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ED: पहले फर्जी अवैध गेमिंग वेबसाइटों पर पैसा लगवाया, फर्जी जीत दिखाकर रोक लिया पैसा; 2300 करोड़ की अपराध की आय

Thu, 29 Jan 2026 07:54 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 29 Jan 2026 07:54 PM IST
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ED: Money was invested in fake illegal gaming websites, and the money was withheld by showing fake winnings.
ED - फोटो : Adobe Stock

एफआईआर किंग 567 और अन्य संबंधित प्लेटफार्मों ने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइटों के माध्यम से आम जनता के साथ धोखाधड़ी करने की प्लानिंग की। भोले भाले खिलाड़ियों को पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। शुरुआत में उन्हें यह भरोसा दिलाने के लिए कि ऑनलाइन सट्टेबाजी में कोई गड़बड़ नहीं है। इसमें बहुत फायदा होता है। इसके चलते फर्जी जीत दिखाई गई। भोले-भाले खिलाड़ियों ने खूब पैसा लगा दिया। जब वे जीता हुआ पैसा निकालने का प्रयास करते तो रकम को रोक दिया जाता था। आरोपियों ने इस तरीके से धोखाधड़ी कर 2300 करोड़ रुपये की 'अपराध की आय' एकत्रित कर ली। ईडी की जांच में पता चला है कि केसी वीरेंद्र और उसके सहयोगी एक ही कार्यप्रणाली से संचालित होने वाले राष्ट्रव्यापी अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के सरगना हैं। 

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत केसी वीरेंद्र और उनके सहयोगियों से जुड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी व जुआ गतिविधियों के मामले में अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किया है। इस अनंतिम कुर्की आदेश के तहत लगभग 177.3 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। जांच एजेंसी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में कृषि भूमि, आवासीय भूखंडों सहित अचल संपत्तियां और अन्य चल संपत्तियां शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने इन्हें अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी/जुआ संचालन से प्राप्त 'अपराध की आय' से प्रत्यक्ष रूप से अर्जित संपत्ति के मूल्य के रूप में कुर्क किया गया है। 
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ईडी ने विभिन्न राज्यों में विभिन्न राज्य पुलिस अधिकारियों द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की है। यह पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध है। ये एफआईआर किंग 567 और अन्य संबंधित प्लेटफार्मों सहित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइटों के माध्यम से आम जनता के साथ धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और जबरन वसूली से संबंधित हैं। 
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जांच से यह साबित हुआ है कि आरोपियों ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और धोखाधड़ी के जरिए जनता को ठगकर भारी मात्रा में 'अपराध से प्राप्त धन' अर्जित किया।

इस योजना में, भोले-भाले खिलाड़ियों को फर्जी अवैध गेमिंग वेबसाइटों पर पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। यह वेबसाइट, ऑनलाइन कैसीनो की तरह काम करती थीं। उनके द्वारा जमा की गई करोड़ों रुपये की रकम को पेमेंट गेटवे के माध्यम से निर्धारित पेमेंट एग्रीगेटर खातों में जमा कर दिया जाता था। पीड़ितों को पहले विश्वास दिलाने के लिए फर्जी जीत दिखाई जाती थी, और फिर अंततः निकासी रोक दी जाती थी। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अपराध से प्राप्त धन को लॉन्ड्रिंग करने के लिए सैकड़ों फर्जी खातों और कई पेमेंट गेटवे के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है। 

इससे पहले, ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत कई राज्यों में 60 से अधिक परिसरों में व्यापक तलाशी और जब्ती अभियान चलाया था। इसके दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोने की सिल्लियां, सोने और चांदी के आभूषण, वाहन, डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे। ईडी ने पीएमएलए की धारा 19 के तहत केसी वीरेंद्र को गिरफ्तार भी किया था। विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष एक अभियोग शिकायत दर्ज की गई है। जांच के दौरान जुटाए गए ठोस सबूतों के आधार पर, ईडी ने केसी वीरेंद्र की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से धारित संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। इनके बारे में माना जाता है कि वे अपराध की आय और धन शोधन में शामिल संपत्तियां हैं। 


इसके साथ ही ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत वर्तमान मामले में 320 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की हैं। इसके अलावा, जांच के दौरान, अब तक 2300 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की आय की पहचान की गई है, जो अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों के माध्यम से अर्जित की गई थी। बाद में कई स्तरों के लेनदेन के माध्यम से धन शोधन किया गया था। अपराध से प्राप्त शेष धनराशि का पता लगाने और इसमें शामिल सभी लाभार्थियों की पहचान करने के लिए जांच जारी है। 






 

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