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शिक्षा को शिक्षाविदों के लिए छोड़ दें: सुप्रीम कोर्ट
Tue, 13 Oct 2020 02:53 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 13 Oct 2020 02:53 AM IST
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2018 के एक फैसले को खारिज करते हुए कहा, शिक्षा को शिक्षाविदों के लिए छोड़ देना चाहिए।
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हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया था कि एमएड योग्यता प्राप्त व्यक्ति को शिक्षा के विषय के लिए सहायक प्रोफेसर नहीं बनाया जा सकता है। जस्टिस एसके कौल, जस्टिस अनिरूद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने उम्मीदवार आनंद यादव की अपील पर हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
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इस विवाद की शुरुआत इस मुद्दे के साथ हुई कि क्या किसी एमएड डिग्री धारी को शिक्षा विषय में एमए की डिग्री के समकक्ष माना जा सकता है या नहीं।
दरअसल, मई 2014 में उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सहायक प्रोफेसर के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। उस वक्त आयोग के पैनल ने चार शिक्षाविदों से इस बात के लिए मदद ली थी कि सहायक प्रोफेसर (शिक्षण) के लिए एमएड डिग्री के साथ-साथ शिक्षा विषय से एमए को स्वीकार किया जाना चाहिए।
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इसके बाद आयोग ने 11 जुलाई, 2016 को इस बारे में संशोधन प्रकाशित किया था और उम्मीदवारों को दोनों डिग्रियों के साथ पद के लिए योग्य बताया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने 14 मई, 2018 को शिक्षा विषय से एमए को पद के लिए योग्य तो माना, मगर एमएड को नहीं माना।