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त्रिपुरा: पत्रकारों पर यूएपीए एक्ट लगाने की निंदा, एडिटर्स गिल्ड ने सर्वोच्च न्यायालय से दखल देने की मांग की
Sun, 07 Nov 2021 11:04 PM IST
सुभाष कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
Published by: सुभाष कुमार
Updated Sun, 07 Nov 2021 11:04 PM IST
सार
संगठन ने कहा है कि अदालत को इस मामले में कड़ा दिशा निर्देश जारी करना चाहिए जिससे अलग-अलग सरकारों के द्वारा UAPA कानून का दुरुपयोग न किया जा सके।
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त्रिपुरा सरकार ने कुछ पत्रकारों सहित 102 लोगों पर यूएपीए कानून के तहत कार्रवाई की है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
त्रिपुरा में हाल ही में घटी हिंसक घटनाओं के बारे में लिखने के कारण सरकार ने कुछ पत्रकारों सहित 102 लोगों पर यूएपीए कानून के तहत कार्रवाई की है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने त्रिपुरा सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए गिल्ड ने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में दखल देने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि अदालत को इस मामले में कड़ा दिशा निर्देश जारी करना चाहिए जिससे अलग-अलग सरकारों के द्वारा यूएपीए कानून का दुरुपयोग न किया जा सके।
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आरोप है कि त्रिपुरा सरकार ने हाल ही में घटी हिंसक घटनाओं के बारे में रिपोर्टिंग करने पर कुछ डिजिटल मीडिया संस्थानों को नोटिस भेजा है। एक पत्रकार श्याम मीरा सिंह पर केवल इसलिए कार्यवाही की गई है क्योंकि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह लिख दिया था कि 'त्रिपुरा जल रहा है'। इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं जहां केवल एक सामान्य टिप्पणी पर भी पत्रकारों, प्रबुद्ध नागरिकों पर कठोर कानूनी कार्यवाई की गई है। गिल्ड ने इस प्रवृत्ति को अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया है।
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