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शराब घोटाला मामला: 'बिना सबूत के आरोप लगा रही एजेंसी...', सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को लगाई फटकार

Mon, 05 May 2025 04:32 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 05 May 2025 04:32 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बिना सबूत के आरोप लगाने पर ईडी को फटकार लगाई और कहा कि केंद्रीय एजेंसी का यह अब चलन बन गया है। अरविंद सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा कि जब 40 करोड़ की कमाई का दावा है, तो उसका कंपनी से कोई स्पष्ट संबंध क्यों नहीं दिखाया गया।

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ED making bald allegations, says SC on bail plea of accused in Chhattisgarh liquor scam
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को फटकार लगाई। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि एजेंसी बिना किसी सबूत के आरोप लगा रही है और यह एक चलन बन गया है।  
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जस्टिस अभय एस.ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच अरविंद सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में कथित 2000 करोड़ रुपये के शराब घाटाल मामले में जमानत की मांग की थी। बेंच ने कहा, ईडी ने कई मामलों में यही तरीका अपनाया है। आप बिना किसी सबूत के केवल आरोप लगाते हैं। इस तरीके से अभियोजन पक्ष इस कोर्ट के सामने टिक नहीं पाएगा। 
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सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी.राजू ने आरोप लगाया कि अरविंद सिंह ने विकास अग्रवाल नाम के एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलीभगत करके 40 करोड़ रुपये कमाए। जब कोर्ट ने पूछा कि क्या अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है, तो राजू ने जवाब दिया कि वह फरार है। 

इस पर कोर्ट ने कहा, आपने स्पष्ट आरोप लगाया है कि उन्होंने (अरविंद सिंह) ने 40 करोड़ रुपये कमाए। अब आप इस व्यक्ति का इस कंपनी या किसी अन्य कंपनी के साथ संबंध नहीं दिखा पा रहे हैं। शीर्ष कोर्ट ने आगे कहा, आपको यह बताना चाहिए कि क्या वह उन कंपनियों के निदेशक हैं, क्या वह शेयरधारक हैं, क्या वह प्रबंध निदेशक हैं। कुछ तो होना ही चाहिए। 


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इस पर एएसजी राजू ने कहा, कोई व्यक्ति किसी कंपनियों को नियंत्रित कर सकता है। लेकिन जरूरी नहीं कि वह कंपनी के संचालन के लिए जिम्मेदार हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एजेंसी बेबुनियाद आरोप लगा रही है। मामले पर अगली सुनवाई नौ मई को होगी। 
 
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 28 अप्रैल को छ्त्तीसगढ़ सरकार को फटकार लगाई थी और पूछा था कि वह राज्य के अधिकारियों की ओर से दर्ज शराब घोटाला मामले में आरोपी को कितने समय तक जेल में रखेगी। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया था कि इस मामले में तीन आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं और जांच अभी भी जारी है। 


 
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