। - फोटो : ट्विटर/भाजपा

विस्तार

नॉर्थ-ईस्ट से बहने वाली सियासी हवा अब देश के अलग-अलग राज्यों में चुनावी माहौल बना रही है। जबकि कुछ साल पहले तक नॉर्थ-ईस्ट में होने वाले चुनावों के परिणाम पूरे देश में न तो सियासत को गर्म कर पाते थे और न ही उनका असर देश के बाकी राज्यों में चुनावी माहौल बनाने के तौर पर हो पाता था। सियासत को करीब से जानने वालों का कहना है कि दरअसल नॉर्थ-ईस्ट को राजनीति की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने जो 'प्लान' बनाया वही आज हिट हो गया। नतीजतन आज समूचे नॉर्थ-ईस्ट में या तो भाजपा की सरकार है या फिर वह गठबंधन में शामिल है। नार्थ-ईस्ट में सियासत के बड़े केंद्र बनने का असर भी यही है कि शरद पवार, रामदास अठावले, चिराग पासवान जैसे नेताओं की रीजनल पार्टी भी अब नागालैंड जैसे राज्यों में चुनाव जीत रही हैं।

प्रचार-प्रसार में माहिर भाजपा

गुरुवार को आए तीन राज्यों के नतीजे देश की सियासत में एक बड़ा संदेश देने के लिए तैयार हैं। भाजपा ने जहां त्रिपुरा में वापसी की है वहीं नगालैंड में भाजपा और एनडीपीपी गठबंधन को बहुमत मिल गया है। मेघालय में एनपीपी भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि नॉर्थ-ईस्ट के इन तीन राज्यों में आए चुनावी परिणाम यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि किस तरीके से भाजपा ने वहां पर न सिर्फ सधी हुई रणनीति से परिणामों को अपने खाते में डाला, बल्कि उसका संदेश भी पूरे देश भर में दिया। शुक्ला कहते हैं कि वह बहुत लंबे समय तक नॉर्थ ईस्ट में काम कर चुके हैं। पहले भी चुनाव होते थे और उनके परिणाम आते थे। लेकिन उसका असर उसके पड़ोसी राज्यों तक पर नहीं होता था। जिस तरीके से त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में चुनावी नतीजों के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली भाजपा मुख्यालय पर आकर माहौल बनाया, उसका संदेश नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों से निकलकर देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गया। वह कहते हैं कि भाजपा को अपनी छोटी-छोटी जीत को भी बड़े संदेश के साथ समूचे देश में प्रचारित और प्रसारित करने की न सिर्फ कला आती है, बल्कि उसका सियासी फायदा भी उठाना आता है। यही वजह है कि नॉर्थ ईस्ट के चुनावी परिणाम अब समूचे देश में एक माहौल बना रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा कहते हैं कि दरअसल प्रधानमंत्री मोदी के एक प्लान ने नॉर्थ-ईस्ट के पूरे सियासी माहौल को बदल दिया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण नगा विद्रोही समूह नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक) के साथ जो समझौता हुआ, वह माहौल को पूरी तरीके से बदलने और नॉर्थ-ईस्ट में शांति लाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसके अलावा नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के सीमा विवाद और उसके चलते होने वाली आपसी झड़प को न सिर्फ समाप्त किया, बल्कि स्पष्ट रूपरेखा तय करके आपसी विवाद भी खत्म कराया गया। ओपी मिश्रा कहते हैं कि ऐसे बहुत से मामले थे जो न सिर्फ छोटी-छोटी बल्कि बड़ी घटनाओं को अंजाम देते थे और एक तरह से नॉर्थ-ईस्ट देश के मुख्य धारा से आज की तुलना में बहुत कटा हुआ भी माना जाता था। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की ऐसी ही कई विवादों को सुलझाने वाली योजना में न सिर्फ नार्थ-ईस्ट को देश के सभी राज्यों से मजबूती से जोड़ा बल्कि सियासी रूप से भी उसे मजबूत किया।

बाहर से आए राजनीतिक दलों ने लड़ा चुनाव

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गुरुवार को आए नगालैंड के चुनावी परिणाम को ही देखें, तो समझ में आता है कि कैसे छोटी-छोटी देश की राजनीतिक पार्टियों ने वहां पर जीत हासिल की है। इसमें रामदास अठावले की पार्टी से लेकर शरद पवार और चिराग पासवान की पार्टी भी शामिल है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक ओम दत्ता कहते हैं कि इन राजनीतिक पार्टियों की स्वीकार्यता ऐसे राज्य में तभी होती है, जब वहां की रीजनल पार्टियों के बागियों को टिकट नहीं मिलता है। ऐसा देखा गया है कि लंबे समय तक एक पार्टी में काम करने वाले कार्यकर्ता को टिकट नहीं मिलता है, तो वह दूसरे राजनीतिक दलों में जोर आजमाइश करता है। इसमें पार्टी से ज्यादा उस नेता का अपना व्यक्तिगत असर होता है और वह चुनाव भी जीतता है। हालाकी दत्ता कहते हैं कि नॉर्थ-ईस्ट में सियासी बदलाव की जो बयार बह रही है और उसे राजनीतिक दल खासतौर से भाजपा जिस तरीके से प्रचारित प्रसारित करती है, उसका लाभ तो भाजपा को मिलता ही है। साथ में, नॉर्थ-ईस्ट जो लंबे समय तक देश के अलग-अलग मैदानी राज्यों में सियासी तौर पर असर नहीं डाल पाता था, अब राजनीतिक के लिहाज से मजबूत भी हो रहा है।

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