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ED Questioned Rahul: कांग्रेस का आरोप- ईडी को प्रचार एजेंसी की तरह उपयोग कर रही सरकार, भाजपा बोली- यूपीए के जमाने में ही दर्ज हुआ था केस
सार
कांग्रेस इस कार्रवाई को बदले की राजनीति बता रही है। हालांकि, भाजपा का कहना है कि उक्त मामला मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले ही शुरू हो चुका था, लिहाजा इसे राजनीतिक कार्रवाई नहीं कहा जा सकता।
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Rahul gandhi Priyanka Gandhi
- फोटो : PTI
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) राहुल गांधी से तीन दिन पूछताछ कर चुका है। उन्हें 18 जून को एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सोनिया गांधी अस्वस्थ हैं, माना जा रहा है कि उनके स्वस्थ होते ही उनसे भी पूछताछ की जाएगी। कांग्रेस इस कार्रवाई को बदले की राजनीति बता रही है। उसका आरोप है कि यह किसी घोटाले की जांच नहीं हो रही, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनावों को देखकर चुनावी तैयारी की जा रही है और ईडी और सीबीआई को प्रचार एजेंसी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, भाजपा का कहना है कि उक्त मामला मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले ही शुरू हो चुका था, लिहाजा इसे राजनीतिक कार्रवाई नहीं कहा जा सकता।
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कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने अमर उजाला से कहा कि यह पहला मामला नहीं है। जिस राज्य में भी चुनाव होते हैं, केंद्र सरकार वहीं के नेताओं पर ईडी और सीबीआई के जरिए हमला करना शुरू कर देती है। इस तरह उन राजनीतिक दलों के प्रभावशाली नेताओं को चुप कराने की कोशिश की जाती है, जिनसे उसे खतरा महसूस होता है। यह ट्रेंड पूरे देश में देखा जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह के घर पर छापे डलवाए गए थे। ये छापे उस दिन पड़े जिस दिन उनकी बेटी की शादी हो रही थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के यहां छापे पड़ने शुरू हो गए थे। मुकुल रॉय जैसे जिन नेताओं ने भाजपा में शरण ले ली, उन पर छापे की कार्रवाई बंद कर दी गई, लेकिन जैसे ही वे वापस तृणमूल कांग्रेस में गए, उन पर दुबारा कार्रवाई शुरू हो गई। अभिषेक बनर्जी को अभी भी लगातार परेशान किया जा रहा है तो महाराष्ट्र में नवाब मलिक और अनिल देशमुख जैसे नेताओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
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भाजपा नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं?
डॉ. रागिनी नायक ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तानाशाही पर उतर आई है। वह अपने सामने किसी दूसरे दल को बचा नहीं रहने देना चाहती, इसलिए एजेंसियों के माध्यम से नेताओं को डराकर चुनाव में उन्हें कमजोर करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह किसी लोकतंत्र का लक्षण नहीं है, बल्कि यह तानाशाही का लक्षण है जहां शासक अपने विरूद्ध कोई आवाज नहीं उठने देना चाहता है।
राहुल पर कार्रवाई क्यों?
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी एजेंसी के एक डायरेक्टर ने बता दिया था कि इस मामले में कोई सबूत नहीं है और गांधी परिवार पर कोई आरोप नहीं बनता है। ऐसे में केंद्र सरकार इस रिपोर्ट के सात साल बाद दुबारा उसी मामले को चर्चा में क्यों लाना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसी समय में भाजपा के अनेक नेताओं पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन किसी एक नेता पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब खेल केवल 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर खेला जा रहा है। इसके लिए ईडी और सीबीआई को एक प्रचार तंत्र की मशीनरी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
गांधी परिवार को कोई राहत नहीं: भाजपा
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी ने कहा है कि गांधी परिवार पर नेशनल हेराल्ड के मामले में फर्जीवाड़ा करने का आरोप उसके सत्ता में आने से पहले ही दाखिल किया जा चुका था। इस मामले में गांधी परिवार को हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय से भी कोई राहत नहीं मिली है, लिहाजा इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। यह कोर्ट और संवैधानिक एजेंसियों का मामला है और इसे न्यायिक प्रक्रिया की दष्टि से ही देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस के पास इन सवालों के जवाब नहीं
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि यह मामला मनमोहन सिंह सरकार के समय कोर्ट के सामने आया था, लिहाजा इसके लिए वर्तमान सरकार को दोषी ठहराना सही नहीं है। इस मामले की सुनवाई में यह बात सामने आ चुकी है कि एक कंपनी के 99 फीसदी से ज्यादा शेयर धारकों से पूछे बिना कंपनी पर किसी दूसरे व्यक्ति को अधिकार दे दिया गया, यह सीधे तौर पर एक फ्रॉड का मामला बनता है।
प्रेम शुक्ला ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस अब तक यह जवाब नहीं दे पाई है कि उसने एजेएल को 90 करोड़ रूपये किस प्रकार और कहां से दिए। आयकर विभाग ने मामले के लेनदेन से संबंधित पूछताछ के लिए 44 बार नोटिस जारी किया है, लेकिन कांग्रेस ने अब तक उनका कोई जवाब दाखिल नहीं किया है।
सबसे बड़ी बात है कि इस मामले में एजेंसी ने 65 करोड़ रूपये की संपत्ति जब्त कर रखी है, लेकिन अभी तक इस संपत्ति की वापसी के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू तक नहीं की गई है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि कांग्रेस को मामले की सच्चाई पता है और वह अपनी संपत्ति वापस लेने तक की हिम्मत नहीं कर पा रही है।
महाराष्ट्र के नेताओं पर भी संगीन आरोप हैं और मामले की गंभीरता के कारण हाईकोर्ट और सर्वोच्च अदालत से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि हर मामले को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।