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स्वच्छ गंगा के लिए केंद्र और यूपी ने अब तक कुछ नहीं किया : एनजीटी
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sat, 20 Aug 2016 02:11 AM IST
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एनजीटी ने आदेशों का पालन नहीं होने पर लगाई फटकार, दो हफ्ते का समय दिया
- फोटो : Reuters
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शुक्रवार को कहा कि गंगा को स्वच्छ बनाने की केंद्र और यूपी सरकार की कथित कोशिशों का नतीजा अब तक शून्य रहा है। ट्रिब्यूनल ने दोनों सरकारों की खिंचाई करते हुए हरिद्वार और कानपुर के बीच गंगा में डाले जाने वाले औद्योगिक कचरों के बारे में रिपोर्ट मांगी है। आदेशों का पालन नहीं किए जाने से नाराज एनजीटी ने सभी प्राधिकरणों, केंद्रीय मंत्रालय और यूपी सरकार को दो सप्ताह का अंतिम मौका दिया। इसके साथ ही चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर सभी संबंधित सचिवों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
एनजीटी ने पर्यावरण और वन, जन संसाधन, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य एजेंसियों की गंगा को स्वच्छ बनाने को लेकर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाने पर कड़ी आलोचना की और उन्हें दो सप्ताह में अंतिम रिपोर्ट सौंपने को कहा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि हर कोई हमारे पास आता है और कहता है कि हमने यह किया, हमने वह किया। लेकिन नतीजा शून्य है। सवाल यह है कि आप हरिद्वार से कानपुर के बीच गंगा को कैसे बचाते हैं। आपके पास इसके लिए क्या कार्ययोजना है।
एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आप हमारे पास आते हैं और इशारा करते हैं कि समस्या बहुत गंभीर है। लेकिन समाधान क्या है। दुर्भाग्यवश बार-बार के निर्देश के बावजूद रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं किया गया है। राज्य सरकार की संभवत: अलग प्राथमिकता है। लेकिन हमारी एक ही प्राथमिकता है वह यह कि गंगा साफ हो और हम यह करेंगे।
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एनजीटी ने पर्यावरण और वन, जन संसाधन, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य एजेंसियों की गंगा को स्वच्छ बनाने को लेकर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाने पर कड़ी आलोचना की और उन्हें दो सप्ताह में अंतिम रिपोर्ट सौंपने को कहा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि हर कोई हमारे पास आता है और कहता है कि हमने यह किया, हमने वह किया। लेकिन नतीजा शून्य है। सवाल यह है कि आप हरिद्वार से कानपुर के बीच गंगा को कैसे बचाते हैं। आपके पास इसके लिए क्या कार्ययोजना है।
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एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आप हमारे पास आते हैं और इशारा करते हैं कि समस्या बहुत गंभीर है। लेकिन समाधान क्या है। दुर्भाग्यवश बार-बार के निर्देश के बावजूद रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं किया गया है। राज्य सरकार की संभवत: अलग प्राथमिकता है। लेकिन हमारी एक ही प्राथमिकता है वह यह कि गंगा साफ हो और हम यह करेंगे।
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