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ED: शराब घोटाले में सरकार को ₹4000 करोड़ की चपत, सोना या नकदी के रूप में ली रिश्वत, चुनाव में लगी 'काली' कमाई

Fri, 19 Sep 2025 07:41 PM IST
ज्योति भास्कर डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 19 Sep 2025 07:41 PM IST
सार

ईडी को पता चला है कि शराब घोटाले की काली कमाई का पैसा, चुनाव में भी लगाया गया था। जांच एजेंसी ने फर्जी/बढ़ा-चढ़ाकर किए गए लेनदेन के माध्यम से रिश्वत के भुगतान में मदद करने वाली संस्थाओं/व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली है। 

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ED Liquor scam govt 4000 crore loss after fraud bribes taken as gold or cash black money used in elections
ED - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने आंध्र प्रदेश शराब घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गुरुवार को हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तंजावुर, सूरत, रायपुर, दिल्ली एनसीआर और आंध्र प्रदेश में बीस स्थानों पर छापेमारी की है। यह मामला आंध्र प्रदेश में शराब घोटाले से जुड़ा है। इसमें सरकारी खजाने को 4000 करोड़ की चपत लगाई गई। आरोपियों को सोना/नकदी के रूप में रिश्वत दी गई।

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4000 करोड़ रुपये का नुकसान
ईडी ने सरकारी खजाने को 4000 करोड़ रुपये के नुकसान के लिए आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इस वर्ष पांच फरवरी को, आंध्र प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2024 तक की 'नई शराब नीति' के तहत, इस केस के आरोपी 'ब्रांड किलिंग और नए ब्रांड प्रमोशन' में लिप्त रहे।
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खरीद प्रणाली स्वचालित से मैन्युअल में बदली गई
इसमें उन लोकप्रिय शराब ब्रांडों (जैसे मैकडॉवेल्स, रॉयल स्टैग, इंपीरियल ब्लू, आदि) को दरकिनार करना शामिल था, जिन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया था। इसके बजाय डिस्टिलरी और आपूर्तिकर्ताओं से भारी भुगतान के बदले नए या नकली ब्रांडों को बढ़ावा दिया गया। खरीद प्रणाली को स्वचालित से मैन्युअल में बदल दिया गया, जिससे ऑर्डर फॉर सप्लाई (ओएफएस) में हेराफेरी की गुंजाइश बन गई।
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आपूर्ति मात्रा में हेरफेर करने की बात
एसआईटी ने आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दायर किए हैं, जिनमें अन्य बातों के अलावा, स्वचालित प्रणाली की जगह मैन्युअल अनुमोदन प्रणाली अपनाने, ब्रांड-वार इंडेंटिंग और आपूर्ति मात्रा में हेरफेर करने की बात सामने आई है।  चुनिंदा डिस्टिलरी और मार्केटिंग फर्मों को लाभ पहुंचाने, आपूर्तिकर्ताओं को उनके इनवॉइस मूल्य का 15-20% रिश्वत के रूप में देने के लिए मजबूर करने, ऐसा न करने पर उनके ब्रांडों को दबा देने या सूची से हटा देने की कार्रवाई की गई। 

आपूर्तिकर्ताओं को दबाने का आरोप
धन के प्रवाह को नियंत्रित करने और बढ़े हुए ओएफएस (ऑफिस) की मात्रा सुनिश्चित करने के लिए छद्म डिस्टिलरी बनाने, ब्रांड अनुमोदन में मदद करने वाले प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति, पात्रता मानदंडों में हेरफेर और असहमत आपूर्तिकर्ताओं को दबाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में दायर किए गए आरोप पत्रों में यह भी कहा गया है कि खरीद में हेराफेरी, फर्जी विक्रेता भुगतान, फर्जी कंपनियों के माध्यम से रिश्वत जुटाई गई और उसका इस्तेमाल चुनावी उद्देश्यों, निजी लाभ और विदेशों में धन हस्तांतरण के लिए किया गया था।

सेवाओं की आपूर्ति के बहाने अलग-अलग जगहों पर भेजे गए पैसे
ईडी की जांच से पता चला है कि कुछ आरोपियों ने जानबूझकर स्थापित ब्रांडों के लिए ऑर्डर देने से रोका। डिस्टिलरीज़ के देय वैध भुगतान रोके रखे गए। डिस्टिलरीज पर अनावश्यक दबाव डाला गया। ओएफएस के बदले अवैध भुगतान/रिश्वत की मांग की गई। ईडी द्वारा की गई मनी ट्रेल जांच से पता चला कि आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) द्वारा आपूर्तिकर्ताओं को दिए गए भुगतान का एक हिस्सा माल या सेवाओं की आपूर्ति के बहाने विभिन्न संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया था। 

लेन-देन बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए
ईडी के मुताबिक, हालांकि, ये लेन-देन फर्जी पाए गए और इन निधियों के प्राप्तकर्ता या तो अस्तित्वहीन, फर्जी संस्थाएं या असंबंधित व्यक्ति/संस्थाएं थीं। कई मामलों में, जहां संस्थाएं उनके व्यवसाय से संबंधित थीं, उनके लेन-देन बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा सोना/नकदी प्राप्त करने के लिए जौहरियों को भी धनराशि हस्तांतरित की गई, जिसे रिश्वत के रूप में आरोपी व्यक्तियों को सौंप दिया गया। इस प्रकार, व्यापारिक लेनदेन की आड़ में धन की हेराफेरी करने के लिए फर्जी/बढ़ा-चढ़ाकर किए गए लेनदेन का उपयोग किया गया, जिससे आरोपी व्यक्तियों को रिश्वत के रूप में अवैध धन का सृजन और संचलन आसान हो गया।


कीमतों के साक्ष्य देने वाले समानांतर चालान भी मिले
ईडी के तलाशी अभियान के दौरान, अपराध से प्राप्त आय (पीओसी) के सृजन और परिवहन के लिए फर्जी/बढ़ा-चढ़ाकर किए गए लेन-देन के साक्ष्य देने वाली आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। गैर-परिवहन वाहन विवरण वाले फर्जी चालान और परिवहन चालान भी जब्त किए गए हैं। अलग-अलग और बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई कीमतों के साक्ष्य देने वाले समानांतर चालान भी मिले हैं। कुछ फरार आरोपियों, जिनके दुबई में होने की आशंका है, की संलिप्तता और उन्हें पीओसी हस्तांतरित करने के साक्ष्य देने वाली चैट भी जब्त की गईं। एक परिसर से 38 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी जब्त की गई। कई करोड़ रुपये मूल्य के पीओसी के विदेश प्रेषण को दर्शाने वाले बहीखाते भी जब्त किए गए।

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