Election Commission: क्या चुनाव आयोग को मिलेगा राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार? सरकार से कही यह बात
भारत में चुनाव कानून चुनाव आयोग को एक राजनीतिक दल के रूप में लोगों के संघ को पंजीकृत करने की शक्ति प्रदान करता है, लेकिन इसे पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं देता है। हाल ही में केंद्रीय विधायी सचिव के साथ बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने राजनीतिक दलों के पंजीकरण को वापस लेने का अधिकार दिए जाने पर जोर दिया था।
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भारत में चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव चाहता है। समय-समय पर आयोग अपनी मांगो को दोहराता रहा है। इसी क्रम में एक बार फिर से चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने की शक्ति हासिल करने के लिए नए सिरे से जोर दिया है। चुनाव आयोग पहले से ही भ्रष्टाचार में लिप्त गैर-मान्यता प्राप्त दलों की पहचान करने के लिए सफाई अभियान चला रहा है।
दरअसल, भारत में चुनाव कानून चुनाव आयोग को एक राजनीतिक दल के रूप में लोगों के संघ को पंजीकृत करने की शक्ति प्रदान करता है, लेकिन इसे पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं देता है। हाल ही में केंद्रीय विधायी सचिव के साथ बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने राजनीतिक दलों के पंजीकरण को वापस लेने का अधिकार दिए जाने पर जोर दिया था।
चुनाव आयोग का मानना है कि कई राजनीतिक दल पंजीकृत हो जाते हैं, लेकिन कभी चुनाव नहीं लड़ते। ऐसी पार्टियां सिर्फ कागजों पर होती हैं। चुनाव आयोग (ईसी) का कहना है कि कई बार आयकर छूट का लाभ उठाने के लिए राजनीतिक दल बनाए जाते हैं। चुनाव आयोग ने ऐसे ही कुछ आधारों पर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत सरकार को शक्ति प्रदान करने के लिए लिखा था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिस आयोग के पास राजनीतिक दलों को पंजीकृत करने का अधिकार है, उसे उपयुक्त मामलों में पंजीकरण रद्द करने का भी अधिकार होना चाहिए। चुनाव आयोग ने हाल ही में अपने रजिस्टर से कुल 198 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को हटा दिया था। इसके अलावा हाल ही में एक बयान में पोल पैनल ने कहा था कि गंभीर वित्तीय अनियमितता में शामिल तीन ऐसे दलों के खिलाफ आवश्यक कानूनी और आपराधिक कार्रवाई के लिए राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया है।
समय-समय पर इन प्रमुख मांगो को रखता आया है आयोग
- मतदाता पहचान पत्र से आधार को लिंक किया जाये और इसे अधिसूचित किया जाए।
- पात्र लोगों के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण करने के लिए चार कट-ऑफ तारीखों को अधिसूचित किया जाए।
- राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार चुनाव आयोग को दिया जाए।
- 2,000 रुपये से ऊपर के सभी दान के बारे में जानकारी देने को अनिवार्य बनाना और इसके लिए फॉर्म 24 ए में संशोधन करने की मांग की है। अभी ये लिमिट 20 हजार रुपए से ज्यादा की है।
गौरतलब है कि भारत में लगभग 2,800 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं। इसके अलावा, आठ दलों को राष्ट्रीय दलों के रूप में और 50 से अधिक को मान्यता प्राप्त राज्य दलों के रूप में मान्यता प्राप्त है।